दयानिधि

पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है: पिछले दशक में रिकॉर्ड गर्म साल सामने आए, वैश्विक जलवायु परिवर्तन अब पहले से कहीं अधिक गंभीर हो गया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि पृथ्वी का तापमान अब पहले से लगभग दो गुना तेजी से बढ़ रहा है। अगर यह रफ्तार बनी रही, तो पेरिस समझौते का 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य 2030 से पहले ही पार हो सकता है।

पॉट्सडाम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च (पीआईके) के अध्ययन के अनुसार, 2015 के बाद से तापमान में तेज वृद्धि देखी जा रही है। शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक घटनाओं के प्रभाव को अलग करके देखा, जिससे यह पता चला कि अब तक का सबसे तेज वृद्धि दर दर्ज की गई है।

हाल के वर्षों में तापमान वृद्धि

पिछले दशक में, वैश्विक तापमान लगभग 0.35 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक की दर से बढ़ा है। यह दर 1970 से 2015 के बीच के औसत 0.2 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक की तुलना में बहुत अधिक है। अध्ययन में कहा गया है कि यह तेजी 1880 से अब तक दर्ज तापमान रिकॉर्ड में सबसे तेज है। जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि अब यह स्पष्ट रूप से दिखा सकते हैं कि 2015 के आसपास से वैश्विक तापमान में तेज वृद्धि हो रही है।

प्राकृतिक कारणों को हटाकर विश्लेषण

छोटे प्राकृतिक प्रभाव जैसे एल नीनो, ज्वालामुखी विस्फोट और सूर्य की गतिविधियाँ कभी-कभी तापमान को अस्थायी रूप से बढ़ा या घटा सकते हैं। शोधकर्ताओं ने नासा, एनओएए, हैडक्रुट, बर्कले अर्थ और ईआरए5 जैसे पांच प्रमुख डेटा स्रोतों का उपयोग किया। इन आंकड़ों को प्राकृतिक कारकों से समायोजित करने के बाद, लंबी अवधि के तापमान वृद्धि का रुझान और स्पष्ट हो गया। शोध में कहा गया है कि आंकड़ों से 2015 के बाद तापमान में तेजी स्पष्ट होती है और यह सभी डेटासेट में समान रूप से दिखाई देता है।

कैसे किया गया अध्ययन?

वैज्ञानिकों ने यह पता करने के लिए दो मुख्य सांख्यिकीय तकनीकें अपनाई गई जिसमें क्वाड्रेटिक ट्रेंड विश्लेषण – यह दिखाता है कि तापमान वृद्धि की दर समय के साथ कैसे बदल रही है। पीसवाइज लिनियर मॉडल – यह लंबी अवधि में बदलाव के समय को पहचानता है। विश्लेषण से पता चला कि 2013-2014 के आसपास से तापमान वृद्धि में स्पष्ट तेजी दिखने लगी। भले ही 2023 और 2024 को सबसे गर्म साल माना गया, लेकिन समायोजित आंकड़ों में भी वृद्धि का रुझान स्पष्ट रहा।

पेरिस समझौते पर प्रभाव

अगर पिछले 10 वर्षों की दर जारी रहती है, तो पृथ्वी का तापमान 2030 से पहले 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है। यह सीमा पेरिस समझौते का महत्वपूर्ण लक्ष्य है, जिसे जलवायु परिवर्तन को गंभीर रूप से रोकने के लिए तय किया गया था। वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में तापमान वृद्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि हम कितनी जल्दी कोयला और पेट्रोलियम जैसी जीवाश्म ईंधन से सीओ2 उत्सर्जन को शून्य तक कम कर सकते हैं। अध्ययन में यह नहीं बताया गया कि इस तेजी के पीछे कौन से कारण हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि मानवजनित गतिविधियों से जुड़ी जलवायु परिवर्तन मॉडलिंग इस रुझान के अनुरूप है।

वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ भविष्य की चिंता नहीं है। यह वर्तमान में तेजी से हो रहा है और इसके प्रभावों को कम करने के लिए तत्काल कदम उठाना जरूरी है। वैश्विक तापमान अब पहले की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है। यदि उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो पृथ्वी का तापमान 2030 तक पेरिस समझौते के लक्ष्य से आगे बढ़ सकता है। वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक प्रभावों को हटाकर यह निष्कर्ष निकाला है और चेतावनी दी है कि हमें जलवायु संरक्षण के लिए जल्दी कदम उठाने होंगे।

       (‘डाउन-टू-अर्थ’ से साभार )

Spread the information