13.8 अरब साल पीछे जाकर ब्रह्मांड की उत्पत्ति को देखना. यह ख़याल किसी साइंस फिक्शन फ़िल्म को देखने के बराबर लगता है. लेकिन नासा की सबसे शक्तिक्शाली जेम्स बेव स्पेस टेलिस्कोप ने, ब्रह्मांड की पहले कभी नहीं देखी गई, ऐसी तमाम हाई  रंगीन तस्वीरें भेजी है जिसने खगोल विज्ञान में एक नए युग की शुरुआत की है.

“हम 13 अरब से अधिक वर्षों में पीछे मुड़कर देख रहे हैं “

सोमवार  को पहली तस्वीर को रिलीज़ करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने कहा, यह एक ऐतिहासिक दिन है क्योंकि दुनिया के सबसे बड़े और शक्तिशाली टेलिस्कोप ने ब्रह्माण्ड के इतिहास में नई पेशकश की है। यह अमेरिका और पूरी मानवता के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। ” 10 बिलियन डॉलर के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप पिछले साल दिसंबर में लॉन्च किया गया था. इससे ली गई यह पहली छवि समय और दूरी दोनों में अब तक की सबसे दूर की है.  तस्वीर में देख सकते हैं कि यह हजारों आकाशगंगाओं से भरी हुई है , इसमें कुछ धुंधली वस्तुएं देखी गईं, जो नीले, नारंगी और सफेद रंग में रंगी हुईं हैं.

नासा के प्रशासक बिल नेल्सन ने कहा, हम 13 अरब से अधिक वर्षों में पीछे मुड़कर देख रहे हैं। इन छोटे कणों में से एक पर आप जो प्रकाश देख रहे हैं, वह 13 अरब वर्षों से यात्रा कर रहा है। यह इसे बिग बैंग से सिर्फ 800 मिलियन वर्ष छोटा बनाता है। यह एक ऐसा दृश्य है जिसे हमने पहले कभी नहीं देखा है।”

दुनिया का सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप

वेब स्पेस टेलीस्कोप को अमेरिका के फ्रेंच गुयाना से यूरोप के एयरक्राफ्ट Ariane 5 rocket से अंतरिक्ष में भेजा था। एक महीने  की यात्रा करने के बाद यह 15 लाख किलोमीटर का सफर कर अपनी मंजिल पर पहुंचा. इसका दो लक्ष्य है : पहली तो ब्रह्मांड में 13.5 अरब साल से भी पहले से चमकने वाले सबसे पहले सितारों की तस्वीरें लेना और दूसरा लक्ष्य ऐसे ग्रहों की तलाश करना है, जहां जीवन की उम्मीद हो.  इस टेलिस्कोप को नासा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी और कैनेडियन स्पेस एजेंसी ने मिलकर तैयार किया है. इस प्रोजेक्ट पर करीब 75 हजार करोड़ रुपए का खर्च आया है. यह दुनिया का सबसे ताकतवर टेलिस्कोप है , जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप 1990 में अंतरिक्ष में भेजे गए हबल टेलिस्कोप के मुकाबले 100 गुना ज्यादा शक्तिशाली है.

जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप ने भेजी हैरतअंगेज तस्वीरें

पहली तस्वीर के बाद मंगलवार को दूरबीन के शुरुआती बाहरी गेज से आकाशगंगा संबंधी चार और सुंदर छवि जारी की गईं

SMACS 0723

इस तस्वीर में SMACS 0723 नाम के एक आकाशगंगा समूह को देखा जा सकता है। SMACS 0723 आकाशगंगाओं का एक बड़ा-सा समहू है. खगोलशास्त्री इसे ग्रेविटेशनल लेंस कहते हैं क्योंकि इसमें रोशनी का फैलाव दूर-दूर तक होता है. इनमें कुछ स्थानों से रोशनी हमतक 13 अरब वर्ष बाद पहुंची ती है. नासा का कहना है कि इससे आकाशगंगा के साथ ही ब्लैक होल पर भी अच्छे ढंग से रिसर्च की जा सकेगी.

दक्षिणी रिंग (Southern Ring)

नासा द्वारा जारी की गई तीसरी फोटो में सदर्न रिंग नाम के नेबुला के एक तारे को देखा जा सकता है। नेबुला गैस और धूल से बनने वाले बादल होते हैं, जिनके बीच तारों का जन्म होता है। इस नेबुला का यह तारा खत्म होने के कगार पर है, जिससे इसकी ऊर्जा बाहरी परतों पर देखने को मिल रही है। नासा ने सदर्न रिंग नेबुला के बारे में कहा- बुझता हुआ सितारा इस दृश्‍य के केंद्र में है जो गैस के रिंग और धूल को हजारों साल से हर तरफ से छोड़ रहा है। बता दें कि सदर्न रिंग पृथ्वी से करीब 2500 प्रकाश वर्ष दूर है। ये नेइस प्रकार की संरचना को प्लानेटेरी नेबुला कहते हैं लेकिन वास्तव में इसका ग्रहों से कोई ताल्लुक़ नहीं है.

स्टीफंस क्विनटेट (Stephen’s Quintet)

जेम्स वेब टेलिस्कोप से ली गई चौथी फोटो में स्टीफंस क्विनटेट को देखा जा सकता है। यह दुनिया का पहला गैलेक्सी ग्रुप है, जिसे वैज्ञानिकों ने खोजा था। इस समूह में  5 गैलेक्सियां हैं, जो बहुत तेजी से एक दूसरे के बेहद करीब आ रही हैं। ये पांचों आकाश गंगाएं नृत्य की मुद्रा में दिखाई देतीं हैं। ये धरती से 29 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर हैं।इस फोटो में वे गैलेक्सी भी दिख रही हैं, जो बिग बैंग के बाद बनी थीं।

कैरिना नेबुला (Carina Nebula)

पांचवां फोटो है कैरिना नेबुला का। पृथ्वी से 7,600 प्रकाश वर्ष दूर यह ब्रह्मांड के सबसे बड़े नेबुला में से एक है। देखने में यह नेबुला किसी पहाड़ की तरह लग रहा हैं। इस नेबुला में नीचे की ओर धूल के बादल हैं, जबकि ऊपर की तरफ गैस है। इन्हीं गैस के बादलों और कणों से नए तारों का जन्म होता है. जेम्स वेब का एक मकसद ये पता लगाना है कि तारे कैसे बनते हैं. करिना नेबुला इस शोध में काफ़ी मददगार साबित हो सकता है.

WASP-96b ग्रह

छठा फोटो धरती से 1150 प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक ग्रह का है, जिसका नाम WASP-96b है। इस फोटो में ग्रह के वातावरण में मौजूद तरंगों (वेवलेंथ) के बारे में बताया गया है। यहां पर वॉटर वेपर होने की संभावना भी जताई गई है।

यूनिवर्स के कई अनसुलझे रहस्य से पर्दा उठने की संभावना

नासा के इस टेलिस्कोप के जरिए यूनिवर्स के शुरुआती काल में बनी गैलेक्सी, उल्कापिंड और ग्रहों का पता लगाया जा सकता है. दूसरे ग्रहों में रह रहे एलियंस की वास्तविकता के बारे में भी पता लगाने की कोशिश होगी. उम्मीद है कि आने वाले वक्त में कई यूनिवर्स के, कई  रहस्यों पर से पर्दा उठेगा और हम यूनिवर्स की शुरुआत को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे

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