संताल में अंग्रेजों के खिलाफ हुए विद्रोह का दिन हूल दिवस पर मंगलवार को इस बार कोई कार्यक्रम नहीं होगा। कोरोना को लेकर जारी गाइडलाइन के मुताबिक प्रशासन की ओर से कार्यक्रम आयोजन पर रोक है। सिर्फ सोशल डिस्टेंसिंग  के साथ प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सकते हैं। इसी  दिन झारखंड के आदिवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाया था यानी विद्रोह किया था, इसी दिन को ‘हूल क्रांति दिवस‘ के रूप में मनाया जाता है। इस युद्ध में करीब 20 हजार आदिवासियों ने अपनी जान दे दी थी……

आजादी की पहली लड़ाई
संताल की हूल क्रांति को आजादी की पहली लड़ाई माना जाता है। 30 जून 1855 को क्रांतिकारी नेता सिदो और कान्हू मुर्मू के आह्वान पर राजमहल के भोगनाडीह में 20 हजार संतालों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह किया था।  शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव की जन्मस्थली भोगनाडीह में हर साल हूल दिवस पर बड़े स्तर पर कार्यक्रम होता रहा है। जिला प्रशासन की ओर से विकास मेला भी लगाया जाता रहा है। मुख्यमंत्री या सरकार का कोई मंत्री मुख्य अतिथि होता था। लेकिन बार कोई कार्यक्रम नहीं होगा।

डीसी वरुण रंजन ने कहा

कोरोना संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार की ओर से किसी प्रकार के धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन व भीड़ जुटाने को प्रतिबंधित किया है। इसका अनुपालन करते हुए जिला प्रशासन के स्तर से कोई कार्यक्रम या सभा का आयोजन नहीं किया जा रहा है। डीसी ने लोगों से अपील की है कि संक्रमण के फैलाव को रोकने एवं अपने परिवार तथा समाज की सुरक्षा के लिए प्रशासन का सहयोग करते हुए अपने घरों से न निकलें। 

वंशज परिवार ने की भी अपील : उधर, सिदो-कान्हू वंशज परिवार ने तमाम लोगों से अपील की है कि सिदो-कान्हू, चांद भैरव मुर्मू के वंशज रमेशर मुर्मू की हत्या हो जाने की वजह से 30 जून को हूल दिवस पर भोगनाडीह में अपने पूर्वज की प्रतिमा पर माल्यार्पण या नमन नहीं करने की अपील की है। वंशज के मंडल मुर्मू ने बताया कि संताल आदिवासी समाज में मृत व्यक्ति के आत्मा की शांति के लिए जब तक भंडान या श्राद्ध नहीं हो जाता है, उस परिवार में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। 

 

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