International Association for Suicide Prevention (IASP) द्वारा हर वर्ष 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य लोगों को आत्महत्या रोकथाम के प्रति जागरूक करना है। यह दिवस आत्महत्या को रोकने के लिए मनाया जाता है। 

इस वर्ष की थीम

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम दिवस का विषय ‘कार्रवाई के माध्यम से आशा बनाना’ ( World Suicide Prevention day 2021 theme:- Creating Hope Through Action) है और हमारी परियोजना टीम आत्महत्या की रोकथाम में ‘आशा’ के जटिल विचार पर ध्यान केंद्रित करने और उसका पता लगाने के लिए सहमत हुई है।

इतिहास

विश्व में आत्महत्या के बढ़ते मामले को देखते हुए WHO और International Association for Suicide Prevention (IASP) ने मिलकर 2003 में इसकी शुरुआत की। तभी से हर वर्ष 10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। भारत में आत्महत्या दर और कारण

2016 से भारत में आत्महत्या करने की संख्या में 230,314 की वृद्धि हुई है। आत्महत्या करने वाले में 15-19 वर्ष और 19-35 वर्ष की उम्र के बीच मृत्यु दर काफी ज्यादा है। दुनिया भर में हर वर्ष लगभग 8 लाख लोग आत्महत्या करते है। इसमें से 1,35,000(कुल का 17%) भारत की जनसंख्या आती है। जिसमें सबसे ज्यादा युवा वर्ग के लोग होते है। 2019 में, तमिलनाडु (12.5%), महाराष्ट्र (11.9%), और पश्चिम बंगाल (11.0%) में आत्महत्याओं का उच्चतम अनुपात था। बड़ी आबादी वाले राज्यों में, तमिलनाडु और केरल में 2012 में प्रति 100,000 लोगों में आत्महत्या की दर सबसे अधिक थी। पुरुष और महिला आत्महत्या का अनुपात लगभग 2:1 रहा है। (Note:- 2019 से अभी तक को नया डेटा अपडेट नहीं किया गया है। कोविड-19 के कारण सारा कार्य ठप पड़ा है।)

भारत में आत्महत्या करने के दो कारण है एक तो मानसिक विकार और दूसरा किसानों का कर्ज में डूबा होना है। 2019 में आत्महत्या करने की रिपोर्ट जारी की गयी, जिसमें भारत के किसान की आत्महत्या की दर निरन्तर बढ़ रही है इसका सबसे बड़ा कारण किसानों द्वारा बैंकों से लिए गया लोन समय से न चुका पाने के कारण किसान सबसे ज्यादा आत्महत्या कर रहे है।

आत्महत्या का डेटा

विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार हर 4 मिनट में एक व्यक्ति आत्महत्या करता है। इस प्रकार हर वर्ष 8,00,000 से ज्यादा लोग आत्महत्या करते है। WHO के अनुसार इससे ज्यादा लोग आत्महत्या की कोशिश करते है। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि समाज में कितना मानसिक तनाव है। दुनिया में सबसे ज्यादा आत्महत्या करने वाले गरीब और मध्यम परिवार को लोग होते है। जिसमें सबसे ज्यादा किसान परिवार होते है।

आत्महत्या करने का लक्षण, कारण और बचाव

WHO की रिपोर्ट के आधार पर 79% मृत्यु आत्महत्या के कारण होती है। आत्महत्या करने वाले में 81% लोग कुछ न कुछ संकेत दे देते है। जिससे लोगों को उनसे ताल-मेल बना कर रखाना चाहिए। उनकी बातों को ध्यान से सुनना चाहिए।

आत्महत्या करने के संकेत/लक्षण

1. लोग कैसे आत्महत्या कर लेते है?

2. क्या मेरे जाने के बाद लोग मुझे याद करेंगे।

3. मानसिक तनाव

4. दो-चार या एक माह से घर के लोगों से अलग रहना।

5. मोबाइल, सोशल मीडिया, तथा लोगों के सम्पर्क से दूर रहना।

6.मुझे जीने की इच्छा नहीं है।

7. क्या मेरे जाने के बाद जी लेंगे।

8. जीवन के आगे के रास्ते नहीं दिख रहे है।

9. मादक पदार्थ का अधिक सेवन करना।आत्महत्या करने के कारण

आत्महत्या करने के कुछ मुख्य कारण है, मनोवैज्ञानिक कारण, सामाजिक दबाव, घरेलू कलह, अच्छा वैवाहिक संबंध का न होना, इत्यादि कारण है। 2016 की आत्महत्या की रिपोर्ट में सबसे अधिक आत्महत्या करने वाले युवा 15 से 29 वर्ष के बीच बताई गयी है। इनमें से सबसे ज्यादा गरीब और मध्यम परिवार से संबंधित रखते है। विश्व में आत्महत्या करने वाले में सबसे ज्यादा युवा वर्ग शामिल है। WHO के अनुसार 81% आत्महत्या करने वाले युवा है।आत्महत्या के रोकथाम

आत्महत्या को रोकने के लिए हर वर्ष WHO एक थीम जारी करती है। आत्महत्या रोकने को लिए देश के सभी व्यक्ति को जागरूक करना होगा। लोगों को उनकी समस्या को सुनना चाहिए। अगर मानसिक बीमारी से पीड़ित है तो उसका इलाज कराना चाहिए। लोगों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाकर आत्महत्या जैसे मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है। मानसिक अवसाद होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। रोकने के लिए देश की सरकार को अच्छी-अच्छी सुविधा देनी चाहिए।

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