आज 26 नवम्बर, संविधान दिवस है। किसी भी लोकतांत्रिक समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में संविधान की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होती है। निश्चय ही आजाद भारत की, विगत करीब सात दशकों की यात्रा में, अब तक संविधान ने बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि उसके सामने चुनौतियां कम नहीं रही हैं, अब भी हैं। पर यदि हम संविधान सम्मत, हर तरह के भेदभाव से मुक्त, समतामूलक, लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष, विविधतापूर्ण, न्यायपूर्ण एवं श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों से लैश आत्मनिर्भर समाज व देश का निर्माण करना चाहते हैं तो हमें हर हाल में न सिर्फ इसकी रक्षा करनी होगी, बल्कि जनहित में, लोकतांत्रिक संघर्षों के जरिए इसका सतत विकास एवं विस्तार भी करना होगा। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि हम देश के एक सजग नागरिक के रूप में, संविधान निर्दिष्ट अपने मौलिक कर्तव्यों का पालन करें, विज्ञान को जन जन तक पहुंचाएं एवं लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं वैज्ञानिक चेतना का सतत विकास एवं विस्तार करें।

आज, 26 नवंबर को संविधान दिवस है, जिसे पूरे देश में मनाया जा रहा है। हमारे भारतीय संविधान को अपनाए जाने की याद में हर साल 26 नवंबर को देश में संविधान दिवस के तौर मनाया जाता है। वर्ष 1949 में संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को 26 नवंबर को ही अपनाया गया गया था। हालांकि, इसे 26 जनवरी 1950 से पूरे देश में लागू किया गया था। वहीं, केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 19 नवंबर 2015 को घोषणा की थी कि 26 नवंबर को हर साल संविधान दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। इसके बाद से हर साल संविधान दिवस को इस दिन मनाया जाता है।

395 अनुच्छद वाले भारतीय संविधान में अब हैं 470 अनुच्छेद

भारतीय संविधान को बनाए जाने में संविधान सभा को 167 दिन लगे जिसके लिए 11 सत्र आयोजित किए गए। अपने मूल रूप में भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 खण्ड और 8 अनुसूचियां हैं। हमारे संविधान में कुल 1,45,000 शब्द हैं, जो कि पूरे विश्व में सबसे लंबा अपनाया गया संविधान है। हालांकि, इस समय हमारे संविधान में 470 अनुच्छेद, 25 खण्ड और 12 अनुसूचियों के साथ-साथ 5 परिशिष्ट भी हैं।

भारतीय संविधान की उद्देशिका

“भारत का संविधान अपनाने के उपलक्ष्य में हमारे देश में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस को मनाया जाता है। भारत की संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को भारत के संविधान को अपनाया था, जो 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ। नागरिकों के बीच संविधान के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए हर साल 26 नवंबरको ‘संविधान दिवस’ के रूप में मनाने के भारत सरकार के निर्णय को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 19 नवंबर 2015 को अधिसूचित किया।”

कब मनाया जाता है संविधान दिवस

वैसे तो भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया था, लेकिन इसे पहले ही स्वीकृति मिल गई थी। संविधान लागू होने से दो महीने पहले 26 नवंबर 1949 को संविधान बनाने वाली सभा (Constitution Assembly) ने कई दौर की चर्चाओं और संशोधनों के बाद आखिरकार संविधान को स्वीकार किया था। इसी कारण 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

क्यों मनाया जाता है संविधान दिवस?

देश के लोगों को संविधान के बारे में जागरुक करने के लिए संविधान दिवस मनाया जाता है। संवैधानिक मूल्यों की जानकारी देश के हर नागरिक को हो इसके लिए संविधान दिवस मनाने का फैसला हुआ था। इसी दिन देश ने संविधान को स्वीकार किया था जिसके चलते सामाजिक न्याय मंत्रालय ने 19 नवंबर 2015 को एक फैसला लिया कि 26 नवंबर को देश संविधान दिवस के रूप मनाएगा।

संविधान का यह है महत्व

संविधान दिवस को मनाने का फैसला इसके निर्माता डॉ. आंबेडकर को श्रद्धांजलि देने के लिए लिया गया था। गौरतलब है कि भारतीय संविधान कई सिद्धांतों और दृष्टांतों को समेटे है, जिनके आधार पर देश की सरकार और नागरिकों के लिए मौलिक राजनीतिक सिद्धांत, प्रक्रियाएं, अधिकार, दिशा निर्देश, कानून आदि तय किए गए हैं।

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