डी एन एस आनंद

17 से 20 अगस्त तक कोल्हान क्षेत्र के चार केन्द्रों पर आयोजित दूसरा झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल निर्धारित लक्ष्य हासिल करने में सफल रहा। इसका आयोजन क्रमशः 17 सितंबर को जमशेदपुर, 18 को पटमदा, 19 को चाईबासा एवं 20 सितंबर को चांडिल में किया गया। प्रतिकूल परिस्थितियों एवं न्यूनतम साधन सुविधाओं के बीच संपन्न दूसरा झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल ने न सिर्फ नए दर्शकों, समूहों से जोड़ा बल्कि झारखंड के मोस्ट सीनियर एवं बेहद युवा फिल्म मेकर्स की भागीदारी ने इसे जीवंत एवं प्रभावशाली बना दिया।

 


सच कहूं तो साइंस फार सोसायटी झारखंड एवं वैज्ञानिक चेतना साइंस पोर्टल द्वारा आजादी के 75 वें वर्ष के उपलक्ष्य में जन संवाद एवं जन विज्ञान अभियान में विज्ञान/ जन मुद्दा आधारित फिल्मों के प्रयोग ने कई नए अनुभव दिए हैं। सोसायटी द्वारा राज्य के लोगों में वैज्ञानिक जागरूकता पैदा करने एवं अंधविश्वास, पिछड़ापन एवं अवैज्ञानिक सोच मुक्त झारखंड के निर्माण के लिए किया गया यह प्रयास जन विज्ञान अभियान को बल दे गया। आयोजन के अंतिम दिन 20 अगस्त को स्मृति दिवस पर डॉ नरेन्द्र दाभोलकर का स्मरण एवं उनके सपनों को आगे बढ़ाने एवं मंजिल तक पहुंचाने का संकल्प इसे खास बना गया।

 

17 सितंबर को हुई शुरुआत

चार दिवसीय कोल्हान साइंस फिल्म फेस्टिवल का उद्घाटन 17 सितंबर को जमशेदपुर के करीम सिटी कॉलेज के बेहतरीन आडिटोरियम में हुआ। साइंस फार सोसायटी झारखंड एवं करीम सिटी कॉलेज, मास कम्युनिकेशन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मांस कम्युनिकेशन एवं साइंस फैकेल्टी के छात्र छात्राओं की अच्छी भागीदारी उल्लेखनीय रही। मास कम्युनिकेशन विभाग की प्रभारी डॉ नेहा तिवारी एवं प्रिंसिपल मो. रियाज की खास पहल एवं फैकल्टी मेंबर्स की भागीदारी ने इसे बेहद प्रभावशाली बना दिया। कई फिल्मों का प्रदर्शन, बाहर के युवा फिल्म मेकर्स की उपस्थिति एवं चर्चा में भागीदारी तथा करीम सिटी कॉलेज मास कम्युनिकेशन विभाग के छात्र छात्राओं द्वारा निर्मित फिल्मों के प्रदर्शन ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। इस क्रम में देश के चर्चित विज्ञान फिल्म मेकर्स श्री राकेश अंदानिया का आनलाइन कम्युनिकेशन सत्र ने इसे और प्रभावशाली बना दिया।

18 अगस्त पटमदा बना केंद्र

ग्रामीण क्षेत्रों में साइंस फिल्म फेस्टिवल के विस्तार को ध्यान में रखते हुए जमशेदपुर शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर प्रखंड मुख्यालय पटमदा को एक केंद्र के रूप में चिह्नित किया गया था। आयोजन स्थल बना पटमदा इंटर कॉलेज, पटमदा, जल्ला। जरूरी ढांचा गत सुविधाओं के अभाव में भी वहां के प्रिंसिपल डॉ पी के महतो एवं सहयोगी टीम ने वस्तुत: असंभव लगने वाले लक्ष्य को संभव कर दिखाया। लगातार बारिश एवं बिजली संकट की चुनौतियां थीं। बड़े हॉल के अभाव में लगभग बंद पड़े फिजिक्स के लेबोरेटरी में फिल्म दिखाना तय हुआ। 18 को कॉलेज में मनसा पूजा की छुट्टी पड़ गई। बारिश तो लगातार हो ही रही थी। इन प्रतिकूल परिस्थितियों में भी छात्र छात्राओं एवं स्टाफ की अच्छी भागीदारी ने पटमदा में इतिहास रच दिया। क्योंकि उस क्षेत्र में पहली बार किसी साइंस फिल्म फेस्टिवल का आयोजन हो रहा था। वहां फिल्म प्रदर्शन के अलावा बाहर से आए फिल्म मेकर्स ने भी अपनी बातें रखीं एवं लोगों के सवाल के जबाव दिए। अंततः कॉलेज परिवार के सहयोग से कार्यक्रम सफल रहा।

