विकास शर्मा

साल 2024 में अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा, यूरोपीय स्पेस एजेंसी ईसा, भारत के इसरो के कुछ अभियानों का इंतजार है. साल के अधिकांश अभियान चंद्रमा के लिए होंगे, जबकि गुरु के चंद्रमा यूरोपा के लिए अभियान का प्रक्षेपण भी इसी साल होगा.

स्पेस के लिहाज से साल 2023 भारत और दुनिया के लिए काफी अहम रहा. अब दुनिया की निगाहें 2024 के कई प्रमुख अभियानों पर हैं. इनमें लोग अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा, यूरोप स्पेस एजेंसी ईसा, भारत के इसरो और चीन के अंतरिक्ष अभियानों के अलावा दुनिया कई देशों के अभियानों पर नजर रखे हुए हैं. इनमें चंद्रमा के लिए अभियान विशेष हैं. वहीं कुछ अभियानों की तैयारियों पर निगाह होगी.

साल 2024 में नासा का आर्टिमिस 2 अभियान एस्ट्रोनॉट्स को चंद्रमा का चक्कर लगवाएगा. इस तरह का अभियान करीब 50 साल बाद हो रहा है. यह नासा के आर्टिमिस अभियान का दूसरा चरण होगा जिसमें चार यात्री 8 दिन के अभियान में स्पेस एक्स के ओरियोन यान से चंद्रमा का चक्कर लगाएंगे.

इस साल एक बड़ा अभियान जिस पर दुनिया की निगाह है. वह ईसा का यूरोपा क्लिपर है जिसे नासा गुरु ग्रह के सबसे बड़े चंद्रमा यूरोपा के लिए प्रक्षेपित करेगा. यूरोपा पृथ्वी के चंद्रमा से थोड़ा छोटा है लेकिन उसकी पूरी की पूरी सतह मोटी बर्फ की चादर से ढकी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसी बर्फीले खोल के अंदर नमकीन पानी के महासागर हैं जहां जीवन हो सकता है. क्लिपर यूरोपा के 50 चक्कर लगाकर इसी की पड़ताल करेगा.

चंद्रमा पर 2023 में जहां भारत के चंद्रयान 3 ने उतर कर इतिहास रचा था. उसी कड़ी में जापान का स्मार्ट लैंडर फॉर इन्वेस्टीगेंटिंग मून यानी स्लिम पर सभी की निगाहें अभी से हैं. वैसे तो यह 6 सिंतबर 2023 को प्रक्षेपित हो चुका है, लेकिन अभी यह चंद्रमा की कक्षा में हैं और 19 जनवरी को चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग करने की कोशिश करेगा. सफल होने पर जापान, सोवियत संघ, अमेरिका, चीन और भारत के समूह में शामिल हो जाएगा.

चंद्रमा पर लंबे मानवीय आवास के लिए कई अभियानों की तैयारी है. इनमें से एक 2024 के आखिर में चंद्रम के दक्षिणी ध्रुव पर वोलेटाइल पोलर एकसप्लोरेशन रोवर, वाइपर अभियान जाएगा. जिसमें नासा का गोल्फ कार्ट के आकार का रोवर चंद्रमा पर पानी की तलाश करेगा.

नासा ने हाल ही में कम लागत वाले छोटे अभियानों, जिन्हें स्मॉल, इनोवेटिव मिशन्स फॉर प्लैनेटरी एक्प्लोरेशन, सिम्पलेक्स में भारी निवेश किया है. इन्हें अन्य प्रक्षेपणों के साथ लॉन्च किया जाएगा जिससे अभियानों की लागत कम रहेगी. वाइपर की तरह ट्रेलब्लेजर अभियान चंद्रमा पर पानी की तलाश करेगा. ट्रेल ब्लैजर चंद्रमा की सतह पर नहीं उतरेगा बल्कि उसकी कक्षा से पानी की पड़ताल करेगा. ट्रेलब्लेजर के साथ ही प्राइम वन अभियान भी भेजा जाएगा जो चंद्रमा पर खादाई का काम करेगा. यह वाइपर के रोवर के लिए बहुत उपयोगी होगा.

भारत का गगनयान अभियान का भारत के लोगों को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को इंतजार है. खास तौर से नासा देखना चाहता है कि भारत अंतरिक्ष में यात्री भेजने की क्षमता कितनी जल्दी हासिल करता है. 2024 में भारत की स्पेस एजेंसी इसरो गगनयान अभियान का पहले चरण प्रक्षेपित करेगा. इसमें अंतरिक्ष यात्रियों के स्पेस में पहुंचाने वाले रॉकेट और अंतरिक्ष यान का परीक्षण होगा. अगर सब कुछ योजना अनुसार हुआ तो इसका दूसरा चरण भी इसी साल के अंत में पूरा कर लिया जाएगा. दूसरे चरण में अंतरिक्ष यान की रीएंट्री और लैंडिंग को जांचा जाएगा.

मंगल पर अभी तक नासा के बाद भारत और चीन ने हाल के सालों में अभियान भेजे हैं. इसमें जापानी स्पेस एजेंसी जाक्सा का नाम भी जुड़ने वाला है. 2024 में जाक्सा एक खास रोबोटिक अभियान भेजेगा जिसका नाम मार्शयन मून एक्स्प्लोरेशन या एमएमएक्स होगा जो मंगल के चंद्रमाओं फोबोस और डीमोस पर यान पहुंचाएगा. इसके जरिए इन चंद्रमाओं के नमूने भी पृथ्वी पर लाए जाएंगे.

हीरा यूरोपीय स्पेस एजेंसी, ईसा का अभियान है जो डिडिमोस- डिमोर्फोस क्षुद्रग्रह तंत्र पर यान भेजेगा और इस क्षुद्रग्रह के जोड़े का अध्ययन करेगा. ये दोनों वहीं क्षुद्रग्रह हैं जहां पर नासा के डार्ट अभियान ने ग्रह की रक्षा का एक सिस्टम का परीक्षण किया था. इसमें डिमोर्फोस से टकारव से उसकी कक्षा में बदलाव करने का प्रयास किया गया था.

2024 दुनिया के कई शक्तिशाली रॉकेट के परीक्षण का भी गवाह बनेगा. इनमें स्पेस एक्स का स्टारशिप रॉकेट का तीसरा परीक्षण होगा, तो वहीं वाल्कन सेंटॉर, सिएरा स्पेस ड्रीम चेसर जैसे शक्तिशाली रॉकेट के भी परीक्षण होंगे. इसके अलावा ईसा का एरिएन 6 रॉकेट के पहले प्रक्षेपण की तैयारियां चल रही हैं.

         (‘न्यूज़ 18 हिंदी’ से साभार )

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