दयानिधि

क्या ऑस्टियोआर्थराइटिस या जोड़ों के दर्द में व्यायाम सचमुच लाभकारी है, नए शोध ने उठाए गंभीर सवाल। ऑस्टियोआर्थराइटिस एक आम जोड़ों की बीमारी है। इसमें घुटने, कूल्हे, हाथ या टखने के जोड़ घिसने लगते हैं। इससे दर्द, सूजन और चलने-फिरने में दिक्कत होती है। डॉक्टर अक्सर इस बीमारी में सबसे पहले व्यायाम करने की सलाह देते हैं। माना जाता है कि व्यायाम से दर्द कम होता है और जोड़ मजबूत बनते हैं।

लेकिन हाल ही में ओपन एक्सेस जर्नल आरएमडी ओपन में प्रकाशित एक बड़ी समीक्षा ने इस धारणा पर सवाल उठाया है। इस शोध में कहा गया है कि व्यायाम का असर बहुत कम और थोड़े समय के लिए हो सकता है।

यह नई समीक्षा क्या है?

यह एक “अम्ब्रेला रिव्यू” यानी कई शोधों की बड़ी समीक्षा है। शोधकर्ताओं ने नवंबर 2025 तक प्रकाशित अध्ययनों को देखा। शोधकर्ताओं ने 5 बड़ी समीक्षाएं शामिल कीं जिसमें कुल 8631 प्रतिभागी शामिल थे। 28 रैंडमाइज्ड क्लिनिकल ट्रायल शामिल किए जिसमें कुल 4360 प्रतिभागियों को चुना गया था। इन अध्ययनों में घुटने, कूल्हे, हाथ और टखने के ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीज शामिल थे। शोधकर्ताओं ने व्यायाम की तुलना कई तरीकों से की, जिसमें प्लेसीबो (नकली इलाज), कोई इलाज नहीं, सामान्य देखभाल, दर्द निवारक दवाएं, स्टेरॉयड या हायलूरोनिक एसिड इंजेक्शन शामिल थी। साथ ही मैनुअल थेरेपी, आर्थ्रोस्कोपी (घुटने की की-होल सर्जरी), ऑस्टियोटॉमी (हड्डी सीधी करने की सर्जरी) तथा जॉइंट रिप्लेसमेंट (जोड़ बदलने की सर्जरी) को भी शामिल किया गया था।

घुटने के दर्द पर क्या असर मिला?

घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस में व्यायाम से दर्द में थोड़ा सुधार देखा गया। लेकिन यह सुधार बहुत कम था। यह असर लंबे समय तक नहीं रहा। बड़े और लंबे समय तक चलने वाले अध्ययनों में फायदा और भी कम पाया गया। प्रमाण की गुणवत्ता बहुत कम बताई गई। इसका मतलब है कि घुटने के मरीजों में व्यायाम से बहुत ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती।

कूल्हे और हाथ के ऑस्टियोआर्थराइटिस में असर

कूल्हे के ऑस्टियोआर्थराइटिस में व्यायाम का असर लगभग नगण्य पाया गया। प्रमाण की गुणवत्ता मध्यम स्तर की थी। हाथ के ऑस्टियोआर्थराइटिस में थोड़ा लाभ देखा गया, लेकिन वह भी बहुत कम था। टखने के मामलों में भी ठोस लाभ के प्रमाण नहीं मिले।

अन्य इलाजों से तुलना

जब व्यायाम की तुलना अन्य उपचारों से की गई, तो परिणाम लगभग समान पाए गए। व्यायाम दर्द निवारक दवाओं से बेहतर नहीं था। स्टेरॉयड इंजेक्शन से बेहतर नहीं था। मैनुअल थेरेपी से बेहतर नहीं था। आर्थ्रोस्कोपी से भी ज्यादा लाभकारी नहीं था। कुछ विशेष मामलों में सर्जरी जैसे ऑस्टियोटॉमी और जॉइंट रिप्लेसमेंट से लंबे समय में ज्यादा लाभ देखा गया।

शोध की सीमाएं

शोधकर्ताओं ने माना कि कुछ शोध की कुछ सीमाएं थी जिसमें कहा गया है कि सभी अध्ययनों की गुणवत्ता समान नहीं थी। मरीजों की स्थिति अलग-अलग थी। कुछ मरीजों ने व्यायाम के साथ अन्य इलाज भी लिया। सीधे तुलना वाले अध्ययन कम थे। फिर भी, अतिरिक्त विश्लेषण में भी परिणाम लगभग समान ही रहे।

क्या इसका मतलब है कि व्यायाम बेकार है?

नहीं, व्यायाम के कई अन्य फायदे हैं, जिसमें दिल की सेहत बेहतर होती है। वजन नियंत्रित रहता है। मांसपेशियां मजबूत होती हैं। मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। यह कम खर्चीला और सुरक्षित तरीका है। इसलिए व्यायाम को पूरी तरह गलत नहीं कहा जा सकता। लेकिन इसे हर मरीज के लिए सबसे अच्छा और जरूरी पहला इलाज मानना सही नहीं हो सकता।

डॉक्टर और मरीज क्या करें?

शोधकर्ताओं का कहना है कि डॉक्टर और मरीज को मिलकर निर्णय लेना चाहिए। इसे “शेयर्ड डिसीजन-मेकिंग” कहा जाता है। निर्णय लेते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए जिसमें –

  • दर्द कितना है?
  • बीमारी किस चरण में है?
  • मरीज की उम्र और स्वास्थ्य कैसा है?
  • अन्य उपचार विकल्प क्या हैं?
  • मरीज की पसंद क्या है?

अगर किसी को व्यायाम से राहत मिलती है और वह सुरक्षित रूप से कर सकता है, तो वह जारी रख सकता है। लेकिन यदि बहुत लाभ नहीं मिल रहा है, तो अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। नए शोध के अनुसार, ऑस्टियोआर्थराइटिस में व्यायाम का असर बहुत कम और थोड़े समय के लिए हो सकता है। बड़े और लंबे अध्ययनों में इसका लाभ और भी कम पाया गया। यह शोध बताता है कि व्यायाम को सभी मरीजों के लिए एकमात्र पहला इलाज मानना सही नहीं हो सकता। फिर भी व्यायाम के स्वास्थ्य के अन्य लाभ हैं और कुछ मरीजों को इससे फायदा मिल सकता है। इसलिए सबसे अच्छा तरीका है कि मरीज और डॉक्टर मिलकर सोच-समझकर फैसला करें।

       (‘डाउन-टू-अर्थ’ से साभार )

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