बाल मजदूरी के प्रति विरोध एवं जगरूकता फैलाने के मकसद से हर साल 12 जून को निषेध दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के जागरूकता पैदा करने के लिए 2002 में विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत की। संगठन के अनुमान के मुताबिक विश्व में 21 करोड़ 80 लाख बालश्रमिक हैं। जबकि एक आकलन के अनुसार भारत में ये आंकड़ा 1 करोड, 26 लाख 66 हजार 377 को छूता है। 

इस दिन दुनियाभर में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य बाल श्रम पर रोक लगाना भी है. हर साल यह कोशिश रहती है कि 12 जून को विश्व दिवस बाल श्रमिकों की दुर्दशा को उजागर किया जाए. सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों, नागरिक समाज के साथ-साथ दुनिया भर के लाखों लोगों को जागरूक किया जाता है और उनकी मदद के लिए कई कैंपेन भी चलाए जाते हैं. कई बच्चे ऐसे है जो बहुत छोटी उम्र में अपना बचपन खो देते हैं. 5 से 17 साल के बच्चे ऐसे काम में लगे हुए हैं जो उन्हें सामान्य बचपन से वंचित करते हैं और शिक्षा और स्वास्थ्य से दूर हैं.

हर साल रखी जाती अलग थीम
हर साल वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर की थीम डिसाइड की जाती है. 2019 में इसकी थीम ‘बच्चों को खेतों में काम नहीं, बल्कि सपनों पर काम करना चाहिए’  रखी गई थी. ऐसे ही 2020 में इसकी थीम ”बच्चों को कोविड-19 महामारी” रही. कोविड-19 महामारी के फैलने के कारण कई देशों में लॉकडाउन की स्थिति उत्पन्न हुई, इससे कई लोगों की जिंदगी पर असर पड़ा और इस वजह से कई बच्चों की जिंदगी भी प्रभावित हुई है, ऐसी स्थिति में बहुत से बच्चों को बाल श्रम की ओर धकेला भी गया . इस वजह से बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस 2021 की थीम ”कोरोनावायरस के दौर में बच्चों को बचाना” रखी गई. यह दिवस इसलिए भी अहम है क्योंकि यह बच्चों के विकास और उनके हक के लिए आवश्यक चीजों की और ध्यान केंद्रित करता है.

वर्ल्ड डे अगेंस्ट चाइल्ड लेबर का इतिहास
आपको यह भी बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)  ने बाल श्रम खत्म करने के लिए आवश्यक कार्रवाई लिए 2002 में विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का शुभारंभ किया था. हर किसी के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि बच्चों से उनके सपने ना छीने. उनके हाथों में छाले नहीं, कलम और किताब होनी चाहिए. यह हमारे देश का भविष्य हैं और इन्हें बाल श्रम करने से रोकना हम सबका फ़र्ज़ है.

बालश्रम के लिए कानून 
1  बालश्रम निषेध व नियमन कानून 1986 –  इस कानून के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए अहितकर 13 पेशे औ 57 प्रक्रियाओं में , नियोजन को निषिद्ध बनाया गया है।ये सभी पेशे और प्रक्रियाएं कानून की सूची में दिए गए हैं।
2  फैक्ट्री कानून 1948 – यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नियोजन को निषिद्ध करता है। इसके अनुसार 15 से 18 वर्ष तक के किशोर किसी भी फैक्ट्री में तभी नियुक्त किए जा सकते हैं, जब उनके पास किसी अधिक़त चिकित्सक का फिटनेस प्रमाण पत्र हो। इसके साथ ही इस कानून में 14 से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए हर दिन साढ़े चार घंटे की कार्य अवधि‍ रखने के साथ ही रात के वक्त उनके कार्य करने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
3  भारत में के खिलाफ कार्रवाई में महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप 1996 में उच्चतम न्यायालय के उस फैसले से आया, जिसमें संघीय और राज्य सरकारों को खतरनाक प्रक्रियाओं और पेशों में काम करने वाले बच्चों की पहचान करने, उन्हें काम से हटाने और उन्हें गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया था।

 

कोरोना के दौर में और भी मौजूं

इतिहास गवाह है कि जब भी किसी आपदा ने किसी समाज को कमजोर किया है और समाज में आर्थिक विसंगतियों के साथ बाल श्रम जैसी समस्याओं ने भी सिर उठाया है. इसी को देखते हुए कोरोना महामारी के इस लंबे दौर में विश्व बालश्रम निषेध दिवस की अहमियत और भी ज्यादा हो जाती है. इसी को देखते हे इस साल इस बार वीक ऑफ एक्शन यानि सक्रियता का सप्ताह मनाया जा रहा है जो 10 जून से शुरू हो चुका हैकोरोना महामारी में पारिवारिक आय में कमी के कारण बाल श्रमिकों की संख्या में वृद्धि हुई है, इसलिए हमें इस प्रथा को समाप्त करने और बेहतर विकल्प प्रदान करने के लिए और अधिक प्रयास करना चाहिए।

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