देश में विज्ञान गतिविधियों के जरिए बाल प्रतिभाओं को निखारने एवं उनमें वैज्ञानिक सोच, समझ के विकास के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है नागपुर, महाराष्ट्र का अपूर्व विज्ञान मेला। इस वर्ष अपूर्व विज्ञान मेला का आयोजन 15 से 19 दिसंबर तक नागपुर, महाराष्ट्र में होने जा रहा है। देश के प्रमुख विज्ञान संचारक श्री सुरेश अग्रवाल ने इसकी शुरुआत जनवरी 1998 से की थी। तब से यह सिलसिला सतत जारी है। एसोसिएशन फॉर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इन बेसिक साइंस एजुकेशन, नागपुर महानगर पालिका एवं प्रसार भारती भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाला इस वर्ष का पांच दिवसीय अपूर्व विज्ञान मेला बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सोच समझ के विकास एवं विस्तार के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण एवं मददगार साबित होगा।

यह आजादी का 75 वां वर्ष है। इसके उपलक्ष्य में देश भर में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। इसके तहत देश भर में विज्ञान आधारित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी किया जा रहा है। कोविड – 19 महामारी ने देश को काफी गहरे प्रभावित किया है। लाकडाउन एवं रोक के कारण पिछले लम्बे समय से इस प्रकार की, समूह में की जाने वाली साइंस/ क्रिएटिव एक्टिविटी लगभग थमी थी। बदले परिदृश्य में कुछ गतिविधियां आनलाइन चलती रही पर वह भी किसी चुनौती से कम नहीं थीं। ऐसे में विज्ञान गतिविधियों को शुरू करना बेहद चुनौतीपूर्ण पर सुखद एवं प्रेरणादायक प्रयास है।

चुनौती पूर्ण रहा है विज्ञान गतिविधियों का यह सफर
देश में विज्ञान गतिविधियां एवं वैज्ञानिक जागरूकता का सिलसिला देश की आजादी के बाद ही शुरू हो गया था। केरल में 1962 में केरल शास्त्र साहित्य परिषद की गतिविधियां शुरू हुई। 1974 में इस मुहिम ने राष्ट्रीय स्वरूप ले लिया तथा आल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क सामने आया। 1984 में भोपाल गैस काण्ड के कारण देश व्यापी वैज्ञानिक जागरूकता के काम में गुणात्मक परिवर्तन आया है। प्रो. यशपाल जैसे कुछ प्रमुख वैज्ञानिकों, वैज्ञानिक जागरूकता एवं वैज्ञानिक लोकप्रियकरण के काम में लगे विभिन्न संगठनों ने भारत सरकार के सहयोग से जन जन तक विज्ञान पहुंचाने एवं लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास के लिए 1987 में भारत जन विज्ञान जत्था का आयोजन किया। वह बेहद प्रभावशाली रहा।

देश में साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए 1988 में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की शुरुआत हुई तो 1989 में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त ईकाई के रूप में विज्ञान प्रसार का गठन हुआ। विज्ञान प्रसार ने विज्ञान प्रसार नेटवर्क (विपनेट) के जरिए देश भर में बच्चों के विज्ञान क्लबों का एक व्यापक एवं प्रभावशाली संजाल खड़ा किया। बच्चों में खोजी प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए 1993 में साइंस सेंटर ग्वालियर, मध्यप्रदेश ने बाल विज्ञान कांग्रेस का प्रयोग शुरू किया। उनका यह प्रयास सफल रहा तथा 1995 से इसे राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया गया। तब से राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का सिलसिला अब तक जारी है। इस दौरान प्रो. यशपाल, डॉ नरेन्द्र सहगल समेत देश के अनेक वैज्ञानिकों, विज्ञान संचारकों, विज्ञानकर्मियों, विज्ञान के शिक्षक शिक्षिकाओं, छात्र छात्राओं आदि ने इस अभियान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दूरदर्शन पर विज्ञान के विभिन्न प्रयोगों के प्रदर्शन के जरिए प्रो. यशपाल एवं कोलकाता के प्रमुख विज्ञान संचारक समर कुमार बागची ने इसकी लोकप्रियता एवं दायरे को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

नागपुर बना विज्ञान गतिविधियों का‌ महत्वपूर्ण केंद्र
देश में जारी विज्ञान गतिविधियों के प्रभाव से नागपुर भी अछूता नहीं रहा। 1985 – 86 में श्री सुरेश अग्रवाल ने चार- पांच लोगों के एक छोटे से ग्रुप से विज्ञान गतिविधियां शुरू की। एकलव्य के लिटरेचर एवं समर बागची के प्रयोगों से उनके कार्यों को बल मिला। खुद करके सीखने एवं सिखाने का सिलसिला शुरू हुआ। विज्ञान से दोस्ती, खेल खेल में विज्ञान स्लोगन बना और अपूर्व विज्ञान मेला का सिलसिला शुरू हो गया। 1 जनवरी से 5 जनवरी 1998 को पहली बार नागपुर में अपूर्व विज्ञान मेला का आयोजन किया गया और तबसे यह सिलसिला अबतक सतत जारी है। श्री सुरेश अग्रवाल विगत करीब 28 वर्षों से बेसिक साइंस को सरल, सहज एवं लोकप्रिय बनाने की मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने अपनी टीम के साथ सहज उपलब्ध सामग्री का उपयोग कर विज्ञान के लगभग 300 प्रयोग तैयार किए जो विज्ञान की अनेक मूलभूत अवधारणाओं को समझने/ समझाने में सक्षम है।

इसका देश व्यापी प्रभाव
अपूर्व विज्ञान मेला की शुरुआत भले ही नागपुर, महाराष्ट्र में हुई। पर अपने शानदार प्रदर्शन, पुस्तकों का प्रकाशन, विडियो निर्माण आदि ने उनके कार्य एवं प्रभाव को पूरे देश में फैला दिया।
देश के प्रमुख विज्ञान संचारक श्री सुरेश अग्रवाल जी का यह प्रयास न सिर्फ सराहनीय बल्कि प्रेरणादायक भी है। बच्चों में खोजी प्रवृत्ति, खुद करके सीखने समझने का कार्य, न सिर्फ नई पीढ़ी को तराशने का बेहतरीन प्रयास है। बल्कि उनका यह प्रयास जन जन तक विज्ञान पहुंचाने एवं लोगों में संविधान निर्दिष्ट, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास व तर्कशील, विज्ञान सम्मत, आधुनिक, आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह कर रहा है।


इस क्रम में उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान ने वैज्ञानिक मानसिकता के विकास को नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों में शामिल किया है और अपूर्व विज्ञान मेला अपनी इस जिम्मेदारी का कुशलता पूर्वक निर्वाह कर रहा है।

डी. एन. एस. आनंद,
संपादक, वैज्ञानिक चेतना साइंस वेब पोर्टल जमशेदपुर झारखंड

 

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