भारत अब कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बहुत ही संवेदनशील चरण में प्रवेश कर चुका है। कोरोना वायरस का प्रकोप अब शहरी क्षेत्रों में धीरे-धीरे कम होना शुरू हो गया है। बेड, ऑक्सीजन, आईसीयू, वेन्टीलेटर, दवाई व इंजेक्शन के लिए मची आपाधापी वाली स्थिति शहरों में नियंत्रित होने लगी है। लेकिन दूसरी लहर में लोगों की भयंकर लापरवाही व गलतियों के चलते, शहरों के बाद अब हमारे गांवों पर कोरोना महामारी का जबरदस्त खतरा मंडरा रहा है। दूसरी लहर में संक्रमित लोगों की संख्या चार लाख प्रतिदिन के भयावह आकड़े को पार करके वापस आ चुकी है।  

देश में अब यह किसी से छिपा हुआ नहीं है कि 138 करोड़ लोगों की भारीभरकम जनसंख्या के अनुपात में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े संसाधनों की भारी कमी है। कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए आवश्यक बेड, ऑक्सीजन, दवाओं और इंजेक्शन की भारी किल्लत व जीवन बचाने के लिए बेहद जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी करने वाले दानवों की वजह से मौत के आकड़ों ने अभी तक के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये हैं। पिछली 9 मई से 15 मई के सात दिनों में मृतकों का औसत 3991 प्रतिदिन का है, जो अपने प्रिय परिजनों को खोने वाले सभी परिवारों के लिए बेहद डरावनी स्थिति है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से अब संक्रमित लोगों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगी है, देश में आठ मई के बाद से रोजाना चार लाख से कम लोग कोरोना से संक्रमित पाये जा रहे हैं 

9 मई से लेकर के 15 मई के बीच के सात दिनों में संक्रमित लोगों का औसत 3,411,42 व्यक्ति प्रतिदिन का है। वैसे भी कुछ समय से देश में कोरोना से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या निरंतर घट रही है, सही होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। देश में अब रिकवरी रेट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन मौत के बढ़ते आकड़े अभी भी लोगों को डरा रहे हैं।देश में 19 मई तक के कोरोना से संबंधित आकड़ों पर नजर डाले तो कोरोना के कुल केस “2 करोड़ 55 लाख 9 हजार 83” हैं, जबकि सही होने वाले लोगों की कुल संख्या “2 करोड़ 19 लाख 81 हजार 767” है, वहीं कुल एक्टिव केसों की संख्या “32 लाख 33 हजार 781” है और कुल मौतों की संख्या “2 लाख 83 हजार 335” है। देश में कोरोना से मृत्यु दर 1.11 प्रतिशत मात्र है, जबकि बेहद संतोषजनक बात यह है कि देश में रिकवरी रेट 86.17 प्रतिशत का है, वहीं एक्टिव केस घटकर 12.67 प्रतिशत से कम हो गए हैं।

वैसे विश्व स्तर पर कोरोना संक्रमण के एक्टिव केसों के मामलों में भारत का पूरे विश्व में दूसरा स्थान पर है, वहीं कुल संक्रमितों लोगों की मौत की संख्या के मामले में भी भारत का दुनिया में तीसरा पायेदान पर है, दुनिया में अमेरिका, ब्राजील के बाद कोरोना के प्रकोप से सबसे अधिक मौतें हमारे भारत में हुई हैं। देश के दिग्गज नीतिनिर्माता, सरकार, सिस्टम व चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हुए सभी लोग लगातार स्थिति को काबू में करने के लिए रणनीति बनाकर काम कर रहे हैं शहरी क्षेत्रों में आकड़ों में इसका प्रभाव अब स्पष्ट नजर भी आने लगा है।

अब देश के ग्रामीण अंचलों को कोरोना के प्रकोप से बचाने की चुनौती हम सभी के सामने खड़ी है। देश में पहली लहर में कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से बच गए गांव, अब कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में आ चुके हैं। गांव में संक्रमण ने अपनी तेज रफ्तार पकड़ ली तो उसको आसानी से नियंत्रित करना बेहद मुश्किल होगा। क्योंकि हमारे देश के साढ़े 6 लाख गांवों में लगभग 90 करोड़ लोगों की बड़ी आबादी निवास करती है। इसलिए देश में कोरोना को नियंत्रित करने के लिए सरकार को हर हाल में गांवों को स्वस्थ्य रखना होगा।

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