दिवाली उत्सव का समय होता है, यह वह समय होता है जब हम अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलते हैं। इस पर्व पर चारो ओर मनोरंजन और प्रेम का माहौल होता है। लेकिन इन खुशियों के बीच एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात भूल जाते हैं कि उत्सव के नाम पर अंधाधुंध पटाखे जलाना हमारी माँ तुल्य प्रकृति के लिए कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न करता है। यही कारण है कि दिवाली के दौरान और इसके पश्चात प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ जाता है।

ग्लोबल वार्मिंग की समस्या वायुमंडल में हानिकारक गैसों की बढ़ती मात्रा का परिणाम है। दिवाली पर पटाखे जलाने का भी बिल्कुल वैसा ही प्रभाव होता है। इन पटाखों को जलाने से उत्सर्जित धुआं बेहद खतरनाक होता है तथा यह वायुमंडल में हानिकारक गैसों के स्तर में काफी भाषण वृद्धि करता हैं। जिससे ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव में वृद्धि हो रही है।

वाहन प्रदूषण और औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करना काफी मुश्किल है, वही दूसरी तरफ दिवाली पर पटाखों द्वारा उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को हम आसानी से नियंत्रित कर सकते हैं क्योंकि पटाखे जलाना सड़को पर वाहन चलाने और कारखानों में वस्तुओं के उत्पादन जितना महत्वपूर्ण नही है।

दीपावली पर होने वाले प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग में होने वाली वृद्धि

कई बार लोग इस बात पर बहस करते हैं कि आखिर दिवाली पर पटाखे ना जलाने से कौन सा विशेष प्रभाव पड़ेगा। ज्यादातर लोगों का मानना है कि दिवाली के एक दिन पटाखे जलाने से हमारे ग्रह के वातावरण पर कोई खास प्रभाव नही पड़ेगा, लेकिन यह सत्य नही है। आकड़ो से पता चलता है कि दिवाली के दिन पटाखे जलाने के कारण कई सारी गड़ियों के सड़क पर कई दिनों तक के चलने के बराबर का प्रदूषण उत्पन्न होता है। इसलिए यह ग्लोबल वार्मिंग की मात्रा में भी प्रतिवर्ष काफी वृद्धि करता है।

ध्वनि प्रदूषण

दीपावली के दौरान ध्वनि प्रदूषण अपने चरम पर होता हैं। पटाखे सिर्फ उजाला ही नही बिखरते है बल्कि इसके साथ ही वह काफी मात्रा में धुआ और ध्वनि प्रदूषण भी उत्पन्न करते हैं। जोकि मुख्यतः बुजुर्गों, विद्यार्थियों, जानवरों और बिमार लोगों के लिए कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न करता है। पटाखों की तेज आवाजे काफी परेशान करने वाली होती हैं। पटाखों के तेज धमाकों के वजह से जानवर इससे ज्यादा बुरे तरीके से प्रभावित होते हैं।

भूमि प्रदूषण

जले हुए पटाखों के बचे हुए टुकड़ो के कारण भूमि प्रदूषण की समस्या भी उत्पन्न होती है और इन्हे साफ करने में कई दिन समय लगता है। इनमें से कई टुकड़े नान बायोडिग्रेडिल होते है और इसलिए इनका निस्तारण करना इतना आसान नही होता है तथा समय बितने के साथ ही यह और भी जहरीले होते जाते हैं और भूमि प्रदूषण की मात्रा में वृद्धि करते हैं।

पटाखों के द्वारा उत्पन्न होने वाला भयंकर धुआं

पटाखे जलाने के कारण भारी मात्रा जहरीला धुआं उत्पन्न होता है। पटाखे जलाने से उत्पन्न यह धुआं कारखानों और गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से भी अधिक खतरनाक होता है। यह वायुमंडल को काफी बुरे तरीके से प्रभावित करता है और कई सारे वायु जनित बीमारियों का कारण बनता है। इस हानिकारक धुएं के कारण लोगो में श्वास संबंधित के साथ ही अन्य कई बीमारियां भी उत्पन्न होती है। इसके साथ ही पशु-पक्षी और अन्य कई जीव-जन्तु पटाखों द्वारा उत्पन्न होने वाले हानिकारक धुएं से बुरी तरीके से प्रभावित होते है।

छोटे कदम – बड़े परिवर्तन ला सकते हैं

पटाखों को फोड़ने से न सिर्फ हवा की गुणवत्ता में बिगड़ती है बल्कि यहहमारे स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। तो भला हमें ऐसी गतिविधि में क्यों शामिल होना चाहिए,जिससे पर्यावरण के साथ-साथ हमारे जीवन पर भी इतने गंभीर दुष्प्रभाव पड़ते हो?

पटाखों के बिना दीवाली मनाकर हम वातावरण को स्वस्थ्य करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। दिवाली एक सुंदर और मनमोहक त्यौहार है। कई सारे रिवाज और परंपराएं इस त्यौहार का एक हिस्सा हैं। इस दिन लोग पारंपरिक कपड़े पहननेऔरअपने घरों को सजाने और रोशन करने का काम करते हैं तथा अपने प्रियजनों के साथ ताश खेलने, घर पर मिठाई तथा रंगोली बनाने जैसे मनोरंजक कार्यों में हिस्सा लेते हैं।और इस सूची से आतिशबाजी को हटाने के बाद भीहमारे मनोरंजन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। लेकिन हमारा यह फैसला पर्यावरण के लिए बहुत अच्छा साबित होगा। हमें स्वंय पटाखे फोड़ने बंद करने के साथ ही हमारे आस-पास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना होगा। इसके साथ ही हमें बच्चों को भी विशेष रूप से पर्यावरण पर पटाखों के हानिकारक प्रभावों के बारे में शिक्षित करना चाहिए। हमारे तरफ से किये गये यह छोटे-छोटे प्रयास बड़ा अंतर ला सकते हैं।

दिवाली एक बहुत ही खूबसूरत त्योहार है और हमे पटाखों के उपयोग को ना कर कर इसकी खूबसूरती और पवित्रता को ऐसे ही बनाए रखना चाहिए। हम सभी को पर्यावरण की रक्षा के लिए पटाखों को ना कहना चाहिए क्योंकि प्रदूषण मुक्त दिवाली ही मनुष्य और पर्यावरण के लिए सबसे उत्तम उत्सव हो सकता है।

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