अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा लगभग 50 वर्षों बाद अपने “मैन मिशन” का काम दोबारा शुरू करने जा रहा है। वह 1972 के बाद पहली बार मानव को दोबारा चंद्रमा पर भेजने की तैयारी कर रहा है। इस परियोजना के तहत नासा अपने महत्वाकांक्षी रॉकेट आर्टेमिस – 1 को फ्लोरिडा के लॉन्च पैड से आज सोमवार को लॉन्च करेगा। फिलहाल नासा इस रॉकेट के जरिए एक खाली कैप्सूल को चांद की धरती पर भेजेगा। करीब छह सप्ताह में अपना मिशन पूरा करने के बाद यह धरती पर वापस आ जाएगा। यदि सब कुछ ठीक रहा तो 2025 में नासा पुनः मानव को चांद पर भेजेगा। नासा के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की खास देखरेख भारतीय मूल की सुभाषिणी अय्यर कर रही हैं। 

दरअसल अमेरिका के फ्लोरिडा लॉन्च पैड से आज लॉन्च किए जाने वाला अंतरिक्ष यान आर्टेमिस – 1 चंद्रमा तक जाएगा। वह अपने साथ ले गए कुछ छोटे उपग्रहों को कक्षा में छोड़ेगा एवं खुद उसकी कक्षा में स्थापित हो जाएगा। नासा इसके जरिए चांद पर भविष्य में भेजे जाने वाले मैं मिशन का काम पुनः शुरू करेगा। फिलहाल नासा इस चंद्र यान के जरिए एक खाली कैप्सूल को चंद्रमा की धरती पर भेजेगा। अपना निर्धारित मिशन पूरा कर छह सप्ताह के बाद यह वापस धरती पर लौट आएगा। यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो इस मिशन के जरिए 2025 में मानव को दोबारा चांद पर भेजने का लक्ष्य हासिल हो जाएगा।

आर्टेमिस – 1 नासा के नए स्पेस लॉन्च सिस्टम मेगा रॉकेट और आरियन क्रू कैप्सूल की पहली टेस्ट फ्लाइट होगी। स्पेस लॉन्च सिस्टम ( एस एल एस ) रॉकेट लगभग 42 दिनों के मिशन पर बिना चालक दल वाले आरियन स्पेसक्राफ्ट को लॉन्च करेगा। मिशन के दौरान पृथ्वी पर लौटने से पहले यह चंद्रमा की परिक्रमा करेगा। आर्टेमिस – 1 कई मिशनों में से पहला है। इसमें नासा का नया सुपर – हैवी रॉकेट, स्पेस लॉन्च सिस्टम ( एसएलएस ) लगा है, जिसे पहले कभी लॉन्च नहीं किया गया है। इसके अलावा, ओरियन मल्टी -पर्पस क्रू व्हीकल भी लगा है , जो एक बार पहले अंतरिक्ष में उड़ान भर चुका है। इसमें अधिक शक्तिशाली इंजन लगे हुए हैं तथा इसका मुख्य इंजन आक्सीजन और हाइड्रोजन सिस्टम का सम्मिश्रण है।

इस प्रोजेक्ट की देखरेख कर रही हैं भारतीय मूल की सुभाषिणी अय्यर

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) एक बार फिर चांद पर कदम रखने का सपना देख रही है. नासा के इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट की खास देखरेख भारतीय मूल की सुभाषिनी अय्यर (Subashini Iyer) कर रही हैं. सुभाषिनी नासा के खास प्रोजेक्ट के रॉकेट कोर चरण की देखभाल कर रही हैं, जिसके तहत नासा चांद (Moon) और उससे आगे के अंतरिक्ष (Space) की खोज करना चाहता है. कोयंबटूर की रहने वाली सुभाषिनी का नासा के इस अभियान का हिस्सा होना भारत के लिए गर्व की बात है.

