कोरोनावायरस के टीके कोवैक्सीन का निर्माण करने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने  6 जनवरी  (बुधवार) को एक एडवायजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि उसका टीका लगवाने के बाद न तो पैरासिटामॉल और न ही कोई दर्द निवारक दवा लेने की जरूरत है। 

भारत बायोटेक ने ट्विटर पर कहा, “हमें फीडबैक मिला है कि कुछ टीकाकरण केंद्र बच्चों को कोवाक्सिन की खुराक लगाने के बाद पैरासिटामॉल की 500 एमजी की डोज लेने को कह रहे हैं। हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि कोवैक्सीन टीका लगवाने के बाद न पैरासिटामॉल और न ही किसी दर्द निवारक दवा ली जानी चाहिए।”

टीका निर्माता कंपनी ने कहा कि 30 हजार से ज्यादा लोगों पर किए गए क्लिनिकल परीक्षण के दौरान करीब 10-20 फीसदी लोगों ने दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी थी। लेकिन वैक्सीन के दुष्प्रभाव काफी हल्के थे। यह एक-दो दिन में बिना दवाई लिए ठीक हो गए थे और किसी दवाई की जरूरत नहीं पड़ी थी। कंपनी ने कहा कि दवाई डॉक्टर के परामर्श के बाद ही लेने की सलाह दी जानी चाहिए।

कंपनी के मुताबिक, पैरासिटामॉल को कोरोना की बाकी वैक्सीन के साथ लेने की सलाह दी जाती है, लेकिन कोवाक्सिन में इसे लेने की जरूरत नहीं है। गौरतलब है कि पिछले महीने ही भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने कुछ शर्तों के साथ 12 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए कोवाक्सिन के आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी। देश में तीन जनवरी से 15-18 वर्ष के किशोरों के लिए टीकाकरण शुरू किया गया है जिसके तहत उन्हें सिर्फ कोवाक्सिन का ही टीका लगाया जा रहा है।

उसने ये भी कहा कि दवाओं के लिए डॉक्टरी परामर्श की जरूरत होती है और कुछ दूसरे कोविड-19 टीकों के लिए पैरासिटेमॉल की सिफारिश की गई थी लेकिन कोवैक्सीन के साथ ऐसा नहीं है. लेकिन एक बाल रोग विशेषज्ञ और दिल्ली चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ अरुण गुप्ता ने कहा, ‘पैरासिटेमॉल दशकों से टीकों के साथ ली जाती रही है क्योंकि टीका लगने के बाद बच्चों को बुखार हो सकता है. हम इसे बच्चों को देने के लिए तभी कहते हैं, अगर उन्हें बुखार हो जाए या असहनीय दर्द उठने लगे’. उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे विचार में वो ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि पैरासिटेमॉल के नियमित या अंधाधुंध इस्तेमाल को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए’.

बच्चों पर कोवैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल

भारत सरकार ने 15 से 18 आयु वर्ग के किशोरों के लिए 3 जनवरी से टीकाकरण शुरू कर दिया. अभी तक, इस आयु वर्ग में आने वालों के लिए भारत में केवल कोवैक्सीन टीका ही उपलब्ध है. बच्चों के लिए वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल्स अभी चल ही रहे हैं. 30 दिसंबर को कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान डाला था, जिसमें कहा गया था कि 2 से 18 वर्ष के बीच वालों के, पहले और दूसरे चरण के ट्रायल्स में ‘मज़बूत सुरक्षा और प्रतिरक्षाजनकता’ देखने को मिली थी.

कंपनी ने अपने बयान में दावा किया था कि ये ट्रायल जिनका अभी प्रकाशन और पियर रिव्यू होना है, 535 पात्र प्रतिभागियों पर किया गया था, जिनमें से 374 में टीका लगने के बाद मामूली से मध्यम लक्षण देखने को मिले थे, जो अधिकतर एक दिन के अंदर ठीक कर लिए गए थे. कंपनी का दावा था कि कोई गंभीर विपरीत प्रभाव देखने में नहीं आए और उसने आगे कहा कि इंजेक्शन की जगह पर दर्द सबसे ज्यादा बताया जाने वाला साइड इफेक्ट था.

बच्चों को वैक्सीनेशन के बाद कुछ हल्के साइड इफेक्ट दिख सकते हैं 

जिस तरह 18 और 60 प्लस के एज ग्रुप के लोगों में वैक्सीनेशन के कुछ संभावित साइड इफेक्ट दिखे थे, हो सकता है वो बच्चों में भी नजर आएं, इसलिए घबराने की  जरूरत नहीं है. ये हल्के साइड इफेक्ट दिखाते हैं कि वैक्सीन ने अपना काम करना शुरू कर दिया है. 

लाल निशान और दर्द 

हाथ में जहां पर वैक्सीन लगाई गई है तो बच्चों को उस जगह पर लाल निशान के साथ दर्द महसूस हो सकता है. सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, वैक्सीनेशन का लाल निशान और दर्द को कम करने में मदद के लिए टीकाकरण वाले एरिया पर एक ठंडा, नरम कपड़ा रखना सही रहेगा. 

वैक्सीनेशन के बाद बेहोशी

किशोरों में किसी भी टीके के बाद बेहोशी आम बात है. सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, वैक्सीनेशन के बाद लगभग 15 मिनट तक बैठना या लेटना बेहोशी को रोकने में मदद कर सकता है. इसी कारण वैक्सीनेशन के बाद वैक्सीन सेंटर डॉक्टर वैक्सीनेटेड लोगों को थोड़ी देर अपनी देखरेख में रखते हैं.

हल्का बुखार 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ और डॉक्टर के मुताबिक, वैक्सीनेशन के बाद बच्चों में हल्का बुखार भी देखने मिल सकता है. 18 और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को हल्का बुखार भी देखने मिल सकता है. 18 और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को हल्का बुखार आने पर टेबलेट लेने की सलाह दी गई थी, लेकिन अगर आपके बच्चे को भी बुखार  आया है तो इसके लिए डॉक्टर की सलाह पर उनके द्वारा बताई हुई मेडिसिन का सेवन कर सकते हैं.  

थकान और बदन दर्द 

वैक्सीन लगवाने के बाद बच्चों को थकान और बदन दर्द की समस्या भी हो सकती है. अगर आप भी बच्चों में इस तरह के लक्षण देखते हैं, तो घबराने की जगह CDC के बताए मुताबिक, आराम करने दें और उन्हें अधिक मात्रा में लिक्विड पदार्थ दें. लिक्विड पदार्थ में पैक्ड लिक्विड का सेवन न कराएं. 

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