रविशंकर सिंह

आंख से गिरने वाले आंसू को लेकर आया चौंकाने वाला लैब विश्लेषण. सिर्फ भावनाएं नहीं, आंसू में छिपा है सेहत का राज! वैज्ञानिकों ने बताया इसका अनोखा बायोलॉजिकल इस्तेमाल. आंसू सिर्फ दुख का नहीं, इलाज का जरिया भी हुआ बड़ा खुलासा.

हम सभी कभी न कभी रोते हैं. दुख में, खुशी में, दर्द में या तनाव में. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आंख से गिरने वाले आंसू (Tears) सिर्फ भावनाओं का इजहार नहीं करते, बल्कि इनके पीछे एक जैविक, वैज्ञानिक और चिकित्सकीय महत्व भी छुपा होता है। लैब टेस्ट, मेडिकल रिसर्च और डॉक्टर्स की मानें तो आंसुओं में कई ऐसे एंजाइम्स, प्रोटीन और बायो-केमिकल्स होते हैं, जो शरीर के लिए लाभकारी हो सकते हैं. न सिर्फ शारीरिक रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी. आप इस आंसू का इस्तेमाल कर कष्टकारी दर्द और मानसिक रोगों से मुक्त हो सकते हैं.
आंख के आंसू के इस्तेमाल कर आप लंबी उम्र भी जिएंगे और वैवाहिक जीवन का भी आनंद लेंगे. बहुत कम लोगों को पता है कि आंख से गिरने वाले आंसू उनके जीवन के लिए कितना वपदान साबित हो सकता है. सबसे पहले तो आप ये जान लें कि आंख से गिरने वाले हर आंसू का इस्तेमाल आप दवा के रूप में नहीं कर सकते हैं. आंसू तीन प्रकार के होते हैं. साइंटिफिक रूप से आंसुओं को तीन भागों में बांटा गया है.

आंख से कितने प्रकार के आंसू गिरते हैं?

पहला, बेसल टियर्स (Basal tears)– ये लगातार आंखों में बनते रहते हैं और आंखों को नमी, पोषण और सुरक्षा प्रदान करते हैं. दूसरा रिफ्लेक्स टियर्स (Reflex tears) जब आंखों में धुआं, प्याज या कोई जलन पैदा करने वाला तत्व आता है तो ये आंसू निकलते हैं. शरीर का रक्षा प्रणाली कितना मजबूत है यह आंसू से आपको पता चल जाता है. तीसरा है इमोशनल टियर्स (Emotional tears) दुख, गुस्सा, खुशी, तनाव या भावनात्मक प्रतिक्रिया के समय ये आंसू निकलते हैं. यह आंसू सबसे खास और रिसर्च के केंद्र में हैं. इसी आंसू को लेकर विज्ञान जगत में रिसर्च शुरू हो गए हैं. डॉक्टर से लेकर वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं कि इस आंसू से शरीर के किन-किन चीजों का इलाज किया जा सकता है.

आंसू में क्या होता है?

आंसुओं का रासायनिक विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने इनमें कई अहम घटकों की पहचान की है. पहला, लाइसोजाइम (Lysozyme)– यह एक एंजाइम है, जो बैक्टीरिया को नष्ट करता है. इसका इस्तेमाल एंटीबैक्टीरियल प्रोडक्ट्स में किया जा सकता है. दूसरा, लैक्रीमल ग्लैंड्स से निकलने वाले प्रोटीन, जो आंख की नमी बनाए रखने और घर्षण कम करने में मदद करते हैं. तीसरा, हार्मोनल बायोकेमिकल्स जैसे एड्रेनालिन और कोर्टिसोल जो तनाव के समय निकलते हैं. इसलिए इमोशनल रोने से तनाव कम होता है. चौथा एनकैफेलिन्स (Enkephalins) जो नेचुरल पेनकिलर जैसा काम करता है, यह शरीर के दर्द को कम करता है.

वैज्ञानिक रिसर्च क्या कहती है?

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) और American Psychological Association (APA) की रिपोर्ट्स के अनुसार इमोशनल टियर्स में कुछ ऐसे हार्मोन और टॉक्सिन्स भी बाहर निकलते हैं, जो तनाव के दौरान शरीर में जमा हो जाते हैं. इसलिए रोने से शरीर डिटॉक्स होता है और मानसिक हल्कापन महसूस होता है। जापान, नीदरलैंड्स और अमेरिका की यूनिवर्सिटीज में आंसू पर हुई स्टडीज ने बताया है कि रोने के बाद शरीर में ऑक्सिटोसिन और एंडॉर्फिन बढ़ जाते हैं, जो मूड सुधारते हैं.
हालांकि, अभी तक आंसू का कोई व्यावसायिक या मेडिकल इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है. लेकिन लाइसोजाइम को आंसू या लार से आइसोलेट करके स्किन क्रीम, आई ड्रॉप्स या सैनिटाइज़र में मिलाया जा सकता है। इमोशनल टियर्स की बायोकेमिकल स्टडी से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े हार्मोन को बेहतर समझा जा सकता है, जिससे एंटी-डिप्रेशन मेडिसिन या स्ट्रेस मैनेजमेंट थेरेपी को और बेहतर किया जा सकता है. बेसल टियर्स से प्रेरित होकर बाजार में आर्टिफिशियल टियर्स बनाई गई हैं, जो ड्राई आई सिंड्रोम में इस्तेमाल होती हैं। कुलमिलाकर आंख से गिरने वाले आंसू केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं हैं, वे शरीर के अंदर और बाहर चल रहे जैविक संतुलन के प्रतीक हैं। ये ना केवल आंखों की रक्षा करते हैं, बल्कि मानसिक संतुलन, तनाव कम करने और बैक्टीरिया से लड़ने में भी मदद करते हैं। आने वाले वर्षों में, इन पर हो रहे रिसर्च से हो सकता है कि आंसू किसी इलाज या तकनीक का हिस्सा बन जाएं, और ये कहावत सही साबित हो आंसू सिर्फ दर्द नहीं, शरीर की दवा भी हैं
       (‘न्यूज़ 18 हिंदी’ से साभार )
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