सुभाषिनी बीते दो सालों से स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) की सदस्य हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने 1992 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की थी. इस विषय में ग्रेजुएशन करने वाली वो अपने कॉलेज की पहली महिला थीं. एक अखबार से बात करते हुए सुभाषिनी ने कहा कि इंसान को चंद्रमा पर कदम रखे हुए 50 साल हो गए हैं. हम इंसान को दोबारा चांद और फिर मंगल पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं.

चांद पर पहली महिला और दूसरा पुरुष

बता दें कि नासा के नए रॉकेट स्पेस लॉन्च सिस्टम से ओरियन अंतरिक्ष यान में सवार अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से करीब सवा लाख मील दूर चंद्रमा की कक्षा में भेजा जाएगा. नासा अपने आर्टेमिस चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम तहत चांद के बारे में अधिक से अधिक जानकारियां जुटाने की कोशिश कर रहा है. स्पेस एजेंसी की ओर से चांद को और ज्यादा समझने के लिए दो मिशन लॉन्च किए जाएंगे.

नासा के इन मिशन का नाम आर्टेमिस-1 और आर्टेमिस-2 होगा. आर्टेमिस-1 में क्रू शामिल नहीं होगा और ये एसएसएस रॉकेट और ओरियोन स्पेसक्राफ्ट को चांद पर ले जाएगा. वहीं आर्टेमिस-2 मिशन के तहत अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजा जाएगा. साल 2024 में आर्टेमिस-3 मिशन के तहत नासा की पहली महिला और दूसरे पुरुष को चांद पर उतारने की योजना है.

अंतरिक्ष में सबसे अमीर शख्स

बता दें कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति अमेजॉन के फाउंडर और सीईओ अगले महीने अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अरबपति बन सकते हैं. सोमवार तड़के एक इंस्टाग्राम पोस्ट में बेजोस ने कहा कि वह, उनके भाई और एक नीलानी का विजेता 20 जुलाई के लॉन्च के दौरान ब्लू ओरिजिन के न्यू शेपर्ड अंतरिक्ष यान में सवार होंगे.

यह यात्रा टेक्सास से अंतरिक्ष के लिए एक संक्षिप्त यात्रा होगी. बता दें कि जेफ बेजोस अमेजॉन के सीईओ का पद छोड़ने के 15 दिन बाद स्पेस के लिए उड़ान भरेंगे. वो वर्तमान में दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति भी हैं. ‘ब्लू ओरिजीन’ उनकी स्पेस कंपनी का नाम है, जिसकी पहली मानव सहित स्पेस यात्रा का वो हिस्सा होंगे.

रिसर्च के लिए पांच दशकों तक क्यों किया इंतजार?

अपोलो के इन छह अभियानों में ढेर सारा वैज्ञानिक डाटा और लगभग 400 किलो चांद का सैंपल धरती आया. इनमें चांद से लाए गए कुल 2,196 पत्थरों के सैंपल भी शामिल हैं. मगर आधी सदी बाद भी सभी सैंपलों के शोध का काम पूरा नहीं हुआ है. नासा ने आखिरी बचे कुछ सैंपलों पर अब जाकर काम शुरू किया है. यह देरी जान-बूझकर की गई. नासा ने इन्हें सील करके रखा हुआ था, ताकि आगे चलकर इनपर शोध किया जाए.

लोरी ग्लेज, नासा मुख्यालय में प्लैनेटरी साइंस विभाग की निदेशक हैं. इस बारे में बयान जारी कर उन्होंने बताया, “नासा को पता था कि भविष्य में विज्ञान और तकनीक में तरक्की होगी. इससे वैज्ञानिकों को नए और बेहतर तरीके से उन सैंपलों पर शोध करने में मदद मिलेगी. वे भविष्य में आने वाली चुनौतियों और चिंताओं के मद्देनजर नए पहलुओं पर गौर कर पाएंगे.”

क्या है सैंपल 73001?

