सुनीता नारायण

हमें जंगलों एवं संरक्षित क्षेत्रों में जैव संसाधनों के साथ-साथ , स्थानीय और स्वदेशी ज्ञान की रक्षा एवं विकास की भी जरूरत है.जैव विविधता संरक्षण आज के समय की जरूरत है और यह तब स्पष्ट हो गया था, जब 1992 में कन्वेंशन ऑफ बायोलॉजिकल डायवर्सिटी को लेकर दुनिया भर में सहमति बनी थी।

यह भी स्पष्ट था कि जैव संसाधनों के संरक्षण, विशेष रूप से इसके उपयोग के लिए स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता है। उन्हें अपने संसाधनों और ज्ञान के उपयोग से अर्जित लाभ का एक हिस्सा मिलना चाहिए था।

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