ललित मौर्या
युद्ध के बीच भले ही फिलहाल अनाज की पर्याप्त आपूर्ति है, लेकिन महंगी ऊर्जा और उर्वरक संकट ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता को और गहरा दिया है। दुनिया के एक हिस्से में चल रहे युद्ध का असर अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया की थाली तक पर दिखाने लगा है। महंगा कच्चा तेल, उर्वरक की बढ़ती कीमतें और खेती की बढ़ती लागत, ये तीनों मिलकर एक नई खाद्य महंगाई की जमीन तैयार कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में खुलासा किया है कि वैश्विक खाद्य कीमतों में लगातार दूसरे महीने उछाल दर्ज किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के कारण ऊर्जा कीमतों में आई तेजी है, जिससे खाद्य बाजारों पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि मौजूदा स्तर अभी भी मार्च 2022 के रिकॉर्ड स्तर से करीब 20 फीसदी कम है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले कीमतें फिर बढ़ने लगी हैं, जो आने वाले समय में महंगाई का संकेत हो सकता है। राहत की खबर यह है कि फिलहाल अनाज की कमी नहीं है, लेकिन अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे, तो आने वाले महीनों में दुनिया को खाने की बढ़ती कीमतों के दौर का सामना करना पड़ सकता है। यानी युद्ध भले ही सीमाओं पर लड़ा जा रहा हो, लेकिन उसकी कीमत दुनिया का आम आदमी अपनी रसोई में चुकाएगा।

खाद्य मूल्य सूचकांक में बढ़ोतरी
रिपोर्ट से पता चला है कि एफएओ फूड प्राइस इंडेक्स मार्च में बढ़कर 128.5 अंकों पर पहुंच गया, जो फरवरी के मुकाबले 2.4 फीसदी अधिक है। वहीं पिछले साल मार्च से तुलना करें तो इसमें एक फीसदी से अधिक का इजाफा दर्ज किया गया है।





