हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने पिछले महीने बताया था कि उसकी कोविड-19 इंट्रानेजल वैक्सीन तीसरे फेज के ट्रायल में सुरक्षित पाई गई है। इस परीक्षण में करीब 4000 लोग शामिल हुए थे। इस वैक्सीन का नाम BBV154 है।

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में एक और हथियार मिल गया है। भारत बायोटेक की नाक से दी जाने वाली कोविड-19 वैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है। यह वैक्सीन 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को अब दी जा सकती है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ट्वीट कर देश को यह खुशखबरी दी। भारत के औषधि महानियंत्रक (DGCI) ने मंगलवार को भारत बायोटेक की ओर से तैयार की गई इंट्रानेजल कोविड टीके के सीमित आपात इस्तेमाल की मंजूरी दे दी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ट्वीट किया, ‘भारत की कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई को बड़ा प्रोत्साहन मिला है। भारत बायोटेक के सीएचएडी36- सार्स-कोव-एसकोविड-19 (चिम्पैंजी एडिनोवायरस वेक्टर्ड) नेजल टीके को आपात स्थिति में 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के प्राथमिक टीकाकरण में इस्तेमाल की मंजूरी भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने दी है।

उन्होंने कहा कि इस कदम से महामारी के खिलाफ हमारी ‘सामूहिक लड़ाई’ को और मजबूती मिलेगी। मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अपने देश के विज्ञान, अनुसंधान और विकास का उपयोग किया है। उन्होंने कहा, ‘विज्ञान आधारित रुख और सबके प्रयास से हम कोविड-19 को हरा देंगे।’

कंपनी के सूत्रों ने बताया कि हैदराबाद की कंपनी ने करीब 4000 स्वयंसेवकों पर नेजल (नाक के जरिए लिए जाने वाले टीके) का क्लीनिकल परीक्षण किया है और किसी में दुष्प्रभाव या विपरीत प्रतिक्रिया नहीं देखी गई है। कंपनी ने कहा, ‘इंट्रानेजल टीका, बीबीआई154 श्वांस मार्ग के ऊपरी हिस्से में एंटीबॉडी पैदा करता है, जिससे कोविड-19 के संक्रमित करने और प्रसार करने की संभावित क्षमता कम करने में मदद मिलती है।’

एक बार ही देना होगा डोज

भारत बायोटेक के फाउंडर डॉ. कृष्णा एल्ला के मुताबिक, नेजल वैक्सीन को एक बार देना होगा। अब तक हुई रिसर्च में यह बेहतर विकल्प साबित हुई है। इसके लिए हमनें वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के साथ करार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैक्सीन के ट्रायल में करीब 45 वॉलंटियर्स का चुनाव किया जाएगा।

क्यों खास है नेजल वैक्सीन?

देश में अब तक भारत बायोटेक की ‘कोवैक्सीन’ और सीरम इंस्टीट्यूट की ‘कोविशील्ड’ को इमरजेंसी में इस्तेमाल करने की अनुमति मिली है। कोरोना की वैक्सीन का डोज हाथ पर इंजेक्शन लगातार दिया जा रहा है, लेकिन नेजल वैक्सीन नाक में स्प्रे के जरिए दी जाएगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि नाक के जरिए कोरोना शरीर में एंट्री करता और हालत बिगाड़ता है, इसलिए नेजल स्प्रे असरदार साबित हो सकती है।

कोरोना के खिलाफ कितनी कारगर है नेजल वैक्सी

वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन के रिसर्च के अनुसार नेजल वैक्सीन को सामान्य वैक्सीन से बेहतर वैक्सीन बताया गया है। यूनिवर्सिटी की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार अगर कोरोना की वैक्सीन नाक के जरिए दी जाती है तो इम्यून रिस्पॉन्स बेहतर होता है। एक्सपर्ट का मानना है कि नाक के जरिए कोरोना वायरस शरीर में प्रवेश करता और स्थितियां बिगड़नी शुरू हो जाती है। इसलिए नेजल स्प्रे असरदार साबित हो सकती है।

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