कश्मीर घाटी के कुलगाम में करोड़ों साल पुराने जीवाश्म का बड़ा भंडार मिला है। प्रारंभिक जांच में जीवाश्म की इस खोज को जम्मू-कश्मीर में अब तक की सबसे बड़ी खोज माना जा रहा है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि जीवाश्म कितने पुराने हैं, लेकिन पुरातत्व विभाग के अनुसार विविधता, क्षेत्र विस्तार और आयु के हिसाब से प्रदेश की यह सबसे बड़ी खोज है। शिक्षा विभाग में लेक्चरर पद पर कार्यरत दो अधिकारियों ने जीवाश्म खोजे हैं। पुरातत्व विभाग ने सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर भेजा जाएगा।

एक स्‍कूल में जूनियर लेक्‍चरर के पद पर तैनात इन शिक्षकों का कहना है कि अहरबल जलप्रपात से सिर्फ दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित स्थल हजारों जीवाश्म अवशेषों से भरा हुआ है। ये अपक्षय, सड़क निर्माण और बाद में कटाव के कारण उजागर हो गए हैं। लेक्चरर मंजूर जावेद और डॉ. रौफ हमजा शिक्षा विभाग के स्कूलों में बनाए गए हर्बल गार्डन के नाडल अफसर हैं। दोनों अधिकारियों ने दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में अहरबल वाटरफॉल के पास जीवाश्म खोज निकाले। दोनों अधिकारियों ने दावा किया कि यह जीवाश्म 35 करोड़ से 48 करोड़ साल पुराने हैं।

अधिकारियों ने कहा कि इस क्षेत्र में हजारों की तादाद में जीवाश्म हैं, जिनकी विविधता भी दुर्लभ है। मौसम, सड़कों के निर्माण और भूमि कटाव की वजह से जीवाश्म जमीन की सतह पर नजर आ रहे हैं। खोदाई करने पर यहां बड़े पैमाने पर जीवाश्म मिलना तय है। पुरातत्व विभाग इस क्षेत्र में जीवाश्म संरक्षण की प्रक्रिया चलाए तो यह विज्ञान के लिए अध्ययन की बड़ी संभावना है। 

‘कश्‍मीर का सबसे बड़ा जीवाश्‍म स्‍थल’
शिक्षकों ने कहा, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि ये जीवाश्म नमूने ऑर्डोविशियन और डेवोनियन काल के बीच के हैं। रौफ हमजा ने कहा, वास्तविक उम्र, हालांकि बाद के शोध और कार्बन डेटिंग से निर्धारित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र, विविधता और उम्र के मामले में यह स्थल जम्मू-कश्मीर में संभवत: सबसे बड़ा जीवाश्म स्थल है।

डॉ. हमजा ने कहा कि यह जीवाश्म 35 से 48 करोड़ वर्ष पुराने हो सकते हैं। कार्बन डेटिंग तकनीक से ही इनकी उम्र का सही पता चल सकेगा। वहीं सूचना मिलने पर जम्मू-कश्मीर संग्रह, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की टीम ने सैंपल लिए। पुरातत्व विभाग श्रीनगर के उप निदेशक मुश्ताक अहमद बेग ने कहा कि जांच के लिए सैंपल लिए गए हैं। यह सैंपल भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर भेजे जाएंगे। जांच से पहले यह नहीं कहा जा सकता है कि यह कितने पुराने हैं, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर में जीवाश्म की अब तक सबसे बड़ी खोज कही जा सकती है।

 

 

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