दयानिधि
जन्म से ही बच्चों में उच्च रक्तचाप का खतरा, समय पर निगरानी और सही देखभाल से भविष्य के हृदय रोग रोकें। आजकल हृदय रोग केवल वयस्कों की समस्या नहीं रही। हाल ही में हुए एक अध्ययन ने यह दर्शाया है कि बच्चे का रक्तचाप या ब्लड प्रेशर (बीपी) जन्म के समय भी उनके भविष्य के स्वास्थ्य की एक अहम झलक दे सकता है। उच्च रक्तचाप जन्म के समय या छोटे बच्चों में होने से भविष्य में हृदय रोग और हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ सकता है।

क्या कहता है ‘एनवायरनेज’ अध्ययन?
बेल्जियम में किए गए एनवायरनेज नामक अध्ययन में 500 स्वस्थ बच्चों का जन्म से लेकर 11 साल की उम्र तक पालन किया गया। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि क्या जन्म के समय या बचपन में रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) का स्तर भविष्य में उच्च रक्तचाप के खतरे का संकेत दे सकता है।
शोधकर्ताओं ने बच्चों का रक्तचाप चार जरूरी समय पर मापा –
- जन्म के पहले तीन दिनों में
- प्रीस्कूल उम्र (4-6 वर्ष)
- स्कूल उम्र (9-11 वर्ष)

उच्च रक्तचाप: एक छुपा खतरा
उच्च रक्तचाप अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता। यह धीरे-धीरे शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन अच्छी खबर यह है कि यह एक नियंत्रित करने योग्य जोखिम कारक है। सही जीवनशैली, संतुलित आहार और समय पर चिकित्सा देखभाल से इसे कम किया जा सकता है।

हृदय रोग और वैश्विक स्थिति
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हृदय रोग दुनिया में मृत्यु का प्रमुख कारण है। 2022 में लगभग 1.98 करोड़ लोग हृदय रोगों के कारण मरे, जो कुल मौतों का लगभग 32 फीसदी है। यह आंकड़ा बताता है कि हृदय स्वास्थ्य एक गंभीर वैश्विक चिंता है।

जन्म से ही ध्यान देना क्यों जरूरी है
एनवायरनेज अध्ययन ने स्पष्ट किया कि हृदय रोग की जड़ें बचपन में ही लग सकती हैं। जन्म के समय और छोटे बच्चों में रक्तचाप की निगरानी करना भविष्य में हृदय रोग और उच्च रक्तचाप को रोकने का पहला कदम हो सकता है।
शोध से यह भी पता चलता है कि बचपन में बीपी पैटर्न को समझना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए –
- अगर बच्चा ट्रैकर है, तो उसका रक्तचाप स्थिर है और सामान्य जोखिम है।
- अगर बच्चा हॉर्स रेसर है, तो समय रहते उसकी रक्तचाप पर नजर रखना आवश्यक है।
- नॉन ट्रैकर पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि रक्तचाप में बड़ी गिरावट स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।

इस अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि रक्तचाप का प्रबंधन जीवन भर जरूरी है। जन्म से ही बच्चों के रक्तचाप की निगरानी करना और समय पर जरूरी उपाय करना भविष्य में हृदय रोग और उच्च रक्तचाप से बचाने में मदद कर सकता है। इसलिए, माता-पिता और डॉक्टरों को चाहिए कि वे बच्चों की रक्तचाप की नियमित जांच करें और उन्हें स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करें। सही खान-पान, नियमित व्यायाम और तनाव कम करना ऐसे उपाय हैं जो बच्चों और वयस्कों दोनों के हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। अंत में, यह अध्ययन हमें यह सिखाता है कि हृदय स्वास्थ्य की सुरक्षा केवल वयस्कों के लिए नहीं, बल्कि बचपन से ही शुरू होनी चाहिए। जन्म से ही सावधानी और निगरानी हमें स्वस्थ और लंबी उम्र की दिशा में मार्गदर्शन कर सकती है।
(‘डाउन-टू-अर्थ’ से साभार )
