कोविड-19 महामारी के लगातार बढ़ते मामलों और देश भर में हो रही स्कूलों की तालाबंदी को लेकर वर्ल्ड बैंक का चौंकाने वाला दावा सामने आया है। विश्व बैंक के अनुसार, कोरोना वायरस के जानलेवा संक्रमण का स्कूलों को खोलने या बंद करने से कोई लेना-देना नहीं है। विश्व बैंक के शिक्षा निदेशक ने कहा कि कोविड-19 के मद्देनजर अब स्कूलों को बंद रखने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि स्कूलों को फिर से खोलने से कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि हुई है। जब रेस्त्रां, होटल, बार और शॉपिंग मॉल्स खुले हुए हैं, तो स्कूल बंद करने का कोई आधार नहीं है।

किशोरों के टीकाकरण तक इंतजार करना अज्ञानता

विश्व बैंक के वैश्विक शिक्षा निदेशक जैमे सावेद्रा ने कहा कि महामारी को देखते हुए स्कूलों को बंद रखने का अब कोई औचित्य नहीं है और अगर नई लहरें भी आती हैं तो भी स्कूलों को बंद करना एक अंतिम उपाय होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक नीति के नजरिए से बच्चों के टीकाकरण तक इंतजार करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि इसके पीछे कोई विज्ञान नहीं है।
रेस्तरां, बार और शॉपिंग मॉल खुले हैं और स्कूल बंद हैं
उन्होंने  कहा, रेस्तरां, बार और शॉपिंग मॉल को खुला रखने और स्कूलों को बंद रखने का कोई मतलब नहीं है। कोई बहाना नहीं है। विश्व बैंक के विभिन्न सिमुलेशन के अनुसार, अगर स्कूल खोले जाते हैं तो बच्चों के लिए स्वास्थ्य जोखिम कम होता है और बंद होने की लागत बहुत अधिक होती है। 
बच्चे संक्रमित हो सकते हैं लेकिन मृत्यु और गंभीरता का जोखिम कम
विश्व बैंक के वैश्विक शिक्षा निदेशक जैमे सावेद्रा ने कहा कि हम यह देखने में सक्षम हैं कि क्या स्कूलों के खुलने से वायरस के संचरण में कोई प्रभाव पड़ा है और नए डाटा से पता चलता है कि ऐसा नहीं होता है। कई काउंटियों में भी लहरें थीं जब स्कूल बंद थे तो जाहिर है कि कुछ में स्कूलों की कोई भूमिका नहीं थी। भले ही बच्चे संक्रमित हो सकते हैं और ओमिक्रॉन के साथ यह और भी अधिक हो रहा है, लेकिन बच्चों में मृत्यु और गंभीर बीमारी अत्यंत दुर्लभ है। बच्चों के लिए संक्रमण का जोखिम कम हैं, जबकि स्कूल बंद रहने से नुकसान ज्यादा है।  
भारत में 70% बच्चों पर स्कूल बंद होने का असर
वर्ल्ड बैंक के अध्ययन के अनुसार पिछले दो साल के दौरान भारत में स्कूल बंद होने से 10 साल तक के 70 फीसदी बच्चों की सीखने की क्षमता पर असर पड़ा हैं। इसे लर्निंग पावर्टी कहा जाता है। इसमें 10 साल तक के बच्चों को सामान्य वाक्यों को भी पढ़ने और लिखने में मुश्किलें आती हैं।
दुनिया के 100 से अधिक देशों में फिर खुले स्कूल
यूनीसेफ के दिसंबर, 2021 में जारी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में लगभग 100 से अधिक देशों में स्कूल फिर से खुल गए हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और जापान मेंं हुए शोध के अनुसार स्कूल खोलने से संक्रमण फैलाव पर बहुत कम असर पड़ता है। मैक्सिको, फिलीपींस जैसे कुछ ही देश हैं जिन्होंने ओमिक्रॉन संक्रमण की लहर के दौरान स्कूलों को बंद किया है। कोरोना काल के दौरान स्कूल बंद होने से दुनिया भर में लगभग 30 करोड़ बच्चे प्रभावित हुए थे।
इकोनॉमी को 30 लाख करोड़ रुपए का घाटा
स्कूल बंद हाेने के क्रम से बच्चों की पढ़ाई पर बहुत अधिक असर पड़ता है। वर्ल्ड बैंक के एक अनुमान के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था को इससे आने वाले समय में लगभग 30 लाख करोड़ रुपए का घाटा होने की आशंका है। बच्चों की भविष्य की कमाई पर इसका विपरीत असर पड़ता हैं।
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