भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस से पहले, 13 अगस्त तक दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीतों को भारत में स्थानांतरित करने की योजना में लगभग दो सप्ताह या उससे अधिक समय की देरी हो रही है। नामीबिया में पकड़े गए चीतों को भारत ले जाने से पहले अपना क्वारंटाइन पूरा करना होगा। यही वजह है कि अगस्त के अंत तक ही ये चीते भारत आ सकते हैं।

कुनो नेशनल पार्क (केएनपी) के कर्मचारी और अधिकारी चीतों के लिए बनाए गए 500 हेक्टेयर के घेरे से तेंदुओं को बाहर रखने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

कुनो पार्क में चीतों के लिए बनाए गए जालों और यहां तक ​​कि नौ फुट ऊंचे और 12 किलोमीटर लंबे बाड़ के बावजूद देशी तेंदुएं यहां घूमते पाए गए हैं, जो चीतों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा 2018 की तेंदुए की जनगणना के अनुसार, कुनो नेशनल पार्क में तेंदुओं की आबादी हर सौ वर्ग किलोमीटर में औसतन 9 की है।

कुनो पार्क के संभागीय वन अधिकारी प्रकाश वर्मा ने कहा, “तेंदुओं को पकड़ने और पार्क में दूर स्थानांतरित करने के लिए लगभग 100 कर्मचारी और रेंजर तैनात किए गए हैं, लेकिन अभी तक हम केवल दो को पकड़ने में कामयाब रहे हैं।”

वर्मा ने कहा, “वे जंगली जानवर हैं और हम उनकी रणनीति को समझने की कोशिश कर रहे हैं। तीन तेंदुएं अब तक जाल के भीतर रखे भोजन को खाने के बाद भागने में कामयाब रहे।”

टीम उन स्थानों पर जहां वे प्रवेश कर रहे हैं, वहां अधिक फुट ट्रैप और पिंजरे रखने के लिए कैमरा ट्रैप के माध्यम से तेंदुओं की आवाजाही का अध्ययन कर रही है, लेकिन यह अनुमान लगाना अभी भी मुश्किल है कि इन तीनों को पकड़ने में उन्हें कितना समय लग सकता है।

वर्मा ने बताया कि यह ऐसा कुछ है जो अप्रत्याशित है। यह एक दिन में हो सकता है यदि भाग्य हमारा साथ दे, या इसमें सप्ताह लग सकते हैं। हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं लेकिन उस पर कोई तारीख या समय सीमा नहीं लगा सकते। हमने तेंदुओं को पकड़ने के लिए चार पिंजरे रखे हैं और उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका और भारत के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) अभी भी लंबित है और नामीबिया से चीतों के स्थानान्तरण के लिए परमिट पर भी दोनों देशों द्वारा हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। भारत और नामीबिया ने जुलाई में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक नामीबियाई पर्यावरण मंत्रालय के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि भारत को पहले उन्हें निर्यात परमिट तैयार करने के लिए चीतों के लिए एक आयात परमिट प्रदान करना होगा, जिससे देरी हो रही है। 

चीतों को अफ्रीका से भारत लाए जाने के बाद उनपर छह से आठ महीने तक कड़ी निगरानी रखी जाएगी। चीता पुनर्वास को भारत के घास के मैदानों के संरक्षण के साधन के रूप में भी देखा जा रहा है। ये घास के मैदान कई अन्य प्रजातियों के घर हैं और इसमें  गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और लुप्तप्राय भारतीय भेड़िया सहित कई जीव रहते हैं। विशेषज्ञ सवाल उठाते हैं कि क्या घास के मैदान को बचाने के लिए इतने महंगे निवेश की जरूरत थी।

चीते भारत में आते हैं तो यह दुनिया का पहला अंतर-महाद्वीपीय चीता स्थानान्तरण होगा। यानी एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक चीते को पहली बार पहुंचाया जाएगा। इस योजना के लिए लगभग 224  करोड़ रुपये खर्च होंगे।

चीता दुनिया का सबसे तेज जानवर माना जाता है और इसकी रफ्तार 80 से 128 किमी प्रति घंटा होने का अनुमान है। पतले पैर, लंबी पूंछ और हल्की बनावट की वजह से इनका शरीर इन्हे  इतनी तेज गति हासिल करने के लिए सक्षम बनाता है। 

एक वयस्क चीते का वजन 70 किलोग्राम तक हो सकता है। ये छोटे या  मध्यम आकार के जानवरों का शिकार करते हैं। चीतों को वापस लाने की योजना को अंतिम रूप दिए जाने के बाद, कुनो राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों ने इस जगह को जानवरों के लिए उपयुक्त बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों ने चीतों के रास्ते से कांटेदार झाड़ियों और अन्य आक्रामक प्रजातियों को हटाने के लिए मार्बल घास और थेमेडा घास के साथ-साथ कुछ जंगली फलियां और घास लगाई थी ताकि उन्हें शिकार में आसानी हो।

“कुनो में 7 बाड़े हैं, जो 6 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैले हुए हैं जहाँ जानवरों को उनके गठबंधन के आधार पर रखा जाता है। मान लीजिए कि एक मां अपने शावकों के साथ है, उन्हें एक बाड़े में रखा जाएगा, भाइयों की तरह रहने वाला एक गठबंधन एक साथ दूसरे में डाल दिया जाएगा,” एक अन्य सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर कहा अधिकारियों ने चीतों की निगरानी के लिए कैमरे लगाए हैं। चीतों को वातावरण में ढालने के लिए उनकी सतत निगरानी जरूरी है।

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