दिवाली के बाद से दिल्‍ली-एनसीआर की आबोहवा जहरीली हो गई है। यहां के एयर पॉल्‍यूशन से पर्यावरणविद् टेंशन में हैं। उन्‍होंने इसे हेल्‍थ इमर्जेंसी की स्थिति करार दिया है। उनका कहना है कि इसे देखते हुए अगले एक हफ्ते तक लॉकडाउन जैसे कदम उठाने की जरूरत है। इसके तहत स्‍कूलों को बंद करने के साथ वाहनों के मूवमेंट को भी रोकना होगा। 

दिल्‍ली-एनसीआर में एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स (AQI) गुरुवार से ही ‘गंभीर’ कैटेगरी में है। किसी शहर में आबोहवा कितनी साफ है, इसे एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स (AQI) के जरिये नापा जाता है। रविवार को 5 बजे के करीब राजधानी का एक्‍यूआई 432 दर्ज किया गया। यह ‘गंभीर’ (Severe) की श्रेणी में आता है। यह इंडेक्‍स 0 से 500 के स्‍केल में होता है।

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट्स?
पर्यावरणविद् विमलेंदु झा ने कहा है कि यह जरूरी है कि हम उत्‍तर भारत में एयर पॉल्‍यूशन के मौजूदा संकट की गंभीरता को समझें। यह हेल्‍थ इमर्जेंसी की स्थिति है। अभी पराली जलाया जाना प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।


विमलेंदु ने सलाह देते हुए कहा कि अभी के वायु प्रदूषण संकट को देखते हुए लॉकडाउन जैसे कदम उठाने की जरूरत है। मसलन स्‍कूलों को बंद किया जा सकता है और दिल्‍ली-एनसीआर के आसपास के इलाकों में वाहनों की आवाजाही पर अंकुश लगाया जा सकता है। अच्‍छा होगा कि अगले एक हफ्ते के लिए कंस्‍ट्रक्‍शन एक्टिविटीज पर बैन लगा दिया जाए।


आगे स्थिति कैसी रहने वाली है?
राजधानी और आसपास के इलाकों में कुछ दिन स्थिति कमोबेश जस की तस बने रहने की संभावना है। ‘सफर’ के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्‍ली में सोमवार को भी एक्‍यूआई 381 रहने का अनुमान है। यह ‘बहुत खराब’ कैटेगरी में आता है।

समझ लें एक्‍यूआई का गण‍ित
एक्यूआई को शून्य और 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 और 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 और 500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है। इसका मतलल एक्‍यूआई जितना कम वायु उतनी साफ-सुथरी। पिछले कुछ दिनों में दिल्‍ली-एनसीआर में एक्‍यूआई बराबर 400 के ऊपर बना हुआ है। शुक्रवार को एक समय तो नोएडा में एक्‍यूआई 600 के पार निकल गया था। एक्‍यूआई में दिनभर बदलाव होता रहता है।

लोगों को क्‍या करना चाहिए?
‘सफर’ की हेल्‍थ एडवाइजरी के अनुसार, लोगों को अभी डाउटडोर फिजिकल एक्टिविटीज से परहेज करना चाहिए। यह बात खासतौर से बुजुर्गों, बच्‍चों और उन लोगों पर लागू होती जिन्‍हें फेंफड़ों और हृदय की समस्‍या है। प्रदूषित वायु में लोगों को सांस लेने में तकलीफ, गले में खराश और आंखों में जलन हो सकती है।


दिवाली पर लोगों ने की मनमानी
राष्ट्रीय राजधानी में एक जनवरी 2022 तक पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद दिवाली पर लोगों ने शाम सात बजे से जमकर पटाखे जलाए। हरियाणा सरकार ने भी दिल्ली से सटे क्षेत्रों समेत 14 जिलों में पटाखे की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था। लेकिन, यहां पर भी नियमों को ताक पर रख दिया गया।

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