जल है तो कल है, जल बचेगा, तभी बचेगा जीवन …जल बचाएं
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पूरी दुनिया आज एक भीषण जल संकट के दौर से गुजर रही है। भारत में नीति आयोग ने भी मौजूदा हालात को देश के इतिहास का सबसे गंभीर जल संकट माना है। यदि हालात ऐसे ही रहे तो अगले दस वर्षों में भारत में पानी की प्रति व्यक्ति वार्षिक उपलब्धता मौजूदा 1588 घन मीटर की महज आधी रह जाएगी। यह खतरा वैश्विक स्तर पर लगातार गहराता जा रहा है।

क्या आप जानते हैं कि
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  • भारत में सालाना प्रति व्यक्ति 1486 क्यूबिक पानी उपलब्ध है जबकि अंतरराष्ट्रीय मानक 1700 क्यूबिक मीटर है।
  • दुनिया के करीब 4 अरब लोग किसी न किसी रूप में पानी की कमी का सामना कर रहे हैं।
  • दुनिया में प्रत्येक दिन करीब एक हजार बच्चों की मौत दूषित पानी के कारण होता है।
  • भारतीय अपनी आय का 6 प्रतिशत पानी पर खर्च कर रहे हैं। हालांकि कुछ देशों में लोग अपनी आय का 50 प्रतिशत राशि तक पानी पर खर्च करते हैं।
  • भारत में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता सन् 2001 में 1820 क्यूबिक मीटर थी, जो वर्तमान में महज 1486 क्यूबिक मीटर रह गयी है तथा यदि यही स्थिति कायम रही तो 2030 तक यह मात्र 1140 क्यूबिक मीटर होगी।
  • दस वर्ष पहले भारत में लगभग 45 हजार नदियां थीं पर इनमें से 4500 नदियां सूख कर महज बरसाती बन कर रह गई हैं।       

  • भारत के पास अभी 1869 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी है जिसका बड़ा हिस्सा विविध कारणों से उपयोग में नहीं आता।
  • भारत में 1061 बिलियन क्यूबिक मीटर सर्फेस एवं ग्राउंड वाटर हर साल इस्तेमाल होता है।
  • आंकड़े भयावह हैं एवं मानव जाति के समक्ष लगातार गहराते जल संकट को दर्शा रहे हैं।


जरूरी है जल सजगता
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इस क्रम में सबसे अधिक जरूरी है इस मामले में सजगता की। लाभ लोभ में पानी का अनुचित दोहन, उसकी बर्बादी अक्षम्य है।
नदियों को निजी हाथों में सौंपने एवं बोतल बंद पानी की बिक्री आम आदमी की परेशानी को और बढ़ाने वाला है।

रूढ़ परम्पराओं जड़ मान्यताओं, पूजा पाठ, कर्मकांड से जुड़े अवशेष विसर्जित किए जाने के कारण हमने अपने नदियों तालाबों झीलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। यदि अब भी ध्यान नहीं दिया गया तो इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। अपने जल स्रोतों की रक्षा हर हाल में करें।

इसके साथ ही जरूरी है नदियों तालाबों झीलों की सूखी पड़ी जमीनों पर अवैध कब्जे का विरोध। बिल्डरों, दलालों, अफसरों, नेताओं का गठजोड़ यह अनुचित काम धड़ल्ले से कर रहे हैं। इसके कारण आमलोगों की परेशानी लगातार बढ़ती ही जा रही है।
समस्याएं अनेक हैं। पर इसका समाधान असंभव नहीं है। इसके लिए जल-संरक्षण के साथ साथ गलत प्रवृत्तियों, नीतियों का विरोध भी जरूरी है। आइए, विश्व जल दिवस के अवसर पर हम जल संरक्षण का संकल्प लें। क्योंकि जल है तो कल है। जल बचेगा तभी बचेगा जीवन। सजग हों, जल संकट के समाधान के लिए आगे आएं। हर संभव प्रयास एवं संघर्ष करें।

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