In science credit goes to the man who convinces the world, not the man to whom the idea first occurs. — Francis Galton

सभी महान भौतिकी शिक्षक की कुछ समान विशेषताएँ होती है एक समचारक(Communicator)के रूप में वे जल्द ही अपने विद्यार्थियों संवाद स्थापित कर लेते हैं. वे निडर होते हैं. उनका स्वभाव विनोदी होता है और विश्वास से भरे होते हैं.ये तमाम गुण प्रो०सुरेश वर्मा में मौजूद था. भौतिक विज्ञान के कठिन से कठिन बातों को बड़े सहज ढ़ंग से रखते थे. स्वभाव से हंसमुख था.पटना साइंस कालेज में भौतिकी विभाग का विभागाध्यक्ष होना अपने आप में शान की बात है परन्तु अत्यन्त सरल और सहज थे.

लेकिन उन्होंने अपने को सिर्फ साइंस कालेज के चहार- दीवारें तक सीमित नहीं रखा बल्कि वह वैज्ञानिक चेतना विकसित करने के लिए वह गांव और कस्बों तक गए. प्रो०सुरेश वर्मा अपने एक लेख में विज्ञान एवं उसके लक्ष्य को परिभाषित करते हुए लिखा था,”विज्ञान-शिक्षा को संस्थानों के शिक्षण वर्ग में केन्द्रित न कर कमरे के बाहर के प्राकृतिक प्रयोगशाला से जोड़कर देखें. अगर अर्थशास्त्र एवं व्यासाय की पढ़ाई कर रहे हैं तो उन नियमनों को स्थानीय बाजार में तथा स्थानीयअर्थव्यवस्था में जांच लें. तभी यह ज्ञान आत्मसात हो सकता है .”

यही वो बात थी जो प्रो०सुरेश वर्मा साइंस कालेज के भौतिक विभाग से बाहर निकलकर गांव गांव में विज्ञान की प्रयोगशाला खुले आकाश में स्थापित की जहां आम आदमी भी विज्ञान के गूढ विषयों को समझ सकता है. जहां पूंजीवादी व्यवस्था में शासक वर्ग विज्ञान की उपलब्धियों को अपने मुनाफा के लिए उपयोग करता है परन्तु प्रो०सुरेश वर्मा, विनोद रैना जैसे लोग विज्ञान की उपलब्धियों को जनता के बीच ले जाने के लिए जन आन्दोलन चलाते हैं. शायद यही मकसद था कि प्रो०सुरेशवर्मा डा०ऐ के सेन द्वारा स्थापित साइंस फार सोसाइटी ,बिहार में शामिल हुए और बाद में चलकर इस संस्था के महासचिव लंबे समय तक रहे.

15फरवरी,1946को उनका जन्म हुआ था.15फरवरी एक ऐसी तारीख है जिस दिन गैलिलयो गैलीली का जन्म सोलहवीं शताब्दी में हुआ था. गैलिलयो को भी अपने समय मे वैज्ञानिक विचारों को स्थापित करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा. यह महज संयोग ही कहा जाएगा कि इनकी मृत्यु 12सितंबर 2019को हुआ. इसी तारीख को विनोद रैना की मृत्यु 2013में हुई थी. डा० विनोद रैना एक मशहूर जन वैज्ञानिक थे. ये तीनों विज्ञान की भौतिकी शाखा से अपना सम्बन्ध रखते हैं. इस प्रकार वर्माजी गैलिलयो से लेकर डा०विनोद रैना तक के संघर्ष शील परंपरा से अपने आप को जोड़ लिया.

प्रो०सुरेश प्रसाद वर्मा साइंस कालेज ,पटना के भौतिक विभाग के विभागाध्यक्ष रहे एवं साइंस फार सोसाइटी, बिहार के महासचिव रहे. उनके नेतृत्व में National Children Film Festival की स्थापना हुई. इसका आयोजन हरेक साल होता रहा है .

आज पूरी दुनिया में कोभिड बीमारी क् कारण लोग मर रहे हैं. इस दौर में एक ओर जहां लोग इस बीमारी से परेशान हैं वहीं दूसरी ओर समाज इस कोभिड वायरस को लेकर तरह तरह की भ्रांतियां और अंधविश्वास फैलायी जा रही है. पूंजीवाद अपनी कमियों के छिपाने के लिए उन तमाम अवैज्ञानिक बातों को बढ़ावा दे रही है जो किसी भी सभ्य समाज के लिए खतरनाक है.न्यूटन से लेकर डारविन तक के विचारों के उपर हमला हो रहा है. छद्म विज्ञान का बढ़ावा दिया जा रहा है. विज्ञान और इसके विचारों के साथ आए दिन मजाक हो रहा है. ऐसे वक्त में प्रो० सुरेश वर्मा का न होना उस जन विज्ञान आंदोलन के लिए बहुत बड़ी क्षति है और इसे आज लोग महशूस कर रहे हैं. फिर भी उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी कि उस जन विज्ञान आंदोलन को फिर से विकसित कर इन रूढ़ीवादी एवं पतनशील विचार के खिलाफ आंदोलन तेज किया जाय.

सुनील सिंह  (पटना, बिहार) 

 

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