राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (एनएफएचएस-5) के मुताबिक, परिवार में फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है. एनएफएचएस-4 (2015-16) में जहां 84 प्रतिशत महिलाएं घरेलू निर्णयों में अपनी राय जाहिर करती थीं, एनएफएचएस-5 (2019-21) में यह आंकड़ा बढ़कर 88.7 प्रतिशत हो गया. शहरी क्षेत्र की 91 फीसदी महिलाएं अब पारिवारिक फैसलों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं.

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गांवों में यह शहरों की अपेक्षा थोड़ा कम 87.7 प्रतिशत है. हालांकि, इसमें भी एनएफएचएस-4 के मुकाबले वृद्ध्रि देखी गयी है. सर्वे में कहा गया है कि आमतौर पर विवाहित महिलाएं तीन घरेलू निर्णयों में भाग लेती हैं. स्वयं के लिए स्वास्थ्य देखभाल के बारे में, प्रमुख घरेलू खरीदारी में और अपने परिवार या रिश्तेदारों से मिलने जाने में.

शहरी क्षेत्रों में मिल रहे अधिक अधिकार

एनएफएचएस-4

शहरी क्षेत्र 85.8

ग्रामीण क्षेत्र 83.0

कुल : 84.0

एनएफएचएस-5

शहरी क्षेत्र 91.0

ग्रामीण क्षेत्र 87.7

कुल : 88.7

मनरेगा कार्यों में महिलाओं की भागीदारी 50.75 फीसदी, यह पिछले चार वर्षों में सबसे ज्यादा

तीन मामलों में विवाहित महिलाएं लेती हैं निर्णय

1 स्वयं के लिए स्वास्थ्य देखभाल के बारे में

2 प्रमुख घरेलू खरीदारी में

3 परिवार या रिश्तेदारों से मिलने जाने में

दिल्ली और गुजरात की महिलाएं निर्णय लेने में सबसे आगे

राज्य एनएफएचएस-5 एनएफएचएस-4

बिहार 86.2 75.2

गुजरात 92.2 85.4

झारखंड 91.0 86.6

मध्य प्रदेश 86.0 82.8

महाराष्ट्र 89.8 89.3

ओड़िशा 90.2 81.8

पंजाब 91.4 90.2

राजस्थान 87.7 81.7

उत्तर प्रदेश 87.6 81.7

पश्चिम बंगाल 88.9 89.9

दिल्ली 92.0 73.8

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कम उम्र में शादी करने का चलन हुआ कम

आयुवर्ग महिला पुरुष

20 से 24 वर्ष 2 3% 18%

45 से 49 वर्ष 47% 27%

प्रजनन दर 2.2 से घट कर 2.0 हुई

कम उम्र में मां बनने के मामले में बिहार से आगे बंगाल

देश में सबसे अधिक 22 प्रतिशत त्रिपुरा में, 16 प्रतिशत पश्चिम बंगाल में, 13 प्रतिशत आंध्र प्रदेश में, 12 प्रतिशत असम में तथा 11 प्रतिशत बिहार में लड़कियां कम उम्र में मां बनी या बनने वाली हैं. इनमें 6.8 प्रतिशत लड़कियां ऐसी हैं जिन्होंने पहले बच्चे को जन्म दे दिया है. 4.2 प्रतिशत लड़कियां गर्भवती हैं. सर्वे के मुताबिक, बिहार में 40% महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हो जाती है, जबकि 25% पुरुष ऐसे हैं जिनकी शादी 21 साल से पहले हो जा रही है.

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