विकास शर्मा

अक्टूबर महीने में दिखाई देने वाला सूर्य ग्रहण सामान्य तौर पर दिखने वाले सूर्य ग्रहण से बहुत ही अलग होगा. यह एन्युलर प्रकार का सूर्य ग्रहण होगा और चंद्रमा की पृथ्वी की कक्षा में खास दूरी के कारण चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढकता नहीं दिखाई दे पाएगा. इस तरह का सूर्य ग्रहण एक या दो साल में एक ही बार देखने को मिल पाता है.

जब भी पृथ्वी और सूर्य के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो उसकी छाया पृथ्वी पर पड़ती है. इससे पृथ्वी पर लोगों को कई तरह के अनोखे नजारे देखने को मिलते हैं. कभी तो पूरा सूरज चंद्रमा के पीछे छिप जाता है तो कभी लोगों को केवल एक चमकती सी अंगूठी दिखाई देती है. लेकिन अगले महीने की 14 तारीख को दुनिया के कुछ हिस्सों में दिखने वाला सूर्य ग्रहण कुछ अलग ही तरह का नजारा लेकर आएगा क्योंकि यह सामान्य सूर्य ग्रहण नहीं है बल्कि एन्युलर सोलर एक्लिप्स यानि कंकणाकृति सूर्यग्रहण होगा. इस खगोलीय घटना प्रायः रिंग ऑफ फायर कहा जाता है. यह जानना वास्तव में रोचक है कि यह विशेष आकृति क्यों और कैसे बनती है.

कितने तरह के होते हैं सूर्य ग्रहण?
पूर्ण सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य की तीव्र चमक को पूरी तरह से रोक लेता है. इससे सूर्य की बाहरी वायुमडंल कोरोना बहुत ही धुंधला दिखाई देता है. लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता है कि कहीं ऐसा दिखाई दे कि चंद्रमा ने सूर्य को पूरा ढक लिया है. ऐसा तभी होता है जब चंद्रमा खास पतले रास्ते से होकर गुजरे. इस रास्ते को पाथ ऑफ टोटलिटी कहते हैं.

कब होता है एन्युलर सूर्य ग्रहण
एन्युलर यानि कंकणाकृति सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी की तुलना में एक ही रेखा में आते हैं लेकिन चंद्रमा का दिखाई देने वाला आकार सूर्य से छोटा होता है. ऐसी स्थिति में सूर्य एक छल्ले की की दिखाई देता है जिसे अंग्रेजी में एन्युलस कहते हैं, जो चंद्रमा की काली डिस्क के चारों ओर होती है.

क्या होता है रिंग ऑफ फायर वाला सूर्य ग्रहण?
सामान्य पूर्ण सूर्य ग्रहण की तुलना में, जहां चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से रोक देता है, कंकणाकृति सूर्य ग्रहण की स्थिति तब बनती है जब चंद्रमा पृथ्वी की कक्षा में सबसे दूरस्थ बिंदु पर होता है. इसका मतलब है कि चंद्रमा आसमान में सूर्य की तुलना में कुछ छोटा दिखाई देता है और इस वजह वह सूर्य को पूरी तरह से ढकता हुआ नहीं दिख पाता है जिससे उसके आसपास एक आग का छल्ला दिखाई देता है.

किन देशों में दिखाई देगा रिंग ऑफ फायर एक्लिप्स
आगामी 14 अक्टूबर को दिखाई देने वाला सूर्य ग्रहण उत्तर, मध्य और दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा. नासा के मुताबिक सूर्य ग्रहण पैसिफिक डेलाइट टाइम के अनुसार सुबह 9.13 मिनट पर होगा. इसे ओरेगॉन, अमेरिका के कैलिफोर्निया, नेवादा, उटाह, एरिजोना, न्यूमैक्सिको, टेक्सास, जैसे राज्यों में दिखाई देगा.

मध्य और दक्षिण अमेरिका में भी
इसके अलावा सूर्य ग्रहण मैक्सिको, ग्वेटामाला, बेलिजे, हॉन्डोरस, निकारागुआ, पनामा, कोलंबिया, और ब्राजील में सूर्यास्त से पहले दिखाई देगा. इन इलाकों में सबसे ज्यादा स्पष्ट सूर्यग्रहण दिखाई देगा, लेकिन बहुत बड़े क्षेत्रों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखने को मिलेगा और उसका भी नजारा चंद्रमा की अधिक दूरी की वजह से कुछ अलग ही दिखाई देगा.

तो क्या भारत में नहीं दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण ऐसे समय पर हो रहा है जब भारत में रात रहेगा यानी भारत की उस समय स्थिति चंद्रमा के विपरीत दिशा में होगा और जब चंद्रमा के सामने भारत आएगा तब तक सूर्य ग्रहण खत्म हो चुका होगा. ऐसे में इस बार भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखने का अवसर नहीं मिलेगा. भारत ही नहीं पूरे एशिया और यूरोप में भी यह सूर्य ग्रहण नहीं देखा जा सकेगा.

इसके अलावा हाइब्रिड सोलर एक्लिप्स  वह अवस्था होती है जब सूर्य ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण और कंकणाकृति सूर्य ग्रहण के बीच की स्थिति का होता है. पृथ्वी के कुछ स्थानों पर यहग एक पूर्ण सूर्य ग्रहण की तरह दिखाई देता है तो वहीं दूसरे हिस्सों में यह कंकणाकृति सूर्य ग्रहण की तरह की दिखाई देता है. तुलनात्मक तौर पर हाइब्रिड किस्म के सूर्य ग्रहण बहुत ही कम देखने को मिलते है. वहीं इसके अलावा आंशिक सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी की  रेखा में सटीक तौर पर नहीं आ पाते हैं.

      (‘न्यूज़ 18 हिंदी’ के साभार )
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