स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह ब्रेन स्ट्रोक अवरुद्ध हो जाने के कारण स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। रक्त का प्रवाह सही से न हो पाने के कारण मस्तिष्क कोशिकाओं को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाता है जिससे कई तरह की गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थितियों में मस्तिष्क में रक्त वाहिका लीक या फट सकती है, इसे रक्तस्रावी स्ट्रोक कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक खान-पान में सुधार करके इस खतरे से बचा जा सकता है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि ब्रेन स्ट्रोक से बचने के लिए किन चीजों से परहेज करना आवश्यक होता है। 

तमाम अध्ययनों से पता चलता है कि हमारी जीवशैली और खान-पान की आदतों का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। खान-पान में पौष्टिकता की कमी के कारण कई प्रकार के रोगों के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। ब्रेन स्ट्रोक ऐसी ही तेजी से उभरती हुई एक समस्या है, जिसके लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ जीवनशैली और खान-पान में गड़बड़ी को मुख्य कारण मानते हैं। हार्ट एंड स्ट्रोक फाउंडेशन के अनुसार साल 2016 में 91 हजार से अधिक कनाडाई लोगों की मौत स्ट्रोक या हृदय रोगों के कारण हुई। यह हर सात सेकंड में एक मौत के बराबर है।

ट्रांस फैट वाले प्रोसेस्ड फूड
प्रोसेस्ड या जंक फूड और तले हुए खाद्य पदार्थों में आमतौर पर बहुत अधिक ट्रांस फैट होता है। ट्रांस फैट को सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक प्रकार का फैट माना जाता है क्योंकि यह शरीर में सूजन को बढ़ाता है। शरीर में सूजन को कई गंभीर बीमारियों का कारक माना जाता है। ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है। 

बहुत अधिक नमक का सेवन
बहुत अधिक मात्रा में नमक खाने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा सबसे अधिक होता है। पैकेज्ड फूड में भी नमक की मात्रा अधिक पाई जाती है, इसका ज्यादा सेवन करना हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा देता है। भोजन में नमक की मात्रा को सामान्य रखकर रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

रेड मीट का ज्यादा सेवन है नुकसानदायक
स्ट्रोक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि रोजाना रेड मीट का सेवन करने वाले लोगों में स्ट्रोक का खतरा 42 प्रतिशत अधिक हो सकता है। रेड मीट में सेचुरेट्ड फैट की मात्रा अधिक होती है, ऐसे में इसका सेवन हृदय रोग और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा देता है। शोधकर्ताओं ने दस साल तक 35,000 स्वीडिश महिलाओं पर किए गए अध्ययन के आधार पर इस बात की पुष्टि की है। 

सोडा पीना हो सकता है हानिकारक
अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक स्ट्रोक के जोखिम को कम करने के लिए सोडा पीना कम कर देना चाहिए। अध्ययनों से पता चलता है कि सोडा या सॉफ्ट ड्रिंक का ज्यादा सेवन करने वाले लोगों में स्ट्रोक होने का जोखिम अन्य लोगों की तुलना में 40 फीसदी अधिक होता है। सोडा या सॉफ्ट ड्रिंक का अधिक सेवन डायबिटीज के खतरे को भी बढ़ा देता है।

 

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