ललित मौर्या

दुनिया के करोड़ों मरीज ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज करा रहे हैं, जहां साफ पानी, सुरक्षित शौचालय और जरूरी सफाई का अभाव उनके लिए संक्रमण का नया खतरा बन सकता है। बीमारी में इंसान अस्पताल इसलिए पहुंचता है ताकि उसे राहत मिले, संक्रमण से सुरक्षा मिले और जीवन रक्षक इलाज मिल सके। लेकिन सोचिए, जिस जगह को बीमारी से बचाने की जिम्मेदारी दी गई है, अगर वहीं साफ पानी, सुरक्षित शौचालय और जरूरी सफाई का भरोसा न हो तो मरीज खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेगा। एक तरफ बीमारी से जंग, दूसरी तरफ इलाज के दौरान संक्रमण का खतरा, दुनिया के करोड़ों लोगों के सामने आज यही कड़वी हकीकत है।

संयुक्त राष्ट्र ने अपनी नई रिपोर्ट ‘प्रोग्रेस ऑन वाटर, सैनिटेशन, हाइजीन, एनवायरनमेंटल क्लीनिंग एंड वेस्ट मैनेजमेंट इन हेल्थ-केयर फैसिलिटीज 2015–2025’ में स्वास्थ्य सेवाओं की इसी चिंताजनक तस्वीर को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 60 फीसदी स्वास्थ्य केंद्र अब भी बुनियादी स्वच्छता मानकों पर खरे नहीं उतरते, जबकि 11 फीसदी में किसी तरह की स्वच्छता सेवा तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब इलाज की पहली शर्त ही साफ-सुथरा और सुरक्षित माहौल है, तो इन हालात में मरीजों को सुरक्षित इलाज कैसे मिलेगा?रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया के करीब 93.6 करोड़ लोगों को सेवा देने वाले स्वास्थ्य केंद्रों में स्वच्छता की कोई बुनियादी सुविधा नहीं थी। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं कि 60 फीसदी स्वास्थ्य केंद्रों में शौचालय बिल्कुल नहीं हैं। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में 89 फीसदी स्वास्थ्य सुविधाओं में किसी न किसी रूप में शौचालय की व्यवस्था है और 85 फीसदी में उपयोग योग्य शौचालय मौजूद हैं। 

सिर्फ शौचालय होना काफी नहीं

लेकिन बुनियादी स्वच्छता मानकों को पूरा करने के लिए शौचालय का केवल मौजूद होना पर्याप्त नहीं है। मानक के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों और कर्मचारियों के लिए सुरक्षित और उपयोग योग्य शौचालय होने चाहिए। उनमें महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग व्यवस्था, दिव्यांगों के लिए पहुंच और मासिक धर्म स्वच्छता की सुविधाएं भी जरूरी हैं। लेकिन दुनिया के करीब आधे स्वास्थ्य केंद्रों में इनमें से एक या अधिक व्यवस्थाओं की कमी है। यानी, अस्पताल में सिर्फ शौचालय होना ही काफी नहीं है; अगर कोई गर्भवती महिला, किशोरी या व्हीलचेयर पर बैठा मरीज उसे आसानी से और सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल ही न कर सके, तो ऐसी सुविधा अपने असली मकसद में अधूरी है। रिपोर्ट में 70 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इसमें क्षेत्रीय असमानता भी साफ दिखाई दी। उदाहरण के लिए उप-सहारा अफ्रीका में केवल 23 फीसदी स्वास्थ्य सुविधाएं बुनियादी स्वच्छता मानक पूरा करती हैं, जबकि मध्य और दक्षिणी एशिया में यह आंकड़ा 55 फीसदी दर्ज किया गया। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर देशों में तो यह आंकड़ा महज 9 फीसदी पर ही सिमट गया है।

न सफाई का स्पष्ट नियम, न प्रशिक्षित कर्मचारी

स्वास्थ्य केंद्रों में पर्यावरणीय सफाई की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। बुनियादी मानक को हासिल करने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों में सफाई से जुड़े स्पष्ट प्रोटोकॉल और प्रशिक्षित सफाई कर्मचारी, दोनों होने चाहिए। लेकिन 18 फीसदी स्वास्थ्य केंद्रों में ये दोनों ही व्यवस्थाएं नहीं मिलीं। यहां न तो उचित सफाई प्रोटोकॉल हैं और न ही प्रशिक्षित सफाई कर्मचारी। चिंता की बात है कि ऐसे केंद्र दुनिया में करीब 150 करोड़ लोगों की आबादी को सेवाएं देते हैं। रिपोर्ट से पता चला है कि देश में 59 फीसदी स्वास्थ्य सुविधाएं  पर्यावरणीय सफाई से जुड़े मानकों को पूरा करती हैं। मतलब कि वहां मरीजों के कमरे, वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, जांच और उपचार क्षेत्र, शौचालय और अन्य स्थानों की सफाई के स्पष्ट नियम और प्रशिक्षित सफाई कर्मचारी मौजूद हैं। लेकिन सबसे कमजोर देशों में हालात कहीं ज्यादा खराब हैं, जहां महज 24 फीसदी स्वास्थ्य केंद्र ही बुनियादी पर्यावरणीय सफाई मानकों को पूरा करते हैं।

जहां इलाज मिलना चाहिए, वहां संक्रमण का नया खतरा क्यों?

रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में करीब 85 फीसदी स्वास्थ्य सुविधाओं में बुनियादी जल सेवा, 72 फीसदी में हाथों की साफ-सफाई की बुनियादी सुविधा और 71 फीसदी में कचरा प्रबंधन की बुनियादी व्यवस्था उपलब्ध थी। फिर भी दुनिया के करीब हर 10 में से एक स्वास्थ्य केंद्र में जल सेवा उपलब्ध नहीं है और लगभग इतने ही केंद्रों में बुनियादी स्वच्छता सेवा का अभाव है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, अस्पतालों का दूषित और अस्वच्छ वातावरण मरीजों को संक्रमण के जोखिम में डालने के साथ-साथ एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के फैलने को भी कारण बन सकता है। ऐसे में सुरक्षित इलाज केवल दवाओं और डॉक्टरों तक सीमित नहीं रह सकता। साफ पानी, सुरक्षित और सुलभ शौचालय, हाथों की साफ-सफाई, प्रभावी पर्यावरणीय सफाई और कचरे का सुरक्षित प्रबंधन स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी जरूरतों में शामिल होना चाहिए।

रिपोर्ट में देशों से केवल ढांचा मौजूद होने की गिनती करने के बजाय यह जांचने की अपील की गई है कि सुविधाएं विश्वसनीय, सुरक्षित, स्वच्छ और सभी के लिए सुलभ हैं या नहीं। मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी स्वास्थ्य केंद्रों में पानी, स्वच्छता, सफाई और अन्य बुनियादी सेवाओं को मजबूत करने के लिए नए राष्ट्रीय मानक, नियमित निगरानी और पर्याप्त वित्तीय योजनाएं बनाने का आह्वान किया था। रिपोर्ट का संदेश बेहद स्पष्ट है, अस्पताल में इलाज सिर्फ डॉक्टर, दवा और ऑपरेशन तक सीमित नहीं। साफ पानी, स्वच्छ वार्ड और सुरक्षित, सुलभ शौचालय भी उतने ही जरूरी हैं। क्योंकि जो व्यक्ति बीमारी से ठीक होने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचा है, उसे वहां संक्रमण का नया खतरा नहीं मिलना चाहिए। मरीज की सुरक्षा और गरिमा कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सेवा की बुनियाद है।

       (‘डाउन-टू-अर्थ’ से साभार )

Spread the information