डी एन एस आनंद

20 अगस्त 2022 को ” डॉ नरेन्द्र दाभोलकर शहादत दिवस – वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस ” के अवसर पर देश के जन विज्ञान आंदोलन ने, देश में तर्कशील आंदोलन के प्रतीक बन चुके डॉ नरेन्द्र दाभोलकर को शिद्दत से याद किया। आल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क ( AIPSN ) के आह्वान पर देशभर में उससे संबद्ध तथा समान सोच वाले संगठनों एवं सहयोगियों ने इसे ‘वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस’ के रूप में मनाया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न समूहों के बीच विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया तथा संविधान सम्मत सतत प्रयास एवं संघर्ष के द्वारा सभी प्रकार की गैर बराबरी, शोषण – उत्पीड़न समेत अंधश्रद्धा अंधविश्वास मुक्त, तर्कशील, समतामूलक, विविधतापूर्ण, न्यायपूर्ण एवं प्रगतिशील समाज के निर्माण का संकल्प लिया गया।

गौरतलब है कि काफी लम्बे संघर्ष एवं बलिदान के बाद मिली आजादी के 75 वर्ष पूरे हो गए पर हमारे शहीदों के सपने अब तक पूरे नहीं हुए। सामाजिक, आर्थिक गैरबराबरी, विषमता, शिक्षा, स्वास्थ्य, कुपोषण, अंधविश्वास से लेकर विस्थापन, पलायन एवं बेरोजगारी तक की अनेक समस्याएं‌ एवं चुनौतियां अब भी देश के सामने मुंह बाए खड़ी हैं। समाज में व्याप्त मानसिक जड़ता एवं अवैज्ञानिक सोच, देश को प्रगति पथ पर आगे ले जाने के रास्ते में एक बड़ी बाधा है। ऐसे में बेहद जरूरी है देश में अंधश्रद्धा, अंधविश्वास विरोधी अभियान के प्रखर प्रवक्ता एवं तर्कशील आंदोलन के प्रतीक बन चुके डॉ नरेन्द्र दाभोलकर की शहादत को याद करना एवं उनके सपनों को मंजिल तक पहुंचाने का हर संभव प्रयास करना। और उसके स्मृति दिवस के अवसर पर देश भर में लोगों ने इसे अंजाम दिया तथा इस सिलसिले में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

 

पृष्ठभूमि

1 नवंबर 1945 को महाराष्ट्र के सतारा में जन्मे डॉ नरेन्द्र अच्युत दाभोलकर वस्तुत महाराष्ट्र के प्रमुख फिजिशियन, सोशल एक्टिविस्ट, तर्कवादी, विज्ञान संचारक एवं लेखक थे। उन्होंने तर्कशील आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए 9 अगस्त 1989 को महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति का गठन किया एवं इसके अध्यक्ष बनाए गए। अंधश्रद्धा, अंधविश्वास विरोधी उनके अभियान से घबरा कर 20 अगस्त 2013 को पूणे में धार्मिक कट्टरवादियों ने उनकी नृशंस हत्या कर दी। देश में तर्कशील आंदोलन को आगे बढ़ाने में उनकी प्रमुख भूमिका को देखते हुए आ‌ल इंडिया पीपुल्स साइंस नेटवर्क ( AIPSN ) एवं देश भर में उससे जुड़े संगठन तब से उनके शहादत दिवस 20 अगस्त को वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस ( Scientific Temper day ) के रूप में मनाते आ रहे हैं। इस क्रम में देश भर में विभिन्न विज्ञान परक गतिविधियों का आयोजन किया गया। झारखंड में इस अवसर पर जन विज्ञान आंदोलन से जुड़ी साइंस फार सोसायटी झारखंड, ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड एवं झारखंड साइंस फोरम, रांची के संयुक्त तत्वावधान में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान का विषय था – “डॉ नरेन्द्र दाभोलकर के सपनों को मंजिल तक पहुंचाने की चुनौतियां ” एवं इसके मुख्य वक्ता थे महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के डॉ हमीद दाभोलकर।डॉ हमीद दाभोलकर ने अपने प्रभावशाली व्याख्यान में भारत में तर्कशील आंदोलन की लम्बी परम्परा एवं शानदार विरासत की चर्चा करते हुए इसे आगे बढ़ाने में महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति एवं डॉ नरेन्द्र दाभोलकर की भूमिका का उल्लेख किया। देश की मौजूदा परिस्थितियों एवं चुनौतियों की चर्चा करते हुए उन्होंने प्रतिगामी सोच को समाज एवं देश के विकास के लिए घातक करार दिया तथा मिल जुलकर हालात बदलने के लिए प्रयास एवं संघर्ष का आह्वान किया। कार्यक्रम को संबंधित संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया।

साइंस फार सोसायटी झारखंड की पहल

साइंस फार सोसायटी झारखंड ने आजादी के 75 वें वर्ष को वैज्ञानिक दृष्टिकोण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। पिछले साल 20 अगस्त से ही यह सिलसिला शुरू हुआ था। सोसायटी ने डॉ नरेन्द्र दाभोलकर की स्मृति में वर्ष भर आनलाइन व्याख्यान, परिचर्चा, फेसबुक लाइव, विषय विशेषज्ञों एवं जन विज्ञान आंदोलन के महत्वपूर्ण सख्शियतों का साक्षात्कार आदि का आयोजन किया। स्कूल कॉलेज के छात्र छात्राओं के बीच भी कुछ कार्यक्रम आयोजित किए गए।

साइंस फिल्म फेस्टिवल का आयोजन

साइंस फार सोसायटी झारखंड ने इस कड़ी में चार दिवसीय कोल्हान साइंस फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जिसका समापन 20 अगस्त, डॉ नरेन्द्र दाभोलकर स्मृति दिवस – वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिवस के अवसर पर किया गया। दरअसल यह झारखंड में वैज्ञानिक जागरूकता अभियान को आगे बढ़ाने के लिए जारी झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल की दूसरी कड़ी थी। ऐतिहासिक कोल्हान क्षेत्र में जमशेदपुर, पटमदा चाईबासा एवं चांडिल में दूसरा झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया गया।

दरअसल साइंस फार सोसायटी झारखंड एवं वैज्ञानिक चेतना साइंस वेब पोर्टल जमशेदपुर ने अपने समान सोच वाले अन्य जन संगठनों, सामाजिक संगठनों के सहयोग से झारखंड में साइंटिफिक टेंपर डे के विविध कार्यक्रमों को व्यापक वैज्ञानिक जागरूकता अभियान के रूप में आगे बढ़ाने का हर संभव प्रयास किया ताकि प्रतिगामी अवैज्ञानिक सोच, धार्मिक कट्टरता, नफरत, हिंसा एवं अंधश्रद्धा, अंधविश्वास मुक्त, संविधान सम्मत समतामूलक समाज एवं देश का निर्माण संभव हो सके। इस सिलसिले में उल्लेखनीय है कि भारतीय संविधान ने वैज्ञानिक मानसिकता, मानवतावाद सुधार एवं खोज की भावना के विकास को देश के नागरिकों का मौलिक कर्तव्य घोषित किया है।

डी एन एस आनंद
महासचिव, साइंस फार सोसायटी, झारखंड
संपादक, वैज्ञानिक चेतना, साइंस वेब पोर्टल, जमशेदपुर, झारखंड

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