शोध के लिए अभी जिस सैंपल को खोला गया है, उसका नाम है- 73001. यह सैंपल 73001 एक 35 सेंटीमीटर लंबा और चार सेंटीमीटर चौड़ा ट्यूब है. इस ट्यूब को चांद की टॉरस-लिट्रो घाटी से पत्थर जमा करने के लिए जमीन में डाला गया था. चांद पर केवल दो ही सैंपल वैक्यूम सील किए गए थे. 73001 उन्हीं में से एक है. अपोलो 17 मिशन पर चांद गए अंतरिक्षयात्री यूजिन सरनेन और हैरिसन स्मित दिसंबर 1972 में इसे धरती पर लाए थे. यह चांद पर गया नासा का अब तक का आखिरी मानव अभियान था.

इस ट्यूब 73001 में गैस या फिर पानी, कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी चीजें हो सकती हैं. अनुमान है कि ट्यूब के भीतर इनकी बहुत कम मात्रा ही मौजूद होगी. नासा इन्हें सुरक्षित हासिल करना चाहता है, ताकि हालिया सालों में बेहद उन्नत हो चुकी स्पेक्ट्ऱॉमट्री तकनीकों की मदद से इनका विश्लेषण किया जा सके. इससे पहले फरवरी 2022 में इस ट्यूब के बाहर सुरक्षा आवरण के रूप में लगी एक अतिरिक्त ट्यूब की परत को हटाया गया था. उसमें चंद्रमा की गैस नहीं थी.

इससे वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि भीतरी ट्यूब में जो चीजें सीलबंद हैं, वे सुरक्षित हैं. लीक नहीं हुई हैं. फिर 23 फरवरी को वैज्ञानिकों ने ट्यूब के मुख्य हिस्से में छेद करके उसके भीतर बंद गैस को हासिल करने की प्रक्रिया शुरू की. इस लंबी प्रक्रिया को पूरा होने में हफ्तों लग सकते हैं. इसके बाद अंदर जमा पत्थर को बहुत सावधानी से निकाला जाएगा. उसे तोड़ा जाएगा. फिर अलग-अलग वैज्ञानिकों का दल उसका विश्लेषण करेगा.

सुलझेगी चांद पर लैंडस्लाइड की पहेली!

चांद की जिस जगह से इस सैंपल 73001 को उठाया गया है, वह भी दिलचस्प है. वहां कभी भूस्खलन हुआ था. इसकी अहमियत बताते हुए अपोलो की डेप्युटी क्यूरेटर जूलियन ग्रॉस कहती हैं, “चांद पर बारिश नहीं होती. इसलिए हमें यह समझ में नहीं आ रहा है कि वहां भूस्खलन क्यों होते हैं.”

ग्रॉस ने बताया कि शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि सैंपल का विश्लेषण करके शायद उन्हें इसका जवाब मिल जाए. 73001 के बाद चांद से लाए गए केवल तीन सैंपल बचेंगे, जो अभी भी सील हैं. उन्हें कब खोला जाएगा, यह पूछे जाने पर सीनियर क्यूरेटर रेयान सिगलर ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि हम और 50 साल इंतजार करेंगे. जब हमें आर्टमिस के सैंपल मिल जाएंगे, तो बेहतर होगा कि हम आर्टमिस में लाए गए सैंपलों की इन बचे हुए सील सैंपलों के साथ तुलना करके देखें.”

मंगल पर इंसान भेजने में मिल सकती है मदद

आर्टमिस चांद पर जाने वाला नासा का अगला मिशन है. एजेंसी 2025 में इंसानों को फिर से चांद पर भेजने की तैयारी कर रही है. आर्टमिस मिशन में नासा पहली बार महिला और अश्वेत अंतरिक्षयात्रियों को चांद पर भेजेगा. इस बार चांद पर अपेक्षाकृत लंबे समय तक रुकने की भी कोशिश की जाएगी. इस अभियान के दौरान चांद से बड़ी मात्रा में गैस के नमूने जमा किए जाएंगे. इन अभियानों में चांद और उसके आसपास के वातावरण से जुड़ी जो जानकारियां मिलेंगी, उन्हें मंगल पर इंसान भेजने की महत्वाकांक्षी योजना को पूरा करने में इस्तेमाल किया जाएगा.

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