दुनिया में मौत की भी अजीब वजहें होती हैं. आप यकीन नहीं करेंगे कि अमेरिका जैसे देश में मेडिकल स्क्रिप्ट की खराब हैंडराइटिंग से अब भी सालभर में हजारों लोग मर जाते हैं. बिस्तर से गिर जाने पर सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है. और भी मौत की कई ऐसी वजहें जो जानकर आप हैरान हो सकते हैं.

दुनियाभर में सबसे ज्यादा मौत किन वजहों से और किस तरह हो रही हैं? मानवता की शुरुआत से अब तक कितमे लोग मर चुके हैं? किस-किस तरह का मृत्यु दंड लीगल है? जानिए ऐसे ही बहुत से सवालों के जवाब.

मरने से तुरंत पहले जो खाना हमने खाया, मरने के तीन दिन बाद उसी खाने में मौजूद एंजाइम शरीर को खाने लगते हैं. ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, मृतकों को दफनाने की परंपरा 350 हजार वर्षों से अधिक पुरानी है. अनुमान है कि मानवता की शुरुआत से 100 बिलियन लोग मर चुके हैं. 153 हजार लोगों की मृत्यु उनके जन्म के दिन ही हुई.

लगभग सात हजार लोग हर साल मेडिकल स्क्रिप्ट पर खराब हैंडराइटिंग के कारण मर जाते हैं. ये आंकड़ें नेशनल अकादमी ऑफ साइंस इंस्टीट्यूट ने 2006 में, एक स्टडी में दिए. जॉन हॉपकिंस की वर्ष 2018 की एक रिपोर्ट कहती है कि केवल अमेरिका में हर मेडिकल गलतियों की वजह से ढाई लाख से ज्यादा लोग मरते हैं.

दूसरे कई अन्य अध्ययन में इन आंकड़ों को और ज्यादा बढ़ाकर बताया है. इन रिपोर्ट्स का दावा है कि अमेरिका में हर साल मेडिकल स्क्रिप्ट की गड़बड़ियों और मेडिकल गलतियों से 4.5 लाख के करीब लोग मरते हैं. ये आंकड़ा 05 साल पहले का है. लिहाजा इस संख्या में अब बदलाव तो हो सकता है. दुनिया के हर देश में डॉक्टरों की खराब हैंडराइटिंग से मरीज की स्थिति गंभीर होने या मरने की खबरें बहुत आम हैं. इसे लेकर भारत तक में ओडिशा हाईकोर्ट कहना पड़ा था कि डॉक्टर समझ में आने वाली हैंडराइटिंग में लिखें.

टाइम मैगजीन ने भी वर्ष 2018 में ये रिपोर्ट में ये कहा था कि डॉक्टर्स की खराब और घिस्सामार हैंडराइटिंग से वहां एक साल में 7000 से ज्यादा लोग मरे थे. नेशनल एकेडमिक्स ऑफ साइंस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिसिन (आईओएम) का कहना है कि डॉक्टर अपनी खराब राइटिंग में जो प्रिवेंटिव दवाएं लिखते हैं, वो अक्सर समझ में नहीं आतीं और उससे डेढ़ लाख ज्यादा लोग बीमार पड़ जाते हैं. गंभीर हो जाते हैं. रिपोर्ट कहती है कि अमेरिका में हर साल 32 करोड़ मेडिकल स्क्रिप्ट समझ में नहीं आने से दिक्कतें बढ़ जाती हैं.

मौत की और भी वजहें होती हैं. कभी कभी रोमांच भी इसकी वजह बनता है. माउंट एवरेस्ट पर 200 शव हैं जो इसकी पगडंडियों पर फैले हैं. ये शव शीर्ष पर पहुंचने की कोशिश करने वालों के लिए रेफ्रेंस पॉइंट की तरह इस्तेमाल किए जाते हैं. अध्ययन से पता चलता है कि शार्क मछली एक साल में लगभग 12 लोगों को मार देती है जबकि मनुष्य एक घंटे में लगभग 11,417 शार्क को मारते हैं.

टाइम मैग्जीन के मुताबिक, यूएस में हर साल 600 लोगों की मौत बेड से गिरने की वजह से हो जाती है. ये बात कुछ अस्वाभाविक लगती है लेकिन ये है. वजह है अकेले रहते लोग या नशे की हालत में सोते समय हुए हादसे.

आंकड़े बताते हैं विमान दुर्घटना में मारे जाने की तुलना में एयरपोर्ट के रास्ते पर कार दुर्घटना में मारे जाने की संभावना ज्यादा है. जब हम मरते हैं सुनाई देना सबसे आखिर में बंद होता है.

बहुत सी स्टडीज से पता चलता है कि एक्सरसाइज की कमी भी दुनिया में होने वाली सबसे अधिक मौतों के कारणों में से एक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है दुनिया में हर 8 में से 1 व्यक्ति प्रदूषण से जुड़ी बीमारी से मरता है.

ब्रिटेन में एक ऐसी सर्विस है जो किसी के अंतिम संस्कार में रोने के लिए लोग मुहैया कराती है. 2013 में गूगल ने Calico नाम की एक कंपनी को फंड दिया किया, जिसका मकसद मृत्यु का इलाज खोजना है.

नीदरलैंड्स की राजधानी एम्सटर्डम में अगर कोई अकेला रहता है और उसके अंतिम संस्कार में जाने वाला कोई नहीं है तो इसके लिए एक कवि मुहैया है जो समारोह में छोटी कविता लिखता और सुनाता है.

जापान में जो लोग अकेले रहते हैं और उनकी मौत हो जाती है, तो उनके लिए Kodokushi शब्द इस्तेमाल किया जाता है. LifeGem नाम की कंपनी लोगों की राख से हीरे बनाती है.

वर्तमान में, दुनिया भर में मौत की सबसे बड़ी वजह कैंसर, दिल से जुड़ी बीमारियां और सड़क हादसे हैं. एक वैज्ञानिक यह पता लगा सकता है एक व्यक्ति कब मर चुका है. वह वैज्ञानिक इस बात का पता शरीर में पाए जाने वाले कीड़ों की जांच करके करता है.

     (‘न्यूज़ 18 हिंदी’ के साभार )

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