कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रॉन देश के कई राज्यों में फैल चुका है साउथ अफ्रीका में पाए गए कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन ने दुनिया भर में जैसे डर का माहौल पैदा कर दिया है इसे डेल्टा प्लस वेरिएंट से भी ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है अब तक यह वेरिएंट  करीब 100 देशों में पहुंच चुका है और तमाम कोशिशों के बाद भी फैल रहा है . कोरोना महामारी (Corona Pandemic) की रोकथाम और इस वायरस (Coronavirus) की प्रकृति को लेकर देश और दुनिया के वैज्ञानिक लगातार रिसर्च कर रहे हैं. अमेरिका में हुई एक स्टडी में यह पाया गया है कि कोरोना वायरस कुछ दिनों के अंदर मानव शरीर में मस्तिष्क, ह्रदय और शरीर के सभी अंगों तक पहुंच सकता है, जहां पर यह वायरस कई महीनों तक भी मौजूद रह सकता है. शरीर और मस्तिष्क में इस वायरस के डिस्ट्रीब्यूशन और उपस्थिति को लेकर अमेरिका के वैज्ञानिकों (US Researchers) ने एक व्यापक समीक्षा की है .

यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ के साइंटिस्ट ने कहा कि, उन्होंने अपने अध्ययन में पाया है कि यह वायरस रेस्पेरेटरी सिस्टम के अलावा भी रोगजनक मानव कोशिकाओं में रेप्लिकेटिंग यानि प्रतिरूप बनाने में सक्षम है. इस स्टडी के नतीजे शनिवार को ऑनलाइन जारी किए गए, जिसे जरनल नेचर में छापा जाएगा.


कई अंगों को प्रभावित कर सकता है वायरस
इस स्टडी के जरिए इन वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की है कि किस तरह से यह वायरस शरीर के अंदर कई दिनों तक मौजूद रहता है. ताकि मरीजों के बेहतर इलाज में मदद मिल सके. अमेरिका के एक महामारी विशेषज्ञ ने कहा कि यह स्टडी बहुत ही विस्मरणीय काम है. जिसके जरिए यह पता चला है कि कोरोना वायरस शरीर के अंदर रहकर किस तरह हमारे अंगों को प्रभावित करता है. हालांकि इस स्टडी से जुड़े नतीजों को अभी तक इंडिपेंडेंट साइंटिस्ट ने नहीं पढ़ा है. इस अध्ययन में ज्यादातर डाटा घातक कोविड-19 केसों से जुड़ा है. कोरोना वायरस की प्रकृति फेफड़ों के अलावा शरीर की अन्य कोशिकाओं में संक्रमित करने की है, कई अध्ययन में इस बात के प्रमाण मिले हैं.

इस रिसर्च से जुडी कुछ ख़ास बातें…….

  • क्यों इतना ज्यादा है लॉन्‍ग कोविड का खतरा ? 

ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, स्‍टडी में वैज्ञान‍िकों ने कहा है कि यह बात साफ हो चुकी है कि कोरोनावायरस एक से दूसरे अंग में पहुंचता है. यही कारण है कि मरीज लॉन्‍ग कोविड से जूझते हैं और उनमें लम्‍बे समय तक इसके लक्षण भी दिखते हैं. ऐसे मरीजों में सिर्फ रेस्पिरेट्री सिस्‍टम ही नहीं प्रभावित होता, बल्कि दूसरे अंगों पर भी इसका असर दिखता है.

  • शरीर में 230 दिनों तक रहता है  ये वायरस

रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोनावायरस शरीर के अलग-अलग हिस्‍सों जैसे हार्ट और ब्रेन में पहुंचकर अधिकतम 230 दिनों तक बना रह सकता है. इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों कोरोना की पहली लहर में मरने वाले 44 मरीजों पर स्‍टडी की. ये ऐसे मरीज की जिनकी संक्रमण के पहले हफ्ते में ही मौत हो गई थी. इन मरीजों की अटॉप्‍सी करके इनके हार्ट, फेफड़े, छोटी आंत और एड्रि‍नल ग्‍लैंड के  टिश्‍यूज से सैम्‍पल लिए गए. इन सैम्‍पल्‍स की जांच की गई.

  • शुरुआती  दौर से ही पूरे शरीर में फैल सकता है संक्रमण 

शोधकर्ताओं का कहना है, रिसर्च में यह बात सामने आई है कि वायरस का सबसे ज्‍यादा लोड सांस की नली और फेफड़े में होता है. संक्रमण के शुरुआती दौर में ही वायरस पूरे शरीर में फैलना शुरू कर सकता है. यह कोश‍िकाओं को संक्रमित करके दिमाग तक पहुंच सकता है. 

  • क्या है लॉन्‍ग कोविड की वजह 

वैज्ञानिकों ने शरीर के अलग-अलग हिस्‍से में वायरल लोड का पता लगाने के लिए टिश्‍यू प्रिजरवेशन तकनीक का प्रयोग किया. वैज्ञानिकों का कहना है, लम्‍बे समय से हम यह पता लगाने में जुटे थे कि क्‍यों लॉन्‍ग कोविड का असर पूरे शरीर पर पड़ता है. इसे समझा जा सका है.

  • लॉन्‍ग कोविड कितना खतरनाक 

लॉन्‍ग कोविड की कोई आध‍िकारिक परिभाषा नहीं है. विशेषज्ञ कहते हैं, कोविड से संक्रमण होने और रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी मरीज कई महीनों तक इसके असर से जूझते हैं. इसे ही लॉन्‍ग कोविड कहते हैं. जैसे- कोविड से उबरने के बाद भी महीनों तक थकान महसूस होना, भी लॉन्‍ग कहते हैं. लॉन्ग कोविड से जूझ रहे दो लोगों के लक्षण बिल्कुल अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन, कॉमन लक्षण है थकान। सांस लेने में दिक्कत, खांसी, जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों का दर्द, सुनने और देखने की समस्याएं, सिरदर्द, गंध और स्वाद न आना।

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