हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी 14 जून 2021, सोमवार को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जा रहा है. रक्तदान से केवल दूसरों की जान ही नहीं बचाई जा सकती बल्कि खुद भी निरोग रहा जा सकता है. विशेषज्ञों की मानें तो इससे वजन कम होने से लेकर, कैलोरी घटाने, सुरक्षित लीवर, दिल संबंधित बीमारियां समेत कैंसर जैसे रोगों का खतरा कम हो जाता है. हालांकि, रक्तदान हमेशा सुरक्षित तौर पर करना चाहिए. गलती से भी एचआईवी, हेपेटाइटिस या अन्य रोग वाले लोग रक्तदान न करें. तो आइए जानते हैं कि रक्तदान के फायदे, शरीर में कितनी मात्रा में होना चाहिए खून, ब्लड डोनेट किन्हें नहीं करना चाहिए, वैक्सीन लेने के बाद करना चाहिए या नहीं………

विश्व रक्तदाता दिवस का इतिहास

सबसे पहले विश्व रक्त दाता दिवस 14 जून, 2005 को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा रेड क्रॉस सोसाइटी के सहयोग से मनाया गया था. जिसके बाद सभी देश ने इस अभियान को अपनाया.

विश्व रक्तदाता दिवस 2021 थीम

वर्ष 2020 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विश्व रक्तदाता दिवस के लिए एक खास थीम तय की गयी थी जिसका टैग था सुरक्षित रक्तदान बचाए लोगों की जान (Safe Blood Saves Lives). इस बार यानी 2021 में ‘रक्त दान करके दुनिया को हराते रहो’ (Give Blood And Keep The World Beating) थीम के साथ मनाया जा रहा है. जिसका अर्थ है कोरोना जैसी महामारी, जिसने दुनियाभर में तबाही मचायी है उसे हराया तब ही जा सकता है जब लोग बढ़ चढ़कर रक्तदान करें, इस अभियान का हिस्सा बनें.

कौन कर सकता है रक्तदान?

कोई भी 18 साल से ऊपर उम्र का व्यक्ति रक्तदान कर सकता हैं. लेकिन, उनका वजन 45 से 50 किलो से कम बिल्कुल नहीं होना चाहिए, रक्तदाता को HIV, Hepatitis B या C जैसे रोग न हुए हों, यदि आपको सर्दी, फ्लू, गले में खराश, सर्दी-खराश, पेट में कीड़े या कोई अन्य संक्रमण है तो आप दान नहीं कर सकते, रक्त दान करने के लिए न्यूनतम हीमोग्लोबिन स्तर को पूरा करना आवश्यक है. इसके लिए दान स्थल पर टेस्ट किया जाता है. 

विश्व रक्तदाता दिवस का महत्व

  • विश्व रक्तदाता दिवस का उद्देश्य है रक्तदाताओं की सराहना करना
  • सभी लोगों को रक्तदान के लिए जागरूक करना
  • सुरक्षित रक्त के महत्व के बारे में सभी लोगों को जानकारी देना.
  • आपने देखा ही होगा कि कोविड के दौरान भी कई ब्लड बैंक जरूरतमंदों को रक्त दान करके उनकी लाइफ बचाए हैं.
  • द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन की मानें तो भारत में सालाना 41 मिलियन यूनिट रक्त की कमी होती है. ऐसे में सभी को निरंतर रक्त दान महादान करके लोगों की जान बचानी चाहिए.

क्या-क्या है रक्तदान के फायदे?

  • दिल के सेहत के लिए जरूरी: रक्तदान करते हुए शरीर में खून का थक्का नहीं जमता है. इससे शरीर में रक्त का प्रवाह सुचारू ढंग से होता है. जो हार्ट अटैक के खतरे को कम करता है.
  • वजन के लिए जरूरी: रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल की मात्रा रक्त प्रवाह के तेज होने से कम हो जाती है. ऐसे में साल में दो से तीन बार कम से कम रक्तदान करने की सलाह दी जाती है. यह हमारे वजन को कम करने में मददगार होता है.
  • कैलोरी घटाने में असरदार: विशेषज्ञों की माने तो हमारे शरीर से 650 कैलोरी केवल डेढ़ पाऊ रक्त दान करने से कम हो सकती है. अतः रक्तदान कैलोरी घटाने के लिए भी रक्तदान किया जा सकता है.
  • लीवर के सेहत के लिए: विशेषज्ञों की मानें तो लीवर पर सबसे ज्यादा आयरन का दबाव ही पड़ता है ऐसे में आयरन की मात्रा को कंट्रोल करने के लिए हमें ब्लड डोनेट करते रहना चाहिए. अतः यह लीवर से संबंधित समस्याओं को समाप्त करता है.
  • कैंसर के लिए: यदि रक्त का प्रवाह सही ढंग से होता रहे और शरीर में आयरन की मात्रा बैलेंस रहे तो हमारा लीवर स्वस्थ्य रूप से कार्य करता है. ऐसे में कैंसर का खतरा ना के बराबर हो जाता है.

रीर में कितनी होनी चाहिए खून की मात्रा?

विशेषज्ञों की माने तो किसी भी व्यक्ति में खून की मात्रा उसके वजन, उम्र, लिंग, स्वास्थ्य के आधार पर होता है. ऐसे में 70 से 80 किलो वजन वाले एक व्यस्क व्यक्ति में 5 लीटर रक्त होता है. वहीं महिलाओं में इसकी मात्रा कम होती है. 

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