दयानिधि

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया में 81.5 करोड़ बच्चे सीसे की विषाक्तता से प्रभावित हैं, जबकि हर साल इससे जुड़ी बीमारियों से 35 लाख मौतें होती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सीसा यानी लेड से होने वाले खतरे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान डब्ल्यूएचओ ने “प्रिवेंट टेक्निकल पैकेज” का पहला मसौदा जारी किया। इसका उद्देश्य दुनिया भर में सीसे की विषाक्तता को रोकने के लिए देशों को दिशा-निर्देश देना है। इस कार्यक्रम का आयोजन ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रॉपीज और रिजॉल्व टू सेव लाइव्स के साथ मिलकर किया गया।

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, हर साल करीब 35 लाख लोगों की मौत हृदय संबंधी बीमारियों के कारण होती है, जिनका संबंध सीसे की विषाक्तता से माना जाता है। इसके अलावा दुनिया में लगभग 81.5 करोड़ बच्चे सीसे के संपर्क में हैं। यह संख्या दुनिया के हर तीन बच्चों में से एक के बराबर है।

बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर

विशेषज्ञों का कहना है कि सीसा शरीर के लिए बेहद खतरनाक धातु है। इसका असर सबसे ज्यादा बच्चों, गर्भवती महिलाओं और सीसा उद्योग में काम करने वाले मजदूरों पर पड़ता है। सीसे के संपर्क में आने से बच्चों की मानसिक क्षमता कम हो सकती है। इससे पढ़ाई, सोचने-समझने की शक्ति और भविष्य की कमाई तक प्रभावित हो सकती है। डब्ल्यूएचओ ने साफ कहा है कि सीसे के संपर्क की कोई सुरक्षित सीमा नहीं है। थोड़ी मात्रा में भी लंबे समय तक संपर्क रहने से शरीर को स्थायी नुकसान हो सकता है। इसका असर दिमाग, दिल, किडनी और तंत्रिका तंत्र पर पड़ता है।

रोजमर्रा की चीजों में मौजूद है सीसा

दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और पेंट से सीसा हटाया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद यह कई घरेलू वस्तुओं में अब भी मौजूद है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कुछ कॉस्मेटिक उत्पादों, मसालों, बर्तनों और अन्य सामानों में सीसा पाया जाता है। यही कारण है कि आम लोग अनजाने में इसके संपर्क में आ जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कम आय वाले और विकासशील देशों में यह समस्या ज्यादा गंभीर है। सीसा विषाक्तता से होने वाली लगभग 90 प्रतिशत मौतें इन्हीं देशों में होती हैं। कई जगहों पर लोगों को इस खतरे की जानकारी भी नहीं होती।

2027 तक आएगा पूरा तकनीकी पैकेज

डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी किया गया यह शुरुआती दस्तावेज एक बड़े वैश्विक कार्यक्रम की शुरुआत माना जा रहा है। पूरा “रोकथाम तकनीकी पैकेज” साल 2027 में जारी किया जाएगा। इसके साथ ही सीसा नियंत्रण पर एक वैश्विक कार्य योजना भी पेश की जाएगी। इस तकनीकी पैकेज में देशों के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए जाएंगे। इसमें सीसे के स्रोतों की पहचान करना, लोगों में सीसे की मात्रा की जांच करना, प्रभावित लोगों का इलाज करना और नियमों को सख्ती से लागू करना शामिल होगा। इसके अलावा सरकारों, निजी कंपनियों और जनता के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यदि देशों ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

कई देशों ने साझा किए अपने अनुभव

इस कार्यक्रम में ब्राजील, जॉर्जिया और घाना के स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनके देशों में सीसा विषाक्तता को गंभीर समस्या नहीं माना जाता था। लेकिन जब शोध और आंकड़े सामने आए, तब सरकारों ने इस दिशा में काम शुरू किया। अधिकारियों ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ पर्यावरण, व्यापार और वित्त मंत्रालयों का सहयोग भी जरूरी है। लोगों को जागरूक करना भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिकतर मामलों में लोग यह नहीं समझ पाते कि वे सीसे के संपर्क में हैं।

वैश्विक सहयोग की जरूरत

रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस के हवाले से कहा गया है कि सीसे की विषाक्तता को रोकना दुनिया की प्राथमिकता होनी चाहिए। वहीं डब्ल्यूएचओ के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. रुडिगर क्रेच ने कहा कि नया तकनीकी पैकेज देशों के लिए एक मजबूत मार्गदर्शक साबित होगा। रिजॉल्व टू सेव लाइव्स के प्रमुख डॉ. टॉम फ्रीडन ने देशों से अपील की कि वे केवल वादों तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर कार्रवाई करें। ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रॉपीज की अपाला गुहाठाकुरता ने कहा कि सरकार और निजी संस्थाओं के मिलकर काम करने से ही बड़े बदलाव संभव हैं। डब्ल्यूएचओ ने सदस्य देशों और विशेषज्ञों से इस मसौदे पर सुझाव मांगे हैं। साथ ही देशों से कहा गया है कि वे अभी से अपने यहां सीसा विषाक्तता के स्रोतों की पहचान कर रोकथाम के कदम शुरू करें।

       (‘डाउन-टू-अर्थ’ से साभार )

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