रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि सिर्फ 44.85 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा थी जबकि लगभग 34 फीसदी में ही इंटरनेट कनेक्शन था। वहीं केवल 27 फीसदी स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन ) के लिए विशेष शौचालय हैं, उनमें से 49 फीसदी से अधिक में रेलिंग वाला रैंप है।

सांकेतिक तस्वीर।
कोरोना काल में 2020-21 के दौरान देशभर में 20 हजार से अधिक स्कूल बंद हुए और पिछले साल की तुलना में शिक्षकों की संख्या में 1.95 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। शिक्षा मंत्रालय की बृहस्पतिवार को जारी नई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (यूडीआईएसई+) की 2021-22 के लिए स्कूली शिक्षा की रिपोर्ट के मुताबिक 2020-21 में 15.09 लाख की तुलना में 2021-22 में देश में सिर्फ 14.89 लाख स्कूल बचे। इसमें मुख्य रूप से निजी और अन्य प्रबंधन वाले स्कूल बंद हुए।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गय कि सिर्फ 44.85 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा थी जबकि लगभग 34 फीसदी में ही इंटरनेट कनेक्शन था। वहीं केवल 27 फीसदी स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए विशेष शौचालय हैं, उनमें से 49 फीसदी से अधिक में रेलिंग वाला रैंप है। रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक में 25.57 करोड़ छात्रों ने दाखिला लिया। यह 2020-21 की तुलना में 19.36 लाख अधिक है। वहीं 2021-22 में स्कूलों में 95.07 लाख शिक्षक रह गए, 2020-21 में इनकी संख्या 97.87 लाख थी।
प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व उच्चतर माध्यमिक में विद्यार्थियों के सकल नामांकन अनुपात में सुधार
रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तरीय स्कूल शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात में सुधार हुआ है। देशभर में उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में सबसे अधिक छात्रों का नामांकन और शिक्षकों की भर्ती हुई है। वहीं, वर्ष 2021-22 में एससी, एसटी, ओबीसी वर्ग में आठ लाख से अधिक नई छात्राओं ने नामांकन किया है। देशभर के स्कूलों में 95.07 लाख शिक्षक हैं, जिसमें से 51 फीसदी महिला शिक्षक शामिल हैं। 2021-22 में प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक तक स्कूलों में कुल 25.57 करोड़ छात्रों का नामांकन हुआ। जबकि वर्ष 2020-21 में सिर्फ 25.38 करोड़ छात्रों ने नामांकन कराया था। 

बेटियों के पंजीकरण  में लगातार इजाफा

वर्ष 2021-22 में 12.29 करोड़ से अधिक छात्राओं ने प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक तक नामांकन कराया था। इस तरह 2020-21 में लड़कियों के नामांकन की तुलना में 8.19 लाख का इजाफा देखा गया। जीईआर का लिंग समानता सूचकांक (जीपीआई) दर्शाता है कि समान आयुवर्ग की लड़कियों की आबादी को देखते हुये स्कूल शिक्षा में लड़कियों का प्रतिनिधित्व उचित स्तर पर है। सभी स्कूल शिक्षा के स्तर पर जीपीआई मूल्य स्कूल शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी की जानकारी देता है।
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