दुनिया के कई देशों सहित भारत में तेजी से बढ़ता कोविड-19 का प्रकोप चिंता बढ़ाने वाला है। वहीं जिस तरह से हालिया अध्ययनों में वैज्ञानिकों ने कोरोना के नए वैरिएंट्स की प्रकृति और संक्रामता को लेकर अलर्ट किया है, वह निश्चित ही डराने वाला है। अध्ययनों में एक्सई जैसे वैरिएंट्स को अब तक सबसे संक्रामक माने जा रहे ओमिक्रॉन BA.2 (स्टील्थ ओमिक्रॉन) से भी 10 फीसदी अधिक संक्रामकता वाला बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण के केस में उछाल देखने को मिल रहा है, उससे साबित होता है कि ये दोनों अति संक्रामक वैरिएंट्स सक्रिय हैं, जिनसे बचाव के लिए विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है।

कोविड-19 के केस

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण को किसी भी स्थिति में हल्के में लेने की गलती न करें, विशेषकर इसे इन्फ्लूएंजा जैसा मानकर चलना काफी गंभीर हो सकता है। यह इन्फ्लूएंजा से कहीं ज्यादा घातक और चुनौतीपूर्ण है। आइए आगे इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

इन्फ्लूएंजा से अधिक घातक है कोरोना

स्पेन में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती वयस्कों में, इन्फ्लूएंजा से पीड़ितों की तुलना में जटिलताओं और मृत्यु का खतरा काफी अधिक होता है। 23-26 अप्रैल तक होने वाले पुर्तगाल के लिस्बन में क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी एंड इंफेक्शियस डिजीज (ECCMID) की इस साल की यूरोपीय कांग्रेस में प्रस्तुत की जा रही खोज यह भी बताती है कि इन्फ्लूएंजा की तुलना में कोविड-19 के कारण अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहने और इंटेंसिव केयर की जरूरत दोगुनी अधिक हो सकती है।

कोरोना संक्रमण के वैश्विक मामले

क्या कहते हैं विशेषज्ञ ?

स्पेन स्थित डेल मार हॉस्पिटल के प्रमुख और अध्ययन के लेखक इनमैकुलाडा लोपेज मोंटेसिनो बताते हैं- हमारे निष्कर्ष से पता चलता है कि कोविड-19, इन्फ्लूएंजा से कहीं अधिक घातक है। कुछ रिपोर्ट्स जिस तरह से दावा करते आ रहे हैं कि समय के साथ कोरोना वायरस भी इन्फ्लूएंजा की तरह कम प्रभावी होता जा रहा है, फिलहाल इस अध्ययन में इसका बिल्कुल उल्टा देखने को मिला है। कोविड से बचाव को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है, इसके साथ सभी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज जरूर लगवानी चाहिए। गंभीर मामलों से बचाव में यह आपकी मदद करेगी।

सभी का वैक्सीनेशन होगा तभी मिलेगी कोरोना से सुरक्षा

अध्ययनों में वैक्सीनेशन को कोरोना की गंभीर बीमारी और मृत्यु के जोखिम से बचाने के लिए सबसे आवश्यक बताया जा रहा है। इसी संबंध में जॉन्स हॉपकिन्स की वैज्ञानिक अमिता गुप्ता का कहना है कि भारत में वैक्सीन असमानता एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है। संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख और जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में मेडिसिन के प्रोफेसर अमित गुप्ता कहते हैं, जब तक दुनिया में हर कोई वैक्सीनेटेड नहीं हो जाता तब तक कोई भी कोविड से सुरक्षित नहीं है। 

कोरोना संक्रमण अपडेट भारत

कोविड-19 को लेकर विशेष सतर्कता की आवश्यकता

प्रोफेसर अमित गुप्ता कहते हैं, भारत के साथ विश्व स्तर पर वैक्सीन असमानता बड़ी समस्या बनी हुई है। उदाहरण के लिए, अफ्रीका महाद्वीप में वर्तमान में 20 प्रतिशत से भी कम आबादी को टीका लगाया गया है। जैसे-जैसे प्रतिरक्षा कम होती है, नए कोविड वैरिएंट्स सामने आते हैं। यह समस्या तब तक बनी रहेगी जब तक दुनियाभर में वैक्सीनेशन अभियान को बड़ी तेजी से नहीं चलाया जाएगा। केवल कुछ देशों को पूरी तरह से टीकाकरण करने से कोरोना जैसे वायरस से बचाव नहीं किया जा सकता है।

वैक्सीनेशन के साथ-साथ व्यक्तिगत तौर पर सभी लोगों को कोविड से बचाव के उपायों को प्रयोग में लाते रहने की आवश्यकता है। महामारी को रोकने के लिए पूरी तरह से टीकाकरण करना और बचाव के उपायों को लेकर सख्ती बहुत जरूरी है। 

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