ललित मौर्या
पश्चिम एशिया का संकट अब भारत के आम लोगों की जिंदगी में महंगाई, घटती आय और बढ़ती गरीबी के रूप में साफ नजर आने लगा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव भले ही भारत से हजारों किलोमीटर दूर हो, लेकिन इसका असर अब देश में आम लोगों की जिंदगी पर भी साफ तौर पर दिखने लगा है।

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट ‘मिलिट्री एस्केलेशन इन द मिडिल ईस्ट: ह्यूमन डेवलपमेंट इम्पैटस अक्रॉस एशिया एंड द पैसिफिक’ में चेताया है कि इस संघर्ष के चलते भारत में 24,64,698 लाख लोग गरीबी की गिरफ्त में जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यह संकट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं। इसकी वजह से एशिया के 14 देशों में करीब 88 लाख लोगों के गरीब होने का खतरा पैदा हो गया है, और इसमें सबसे ज्यादा असर दक्षिण एशिया पर पड़ने वाला है। यूएनडीपी ने यह भी आशंका जताई है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र को इस संकट से 9,700 करोड़ से 29,900 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है। देखा जाए तो भारत के लिए तस्वीर और भी चिंताजनक है। आंकड़े बताते हैं कि देश की गरीबी दर 23.9 फीसदी से बढ़कर 24.2 फीसदी तक पहुंच सकती है, यानी करीब 25 लाख लोग अतिरिक्त रूप से गरीबी रेखा के नीचे चले जाएंगे। इसके साथ ही भारत में गरीबी से जूझ रही आबादी का आंकड़ा 35.16 करोड़ से बढ़कर करीब 35.4 करोड़ पर पहुंच सकता है।



