ब्लैक होल (Black Hole) के टकराव को लेकर वैज्ञानिकों ने अनोखी घटना देखी है. नए अध्ययन LIGO और VIRO वेधशाला के गुरुत्व तरंगों के अवलोकन से पहली बार किसी द्विज ब्लैक होल तंत्र के डगमगाहट की परिघटना देखी है जिसका पूर्वानुमान आइंस्टीन (Albert Einstein) के सापेक्षता का सिद्धांत करता है. इस परिघटना का उन्हें काफी समय से ही देखे जाने का इंतजार था.

 

ब्लैक होल के टकराव या विलय (Collision or Merger of Black Holes) की घटना में समान्यतः दोनों पिंड एक दूसरे का चक्कर लगाते हुए पास आते हैं और धीरे धीरे उनका विलय हो जाता है.  इस तरह की प्रक्रिया द्विज ब्लैक होल (Binary Black Hole) में ज्यादा देखने को मिलती है जो थोड़े बहुत एक से आकार भार के होते हैं. नहीं तो एक ब्लैक होल के दूसरे को निगलने की प्रक्रिया भी देखने को मिल सकती है. लेकिन नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने एक दूसरे का चक्कर लगाते हुए दो ब्लैक होल के विलय की प्रक्रिया में एक खास डगमगाहट की गतिविधि (Wobbling Motion) देखी है. इस परिघटना के पूर्वानुमान आइंस्टीन के गुरुत्व के सिद्धांत ने लगाया था.

 

 

डगमगाहट वाली परिघटना

कार्डिफ यूनिवर्सिटी के प्रोफेस मार्क हेनम, डॉ चार्ली होय र डॉ जोनाथन थॉमसन के नेचर में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि इस डगमगाहट वाली परिघटना, जिससे पुरस्सरण या प्रिसिशन कहते हैं, पहली बार ब्लैक होल में देखा गया है. इसमें पिछले अवलोकनों की तुलना में मरोड़ 10 अरब गुना ज्यादा देखा गया है.

अंतरिक्ष और काल में इतनी विकृति

यह द्विज ब्लैक होल तंत्र साल 2020 के शुरू में उन्नत LIGO और VIRO वेधशालाओं द्वाला पकड़ी गई गुरुत्व तरंगों  के जरिए खोजा गया था. इनमें से एक ब्लैक होल हमारे सूर्य से 40 गुना ज्यादा विशाल है और वह गुरुत्व तरंगों द्वारा खोजा गया अब तक का सबसे तेज घूर्णन करने वाला ब्लैक होल है. पिछले सभी अवलोकनों के विपरीत तेजी से चक्कर लगाने वाले ब्लैक होल ने अंतरिक्ष और काल में इतनी विकृति ला दी है कि द्विज की पूरी की पूरी कक्षा आगे पीछे डगमगा रही है.

 

पहले से था अंदाजा

ये नतीजे इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि दो ब्लैक होल के टकराव जैसी चरम घटनाओं में हमें इस  तरह की परिघटनाओं का अवलोकन कर सकते हैं. इस पुरस्सरण का यह प्रकार अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत से है. मार्क हेनम ने बताया, “हमें हमेशा से ही लगता था कि इस द्विज ब्लैक होल में ऐसा हो सकता है.”

पांच साल का इंतजार

उन्होंने कहा कि उनकी टीम पहली गुरुत्व तरंगों की पहचान होने के बाद से ही उम्मीद कर रही थी कि वे इस तरह की जगह देख पाएंगे. इसके लिए वे पांच साल से इंतजार कर रहे थे और 80 अलग अलग पहचानों के बाद अंतत उन्हें यह दिखाई दिया. इस तरह की डगमगाहट या पुरस्सरण खिलौने वाले  लट्टू में दिखाई देती है जब घूमते हुए आगे पीछे डगमगाने लगता है.

 

मुश्किल से मिलते हैं इसके उदाहरण

वहीं सापेक्षता के सिद्धांत में इस तरह की पुरस्सरण बहुत ही कमजोर सा प्रभाव देता है कि उसे पहचानना मुश्किल होता है.  इसमें सबसे तेज उदाहरण न्यूट्रॉन तारों की कक्षा में देखने को मिलता है जिन्हें द्विज पल्सर कहा जाता है. एक कक्षा की इस प्रक्रिया में भी 75 साल का समय लग जाता है. इस अध्ययन में अवलोकित किया गए ब्लैक होल द्विज का नाम GW200129 है.

 

कमजोर तरंगों में कमजोर प्रभाव

इस ब्लैक होल द्विज में हर एक सेकेंड में पिछले अवलोकनों की तुलना में 10 अरब गुना ज्यादा शक्तिशाली प्रभाव दिखाई दिया है. डॉ थामसन का कहना है कि पहचानने के लिहाज से यह एक बहुत ही मुश्किल प्रभाव है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण तरंगें बहुत ही कमजोर होती हैं जिन्हें पकड़ने के लिए बहुत ही संवेदनशील उकरणों की जरूरत होती हैं.  पुरस्सरण उससे भी कमोजर प्रभाव होता हैं, जो पहले से ही कमजोर संकेतों में छिपा होता है.

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