ललित मौर्या
लैंसेट में प्रकाशित एक नए अध्ययन में सामने आया है कि 2023 में दुनिया भर में संक्रमण से हुई 54 लाख मौतों में से छह लाख (करीब 11 फीसदी) मौतें मोटापे से जुड़ी थीं। बढ़ता मोटापा अब एक नए वैश्विक संकट को जन्म दे रहा है। एक नए अंतराष्ट्रीय अध्ययन में सामने आया है कि अतिरिक्त वजन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे साधारण संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकते हैं। इससे अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।

इस अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित हुए हैं। यह अध्ययन 5.4 लाख से अधिक वयस्कों पर किया गया। इसमें फिनलैंड के करीब 67,000 और यूके बायोबैंक के 4.7 लाख से ज्यादा लोगों के आंकड़े शामिल थे। प्रतिभागियों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) शुरुआत में मापा गया और करीब 13 से 14 वर्षों तक उनकी सेहत पर नजर रखी गई।

मोटापे से 70 फीसदी तक बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स 30 या उससे अधिक था (यानी वे मोटापे का शिकार थे), उनमें किसी भी संक्रामक बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होने या उससे मृत्यु का खतरा सामान्य वजन (18.5 से 24.9) वाले लोगों की तुलना में 70 फीसदी अधिक था। स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब बीएमआई 40 या उससे अधिक हो। ऐसे लोगों में गंभीर संक्रमण का खतरा तीन गुना तक पाया गया। यूके के आंकड़ों में सामने आया कि सामान्य वजन वाले लोगों में गंभीर संक्रमण का सालाना जोखिम 1.1 फीसदी था, जबकि मोटापे से ग्रस्त लोगों में यह 1.8 फीसदी तक पहुंच गया था।

किन बीमारियों का बढ़ा खतरा?
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 10 आम संक्रामक बीमारियों का विश्लेषण किया। इनमें मोटापे से फ्लू, कोविड-19, निमोनिया, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन और श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमण का खतरा बढ़ा पाया गया। हालांकि एचआईवी और तपेदिक (टीबी) के मामलों में ऐसा कोई स्पष्ट संबंध नहीं देखा गया। महामारी के दौरान यह साफ दिखा कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में गंभीर कोविड-19 होने का खतरा ज्यादा था। इसी को समझने के लिए जब शोधकर्ताओं ने यह जांच शुरू की कि क्या यह संबंध सिर्फ कोविड तक सीमित है या अन्य तरह के संक्रमणों में भी दिखता है, और इसके पीछे कौन-से कारण हो सकते हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी और अध्ययन से जुड़ी प्रमुख शोधकर्ता सोल्जा न्यबर्ग ने इस बारे में प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए कहा कि, “यह खतरा किसी एक वायरस या बैक्टीरिया तक सीमित नहीं। बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और फंगस से होने वाले संक्रमणों में भी मोटापे के साथ ऐसा ही संबंध देखा गया।” अध्ययन में एक अहम निष्कर्ष यह भी सामने आया कि वजन कम करना सचमुच फर्क डालता है। जिन लोगों ने अपना वजन घटाकर, मोटापे से निकलकर सामान्य बीएमआई में जगह बनाई, उनमें गंभीर संक्रमण का खतरा करीब 20 फीसदी तक कम पाया गया। वहीं तस्वीर का दूसरा पहलू भी साफ दिखा, जिन लोगों का वजन बढ़कर ओवरवेट से मोटापे की श्रेणी में पहुंच गया, उनमें गंभीर संक्रमण का खतरा करीब 30 फीसदी तक बढ़ गया।

इसका साफ मतलब है कि जहां बढ़ता वजन से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, वहीं संतुलित वजन की ओर लौटना इस जोखिम को कम कर सकता है। अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता मिका किविमाकी, जो यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन से जुड़े हैं, उनका कहना है “मोटापा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है।” उनके मुताबिक, जब प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर पड़ता है तो शरीर बैक्टीरिया, वायरस और अन्य रोगजनकों से प्रभावी ढंग से नहीं लड़ पाता, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

संक्रमण से हुई 11 फीसदी मौतों की वजह रहा मोटापा
अपने इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज से जुड़े आंकड़ों का भी विश्लेषण किया है। नतीजे दर्शाते हैं कि 2023 में दुनिया भर में संक्रमण से हुई 54 लाख मौतों में से करीब छह लाख (करीब 11 फीसदी) मौतें मोटापे से जुड़ी थीं। अमेरिका में 2023 में संक्रमण से हुई मौतों में 26 फीसदी मामलों में मोटापा एक कारक था। वहीं ब्रिटेन में यह आंकड़ा करीब 16 फीसदी रहा। इसी तरह फिनलैंड (19 फीसदी), स्वीडन (13 फीसदी), नॉर्वे (11 फीसदी) और डेनमार्क (12 फीसदी) में भी स्थिति चिंताजनक पाई गई।

क्या है समाधान
विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए समय पर टीकाकरण और बूस्टर डोज बेहद जरूरी है। साथ ही स्वस्थ आहार के साथ शारीरिक गतिविधियां भी जरूरी हैं। इसके साथ ही सभी के लिए पौष्टिक आहार जैसी नीतिगत पहलें बेहद जरूरी हैं, ताकि मोटापे और उससे सम्बंधित संक्रमण से जुड़ी मौतों को कम किया जा सके। शोधकर्ताओं ने इस बात पर भी प्रकाश डाला है कि यह एक अवलोकनात्मक अध्ययन है। ऐसे में यह कारण-प्रभाव को पूरी तरह साबित नहीं करता। साथ ही, फिनलैंड और ब्रिटेन के आंकड़े पूरी दुनिया का प्रतिनिधित्व नहीं करते। हालांकि अध्ययन यह दर्शाता है कि मोटापा केवल जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का ही नहीं, बल्कि गंभीर संक्रमण और उससे जुड़ी मौतों का भी बड़ा कारण बन रहा है।
(‘डाउन-टू-अर्थ’ से साभार )