 

18 अगस्त चाईबासा अभियान

ऐतिहासिक कोल्हान क्षेत्र का मुख्यालय चाईबासा का अभियान भी कम चुनौती पूर्ण नहीं था। जमशेदपुर शहर से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित है चाईबासा। वहां आयोजन के लिए नए मित्रों, सहयोगियों को ढूंढने की चुनौती भी थी। सहयोगी बना आदिवासी हो समाज महासभा। उनके साथ संयुक्त तत्वावधान में आयोजन स्थल बना टाटा कॉलेज चाईबासा का बिरसा आडिटोरियम। बारिश की परेशानी कायम थी। उस दिन कॉलेज में छुट्टी ने परेशानी और बढ़ा दी। लेकिन आयोजक टीम एवं सहयोगी दोस्तों के हौसले बुलंद थे। वे किसी भी हालत में फिल्म फेस्टिवल के आयोजन के लिए प्रतिबद्ध थे। झारखंड के दो प्रमुख एवं वरिष्ठ फिल्मकार प्रबल महतो एवं श्रीप्रकाश जी की अहम मौजूदगी ने लोगों में उत्साह भर दिया। नतीजतन प्रतिकूल परिस्थितियों एवं अपेक्षाकृत कम उपस्थिति के बावजूद आयोजन गरिमामय तरीके से संपन्न हुआ। कुछ महत्वपूर्ण सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने भविष्य में चाईबासा एवं कोल्हान में जन मुद्दा आधारित फिल्मों के प्रदर्शन एवं जन विज्ञान अभियान को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया।

20 अगस्त को चांडिल मुहिम

20 अगस्त, तीसरा झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल का समापन दिवस। यह दिन खास था क्योंकि वह प्रसिद्ध विज्ञान संचारक डॉ नरेन्द्र दाभोलकर का स्मृति दिवस भी था। कार्यक्रम का वेन्यू था जमशेदपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर सिंहभूम कॉलेज चांडिल। बारिश का सिलसिला जारी था। बिजली और नेटवर्क की समस्या अलग से थी। प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ बी एन प्रसाद के सहयोग एवं समर्थन ने एक कठिन एवं चुनौती पूर्ण आयोजन को अंततः संभव कर दिखाया। आयोजन में उपस्थित लोगों ने उस दिन डॉ नरेन्द्र दाभोलकर को शिद्दत से याद किया तथा लोगों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास व तर्कशील वैज्ञानिक चेतना संपन्न समाज के निर्माण का संकल्प लिया।

फेस्टिवल की समीक्षा बैठक

आयोजन के खट्टे मीठे अनुभवों को साझा करने के लिए 13 सितंबर को आनलाइन फिल्म फेस्टिवल की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कोल्हान फिल्म फेस्टिवल में शामिल लोगों ने आयोजन की खामियों एवं उपलब्धियों की बेबाक चर्चा की। कई महत्वपूर्ण सुझाव एवं प्रस्ताव भी सामने आए। साइंस फार सोसायटी झारखंड आगामी आयोजनों में इन खामियों को दूर करने एवं एक बेहतर एवं प्रभावशाली आयोजन का हर संभव प्रयास करेगी। इस क्रम में उल्लेखनीय है कि साइंस फार सोसायटी झारखंड एवं वैज्ञानिक चेतना साइंस वेब पोर्टल का तीसरा झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल उत्तरी छोटानागपुर कमिश्नरी केंद्रित होगा। तथा स्टील सीटी बोकारो, कोयलांचल धनबाद एवं महान वैज्ञानिक सर जे सी बोस का गृह नगर गिरिडीह अगले फिल्म फेस्टिवल का केंद्र बनेगा।

डी एन एस आनंद
महासचिव, साइंस फार सोसायटी, झारखंड
संपादक, वैज्ञानिक चेतना, साइंस वेब पोर्टल, जमशेदपुर, झारखंड

 

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