देश के कई राज्यों में मार्च मध्य से जारी ग्रीष्म लहर के कारण बढ़ी बिजली की मांग और इसी बीच पैदा हुई कोयले की किल्लत से बिजली की कमी हो गई है। इस कारण कई राज्य घंटों बिजली कटौती करने पर मजबूर हो गए हैं। हर साल गर्मी के सीजन में देश में बिजली की मांग चरम पर होती है, लेकिन कोयले की कमी के कारण कई राज्यों में संकट गहरा गया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, झारखंड ,गोवा व कर्नाटक में मध्य मार्च से ही गर्मी बढ़ गई थी। इस कारण इन राज्यों में बिजली की मांग एकदम बढ़ गई। 

ऐसे में इन राज्यों को उद्योगों व कृषि क्षेत्र के लिए बिजली आपूर्ति का कार्यक्रम नए सिरे से निर्धारित करना पड़ रहा है। इन्हें कई घंटों बिजली की कटौती भी करनी पड़ रही है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में देश के कुछ राज्यों को गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा। 

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बिजली की मांग 38 सालों की सर्वाधिक
देश में अप्रैल के पहले पखवाड़े में बिजली की मांग पिछले 38 सालों के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। इसी बीच यूक्रेन संकट के कारण आयातित कोयले की आपूर्ति पर असर पड़ने लगा। यही कारण देश के ताप बिजली घरों में कोयला का स्टॉक तेजी से घटने लगा। 

झारखंड में बढ़ी बिजली समस्या

झारखंड में बढ़ती गर्मी के साथ ही बिजली की आंख मिचौली भी बढ़ गई है. आंकड़ों की मानें तो पूरे राज्य में अलग-अलग इलाकों में 3.7 से लेकर 8.7 फीसदी तक बिजली कटौती बढ़ गई है. बढ़ती गर्मी के साथ कटती बिजली पर विपक्ष जहां सरकार को घेरने में जुटी है. वहीं ऊर्जा विभाग बिजली में हो रही कटौती की असल वजह अचानक गर्मी के कारण 500 से 600 मेगावाट तक डिमांड बढ़ने को बता रही है. 

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कोयले की कमी देखी गई
जहां तक बिजली की बात है तो बाजार के डायनेमिक चेंज के हिसाब से तुरंत बनाया और बेचा जाना संभव नहीं होता है. जहां तक कोयले की किल्लत का सवाल है, तो झारखंड को सीधे तौर पर प्रभावित नहीं करता है, लेकिन कोयले की कमी देखी गई है. झारखंड में हर दिन TBNL को दो रैक कोयला मिल रहा है और नियमित कोयला मिलता रहे इसके लिए सीसीएल प्रबंधन ने आश्वस्त किया है. वहीं ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव ने बताया कि किसी भी लाइन पर अचानक लोड बढ़ने से फॉल्ट आता है. हालांकि पहले की तुलना में उसमें कमी आई है. उपभोक्ता को समय पर बिजली का भुगतान करना होगा, क्योंकि हर महीने राज्य सरकार लगभग 550 करोड़ की बिजली खरीदती है. इस लिए उपभोक्ता समय पर बिजली का भुक्तान करें. 

26 दिन का कोयला स्टॉक जरूरी
आमतौर पर कोयला संयंत्रों को पूर्ण क्षमता से चलाने के लिए 26 दिन का स्टॉक जरूरी है, लेकिन कोयले की प्रचूरता वाले राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों में भारी किल्लत हो गई। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो यह 36 फीसदी रह गया। कोयला बहुत राज्यों में ओडिशा, झारखंड व छत्तीसगढ़ शामिल हैं। बंगाल में कोयले का स्टॉक सामान्य से 1 से 5 फीसदी, राजस्थान में 1 से 25 फीसदी, यूपी में 14 से 21 फीसदी व मप्र में 6 से 13 फीसदी रह गया। देश में राष्ट्रीय औसत स्टॉक भी पिछले सप्ताह सामान्य स्तर से दो फीसदी कम होकर 36 फीसदी रह गया। 

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राज्य मांग रहे केंद्र से अतिरिक्त बिजली, हरियाणा करेगा कोयला आयात
देश में पीक अवर में बिजली की फिलहाल कुल मांग 1,88,576 मेगावाट की बताई जा रही है। इसमें 3,002 मेगावाट की ही कमी बताई जा रही है, लेकिन दूसरी ओर कई राज्य भारी कमी झेल रहे हैं। उन्हें कटौती पर मजबूर होना पड़ रहा है। यही कारण है कि राज्य केंद्र से अतिरिक्त बिजली मांग रहे हैं। मध्य प्रदेश व पंजाब भी केंद्र से ज्यादा बिजली मांग रहे हैं। वहीं, हरियाणा ने पहली बार अपने ताप बिजली घरों के लिए 10 सालों में पहली बार कोयले के आयात का फैसला किया है।

एक माह तक उपयोग के लिए भरपूर कोयला रोजाना हो रही आपूर्ति
कोयले की कमी को नकारते हुए देश के कोयला व खान मंत्री प्रह्लाद जोशी ने साफ किया है कि देश में एक महीने से ज्यादा समय तक उपयोग करने के लिए भरपूर कोयला है। इसकी रोजाना पूर्ति हो रही है। वहीं कोयला उत्पादन भी रिकॉर्ड स्तर पर है। तापीय बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी पर जोशी ने साफ किया कि इस समय विभिन्न उत्पादन स्रोतों के पास 72.5 मीट्रिक टन कोयला है। 

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इनमें कोल इंडिया, एससीसीएल, वॉशरीज (जहां कोयला छांटा और शुद्ध किया जाता है) शामिल हैं। दूसरी ओर खुद संयंत्रों के पास भी 22.01 मीट्रिक टन कोयला मौजूद है। उल्लेखनीय है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 में 777.23 मीट्रिक टन कोयला उत्पादन प्रारंभिक अनुमान है। पिछले वर्ष में यह आंकड़ा 721 टन था, यानी करीब साढ़े प्रतिशत वृद्धि हुई है।

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