अमित उपाध्याय

हर दिन करोड़ों की तादाद में लोग पानी की बोतलें खरीदते हैं, जिनमें अरबों की तादाद में प्लास्टिक के कण हो सकते हैं. इसका खुलासा एक हालिया रिसर्च में हुआ है. चिंता की बात तो यह है कि प्लास्टिक के कण बेहद छोटे होते हैं, जो आपके खून में पहुंच सकते हैं. सभी लोगों को इसे लेकर सावधानी बरतनी चाहिए.

दुनियाभर में बोतलबंद पानी पीने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. सफर करते वक्त या बाजार में घूमते वक्त आपने भी कभी न कभी प्लास्टिक की बोतल वाला पानी जरूर पीया होगा. बड़ी तादाद में लोग घरों में भी पानी को स्टोर करने के लिए प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि ऐसा करना सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है. एक हालिया स्टडी में खुलासा हुआ है कि 1 लीटर पानी की बोतल में करीब 240000 नैनो प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं, जो हमें अपनी आंखों से दिखाई नहीं देते हैं. यह कण इतने छोटे होते हैं कि इंसान के खून में भी घुस सकते हैं.

यह स्टडी प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंसेज (PNAS) जर्नल में प्रकाशित हुई है. शोध करने वाले वैज्ञानिकों का दावा है कि पानी की प्लास्टिक की बोतल में पाए जाने वाले कण बेहद छोटे होते हैं और यह हमारे शरीर की सेल्स और ब्लड स्ट्रीम में घुसकर हमारे शरीर के अंगों को बर्बाद कर सकते हैं. इतना ही नहीं प्लास्टिक के ये कण गर्भ में पल रहे बच्चों के शरीर में भी पहुंच सकते हैं. इससे गर्भ में पल रहे बच्चों की जान को भी खतरा पैदा हो सकता है. प्लास्टिक के ये कण हमारे बाल की चौड़ाई के 17वें हिस्से से भी छोटे होते हैं. इन्हें नंगी आंखों से देखना संभव नहीं होता है.

यही वजह है कि प्लास्टिक की बोतल में 2 लाख से ज्यादा कण होने के बावजूद ये किसी को नजर नहीं आते हैं. इस स्टडी के आधार पर कहा जा सकता है कि बोतलबंद पानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है और इससे हमारे शरीर में लाखों की तादाद में प्लास्टिक के कण घुस सकते हैं.यह स्टडी कोलंबिया यूनिवर्सिटी और रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने की है. इससे पहले भी तमाम स्टडी में भी पानी की बोतल में नैनो प्लास्टिक होने की बात सामने आ चुकी है, लेकिन एक बोतल में इतनी ज्यादा तादाद में नैनो प्लास्टिक होती है, इसका अंदाजा पहले नहींं था.

प्लास्टिक प्रदूषण पृथ्वी पर हर जगह मौजूद है, लेकिन बोतलबंद पानी को लेकर वैज्ञानिकों में विशेष रुचि है. इसकी वजह प्लास्टिक के कणों को मानव शरीर में प्रवेश करने की क्षमता है. 2022 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि बोतलबंद पानी में माइक्रोप्लास्टिक की कंसंट्रेशन नल के पानी की तुलना में अधिक थी. 2021 की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि पानी की प्लास्टिक की बोतल के ढक्कन को खोलने और बंद करने से प्लास्टिक के छोटे टुकड़े पानी में मिल सकते हैं, जिससे सेहत को गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.

       (‘न्यूज़ 18 हिंदी’ से साभार )

 

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