दयानिधि
एक अरब से अधिक लोगों को प्रभावित करने वाली प्री-डायबिटीज में शुगर सामान्य होने पर गंभीर हृदय रोगों का खतरा आधे से ज्यादा घटा। प्री-डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए एक नई उम्मीद भरी खबर सामने आई है। हाल ही में हुए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया है कि यदि प्री-डायबिटीज वाले लोग अपने ब्लड शुगर के स्तर को फिर से सामान्य सीमा में ले आते हैं, तो उनमें गंभीर हृदय रोगों का खतरा काफी कम हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे हृदय संबंधी मौत और हार्ट फेल होने के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा आधे से भी अधिक घट सकता है। यह अध्ययन किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है और इसे प्रतिष्ठित पत्रिका “द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी” में प्रकाशित किया गया।

क्या होती है प्री-डायबिटीज?
प्री-डायबिटीज ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का ब्लड शुगर स्तर सामान्य से अधिक होता है, लेकिन इतना अधिक नहीं होता कि उसे टाइप-2 डायबिटीज माना जाए। यह अवस्था भविष्य में मधुमेह विकसित होने का संकेत मानी जाती है। शोध के अनुसार, प्री-डायबिटीज केवल डायबिटीज का शुरुआती चरण नहीं है, बल्कि यह अपने आप में भी स्वास्थ्य के लिए खतरे पैदा कर सकती है। इससे हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य गंभीर समस्याओं की संभावना बढ़ जाती है।

दुनिया भर में बढ़ रही है समस्या
प्री-डायबिटीज आज एक वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। अनुमान है कि दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। ब्रिटेन में लगभग हर पांचवां वयस्क व्यक्ति डायबिटीज या प्री-डायबिटीज से पीड़ित है। वहीं अमेरिका में हर तीन में से एक व्यक्ति और चीन में लगभग 40 प्रतिशत वयस्क इस स्थिति से प्रभावित हैं। शोध की मानें तो बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी और खराब खानपान इसके अहम कारण हैं।

दशकों तक चले अध्ययनों का विश्लेषण
इस नए शोध में वैज्ञानिकों ने दो बड़े और लंबे समय तक चलने वाले अध्ययनों के आंकड़ों का दोबारा विश्लेषण किया। इनमें अमेरिका का डायबिटीज प्रिवेंशन प्रोग्राम आउटकम्स स्टडी और चीन का डाकिंग डायबिटीज प्रिवेंशन आउटकम्स स्टडी शामिल थे। इन अध्ययनों में हजारों ऐसे लोगों को शामिल किया गया था जिन्हें प्री-डायबिटीज थी। प्रतिभागियों को स्वस्थ भोजन अपनाने, शारीरिक गतिविधि बढ़ाने और वजन नियंत्रित रखने जैसी सलाह दी गई थी। कई वर्षों तक उनके स्वास्थ्य की निगरानी की गई। विश्लेषण में पाया गया कि जिन लोगों का ब्लड शुगर स्तर फिर से सामान्य हो गया, उनमें हृदय रोग से मृत्यु या हार्ट फेल होने के कारण अस्पताल में भर्ती होने का खतरा 58 प्रतिशत तक कम था।

दिल की बीमारी का खतरा भी हुआ कम
शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि प्री-डायबिटीज से बाहर निकलने वाले लोगों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य प्रमुख हृदय संबंधी घटनाओं का खतरा 42 प्रतिशत तक कम था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि यह लाभ केवल कुछ सालों तक सीमित नहीं था। जिन लोगों ने अपने ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर पहुंचाया, उनमें यह सकारात्मक प्रभाव कई दशकों बाद भी देखा गया। अध्ययन के अनुसार, अमेरिका और चीन दोनों देशों के प्रतिभागियों में लगभग समान परिणाम मिले, जिससे निष्कर्षों की विश्वसनीयता और मजबूत होती है।

केवल जीवनशैली सुधार पर्याप्त नहीं?
इस शोध का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि पहले किए गए विश्लेषणों में केवल जीवनशैली सुधारों से हृदय रोगों का खतरा कम होने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले थे। हालांकि व्यायाम, स्वस्थ भोजन और वजन घटाना स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हैं, लेकिन यह अध्ययन संकेत देता है कि असली फायदा तब मिलता है जब इन प्रयासों से ब्लड शुगर वास्तव में सामान्य स्तर पर पहुंच जाए। वैज्ञानिकों का कहना है कि केवल डायबिटीज को टालना काफी नहीं हो सकता। बेहतर हृदय स्वास्थ्य के लिए प्री-डायबिटीज से पूरी तरह बाहर निकलना अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

भविष्य के लिए नई दिशा
शोधकर्ताओं का मानना है कि प्री-डायबिटीज की स्थिति को सामान्य करना भविष्य में हृदय रोगों की रोकथाम का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बन सकता है। अभी तक हृदय रोगों से बचाव के लिए रक्तचाप नियंत्रित रखना, कोलेस्ट्रॉल कम करना और धूम्रपान छोड़ना प्रमुख उपाय माने जाते हैं। अब प्री-डायबिटीज से छुटकारा पाना भी इस सूची में शामिल हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दिशा में और शोध की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि समय रहते ब्लड शुगर को सामान्य स्तर पर लाना लंबे समय तक स्वस्थ जीवन और बेहतर हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है।
(‘डाउन-टू-अर्थ’ से साभार )
