दयानिधि
गर्भावस्था में कीटनाशक का खतरा: शोध में खुलासा, बच्चों के दिमाग और शरीर के विकास पर पड़ सकता है लंबे समय तक गंभीर असर। एक नए शोध में यह बात सामने आई है कि गर्भावस्था के दौरान एक खास कीटनाशक के संपर्क में आने से बच्चों के दिमाग के विकास पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है। यह कीटनाशक क्लोरपाइरीफॉस (सीपीएफ) नाम से जाना जाता है और खेती में कीड़ों को खत्म करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। शोध के अनुसार, जिन बच्चों की मां गर्भावस्था के समय इस रसायन के संपर्क में थीं, उनमें आगे चलकर दिमाग की संरचना और शरीर की गतिविधियों में बदलाव देखे गए। यह अध्ययन अमेरिका के कई बड़े संस्थानों के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया। इसमें कोलंबिया यूनिवर्सिटी, चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल लॉस एंजिलिस और यूएससी मेडिकल स्कूल के विशेषज्ञ शामिल थे। यह शोध जामा न्यूरोलॉजी नाम की प्रसिद्ध मेडिकल पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

ज्यादा संपर्क, ज्यादा असर
शोध में पाया गया कि जिन बच्चों में गर्भ के दौरान कीटनाशक का स्तर ज्यादा था, उनके दिमाग में बदलाव भी ज्यादा दिखाई दिए। वैज्ञानिकों ने इसे “डोज-डिपेंडेंट प्रभाव” कहा है। इसका मतलब है कि जितना अधिक संपर्क, उतना अधिक नुकसान। इन बच्चों में दिमाग के कई हिस्सों में असामान्य बदलाव पाए गए। साथ ही, शरीर की गति और हाथ-पैरों के समन्वय से जुड़े टेस्ट में भी उनका प्रदर्शन कमजोर रहा। बच्चों को तेजी से हाथ चलाने, निर्देशों के अनुसार गतिविधि करने और मोटर स्किल्स से जुड़े कामों में परेशानी हुई।

दिमाग के विकास पर लंबा असर
वैज्ञानिकों का कहना है कि गर्भावस्था के समय दिमाग बहुत तेजी से विकसित होता है। इस दौरान कोई भी जहरीला रसायन बच्चे के दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है। शोध में पाया गया कि क्लोरपाइरीफॉस का असर केवल एक हिस्से तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे दिमाग में बदलाव देखने को मिले। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह असर कई सालों तक बना रह सकता है। यानी जन्म से पहले हुआ संपर्क बच्चे के किशोरावस्था तक उसके दिमाग को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिका में प्रतिबंध, फिर भी खतरा जारी
अमेरिका में साल 2001 में घरों के अंदर क्लोरपाइरीफॉस के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन आज भी इसका उपयोग खेती में किया जाता है। जो जैविक फल नहीं है, सब्जियों और अनाज की खेती में यह कीटनाशक इस्तेमाल होता है। इसी वजह से खेतों के आसपास रहने वाले लोगों को हवा, धूल और खाने के माध्यम से इसके संपर्क में आने का खतरा बना रहता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि खेतों में काम करने वाले मजदूर, गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।

वैज्ञानिकों ने दी सावधानी की सलाह
शोध पत्र में शोधकर्ता के हवाले से कहा गया है कि आज भी कई लोग ऐसे स्तर के संपर्क में आ रहे हैं जो बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं और कृषि क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की नियमित निगरानी जरूरी है। शोध में कहा गया है कि यह केवल एक कीटनाशक का असर है। अन्य ऑर्गेनोफॉस्फेट कीटनाशक भी इसी तरह नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए गर्भावस्था, शिशु अवस्था और बचपन में ऐसे रसायनों से बचाव बहुत जरूरी है।

जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों को कीटनाशकों के खतरों के बारे में जागरूक करना जरूरी है। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोना, जैविक उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ाना और खेती में सुरक्षित विकल्प अपनाना जरूरी कदम हो सकते हैं। यह शोध एक बार फिर यह याद दिलाता है कि बच्चों का स्वस्थ भविष्य सुरक्षित रखने के लिए गर्भावस्था के दौरान पर्यावरण और खानपान का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
(‘डाउन-टू-अर्थ’ से साभार )
