दुनियाभर में एचआईवी (HIV) संक्रमण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 1 दिसंबर को वर्ल्ड एड्स डे (World AIDS Day) मनाया जाता है. WHO ने सबसे पहले विश्व एड्स दिवस को वैश्विक स्तर पर मनाने की शुरुआत अगस्त 1987 में की थी. एड्स की जागरूकता अभियान से जुड़े जेम्स डब्ल्यू बुन और थॉमस नेटर नाम से ही इसकी शुरुआत की गई थी. 

वर्ल्ड एड्स डे 2021 की थीम
Hiv.org की वेबसाइट के अनुसार, विश्व एड्स दिवस के लिए इस वर्ष की थीम है- ‘असमानताओं को समाप्त करें, एड्स का अंत करें.’ वर्ष 2008 के बाद, प्रत्येक वर्ष की थीम को विश्व एड्स अभियान (डब्ल्यूएसी) की ग्लोबल स्टीयरिंग कमेटी द्वारा चुना जाता है.

किसी भी उम्र के व्यक्ति को कर सकता है प्रभावित
शुरुआती दौर में विश्व एड्स दिवस को सिर्फ बच्चों और युवाओं से ही जोड़कर देखा जाता था जबकि एचआईवी संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है. इसके बाद साल 1996 में HIV/AIDS पर संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक स्तर पर इसके प्रचार और प्रसार का काम संभालते हुए साल 1997 में विश्व एड्स अभियान के तहत संचार, रोकथाम और शिक्षा पर काफी काम करना शुरू किया था.

 

वर्ल्ड एड्स डे का उद्देश्य
वर्ल्ड एड्स डे मनाने का उद्देश्य एचआईवी संक्रमण की वजह से होने वाली महामारी एड्स के बारे में हर उम्र के लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है. एड्स आज के आधुनिक समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है. UNICEF की रिपोर्ट की मानें तो अब तक 37 मिलियन से ज्यादा लोग HIV के शिकार हो चुके हैं जबकि भारत सरकार द्वारा जारी किए गए आकड़ों के अनुसार भारत में एचआईवी के रोगियों की संख्या लगभग 3 मिलियन के आसपास है.

 

क्या होता है एचआईवी एड्स  
HIV एक प्रकार के जानलेवा इंफेक्शन से होने वाली गंभीर बीमारी है. इसे मेडिकल भाषा में ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस यानि एचआईवी के नाम से जाना जाता है. वहीं लोग इसे आम बोलचाल में एड्स यानी एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम के नाम से जानते हैं. इसमें जानलेवा इंफेक्शन व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है जिसकी वजह से शरीर सामान्य बीमारियों से लड़ने में सक्षम नहीं हो पाता.

एचआईवी एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बना हुआ है जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2020 में 3.77 करोड़ लोग एड्स के साथ जी रहे थे। एचआईवी के साथ रहने वाले सभी लोगों में से 16% को यह नहीं पता था कि उन्हें 2020 में एचआईवी है। 73 प्रतिशत की 2020 में एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी तक पहुंच थी। विश्व एड्स दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा विश्व स्वास्थ्य दिवस, विश्व रक्त दाता दिवस, विश्व टीकाकरण सप्ताह, विश्व क्षय रोग दिवस, विश्व तंबाकू निषेध दिवस, विश्व मलेरिया दिवस, विश्व हेपेटाइटिस दिवस, विश्व रोगाणुरोधी जागरूकता सप्ताह, विश्व रोगी सुरक्षा दिवस और विश्व चगास रोग दिवस के साथ चिह्नित 11 आधिकारिक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों में से एक है।

एचआईवी के शुरुआती लक्षण और संकेत –

जब किसी व्यक्ति में एचआईवी के शुरुआती लक्षण होते हैं, तो ये सर्दी या फ्लू के समान हो सकते हैं. ऐसे में एचआईवी के शुरुआती लक्षणों में शामिल हो सकते हैं :

  • बुखार
  • सिरदर्द
  • थकान
  • सूजी हुई ग्रंथियां
  • रैश
  • गले में खराश
  • मांसपेशियों/जोड़ों में दर्द
  • रात को पसीना
  • दस्त

जैसे-जैसे स्थिति बढ़ती है, एचआईवी वाले लोग कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित कर सकते हैं. संक्रमण जो कभी मामूली थे, जैसे कि मुंह में नासूर या घाव, या दांत का फोड़ा (Tooth Abscess) या कैविटी, महत्वपूर्ण दर्द का कारण हो सकता है. एचआईवी वाले लोगों के लिए इन संक्रमणों से उबरना अधिक कठिन हो सकता है. एक व्यक्ति यह नोटिस कर सकता है कि उसे सर्दी या खमीर संक्रमण (Yeast Infection) जैसे छोटे-मोटे संक्रमण अधिक बार होते हैं. वे यह भी नोटिस कर सकते हैं कि वे पहले की तुलना में अधिक बार बीमार होते हैं या लंबे समय से बीमार हैं. कुछ लोग ऐसे संक्रमणों से बहुत अधिक बीमार हो सकते हैं जो आमतौर पर जीवन के लिए खतरा नहीं होते.

 

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