विकास कुमार

साइंस फॉर सोसाइटी, झारखंड द्वारा वैज्ञानिक एवं लोकतांत्रिक चेतना के विकास एवं विस्तार के लिए जन विज्ञान अभियान को आगे बढ़ाए जाने का सिलसिला जारी है. इसी कड़ी में झारखंड साइंस फिल्म फेस्टीवल 2022 का कारवां अब उत्तरी छोटानागपुर की और बढ़ चुका है. तीसरा फ़ेस्टिवल 14-18 अक्टूबर के बीच बोकारो और गिरिडीह में आयोजित होगा. फ़िल्मों के माध्यम से समाज में वैज्ञानिक चेतना का विकास करने के उद्धेश्य से शुरू हुआ झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत दक्षिणी छोटानागपुर के लोहरदगा में अप्रैल-मई में हुई थी. दूसरा फेस्टीवल कोल्हान के चार स्थानों पर क्रमशः जमशेदपुर, पटमदा, चाईबासा और चांडिल में, अगस्त में आयोजित किया गया था. पहले दो फेस्टिवल्स की तरह, तीसरा झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल में न सिर्फ इस क्षेत्र की विशिष्टता बल्कि यहां की समस्याएं एवं चुनौतियां भी सामने उभर कर आएंगी. 

बोकारो में होगा उद्धघाटन, दिखाई जाएगी 15 से ज्यादा फिल्में

14 अक्टूबर को बोकारो में तीसरे झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल का आगाज़ होगा. बोकारो में यह फेस्टिवल साइंस फ़ॉर सोसाइटी , बोकारो यूनिट और एजुकेशन डिपार्टमेंट, सेल, बोकारो स्टील प्लांट के सहयोग से होगा. बोकारो में दो दिनों में 15 से ज़्यादा फ़िल्में दिखाई जाएंगी जिसमे डाक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म, एनीमेशन शामिल है. झारखंड , बंगाल, केरल, उत्तर पूर्वी भारत, तमिलनाडु , राजस्थान, तेलंगाना, लद्दाख आदि राज्यों की फिल्में इसमें शामिल हैं. पहले दिन कई महत्वपूर्ण फ़िल्में दिखाई जाएंगी . फेस्टिवल की शुरुआत में आकाश राजपूत की फिल्म “माय लाइफ ऐज ए स्नेल ( My Life as a Snail ) दिखाई जाएगी. यह फिल्म एक घोंघे के जीवन के इर्दगिर्द घूमती है. यह फिल्म देश के कई विज्ञान महोत्सव में अवार्ड जीत चुकी है.

पहले सत्र में दुनियाभर में कई पुरस्कार जीत चुकी फिल्म ‘’ ग्रीन “ ( Green ) का प्रदर्शन होगा. पैट्रिक रौक्सेल द्वारा निर्देशित फिल्म ग्रीन नामक गोरिल्ला के अंतिम दिनों  की एक भावनात्मक यात्रा प्रस्तुत करती है। यह इंडोनेशिया में ताड़ के तेल , कागज उद्योग के लिए  जंगलों में पेड़ो की कटाई और भूमि समाशोधन से होने वाले विनाशकारी प्रभावों को दिखाती है. पहले सत्र में शॉर्ट फिल्म ‘’decay “ का प्रदर्शन होगा.  झारखंड के रहने वाले युवा फिल्मकार आकिब कलाम द्वारा निर्देशित फिल्म का इस साल अगस्त में भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव में चयन  हुआ था. “Decay” फ़िल्म मानव द्वारा कीमती प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की समस्या के तरफ ध्यान केन्द्रित करती है. फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान आकिब मौजूद रहेंगे.

पहले दिन प्रदर्शित फ़िल्मों में से एक है “An Engineered Dream’’ जो कोटा के कोचिंग सेंटरों में छात्रों पर अस्वस्थ तनाव को उजागर करता है।  फिल्म में भारत के विभिन्न कोनों से कोटा में कोचिंग ले रहे चार किशोरों के जीवन का वर्णन है. हेमन्त बावा द्वारा निर्देशित फिल्म ने 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (2019) में सर्वश्रेष्ठ गैर फीचर फिल्म का पुरस्कार जीता था. पहले दिन पद्मश्री सिमोन उरांव के पर्यावरण और जल संरक्षण पर आधारित फिल्म ‘झरिया’ की स्क्रीनिंग होगी. झरिया  फिल्म तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके बीजू टोप्पो द्वारा निर्देशित की गई है.  फिल्म “ Coral Woman” मन्नार की खाड़ी में मानव गतिविधियों द्वारा प्रवाल (Corals ) के लिए बढ़ते खतरे को संजीदगी से पेश करती है. फिल्म उमा की यात्रा को बताती है , एक प्रमाणित स्कूबा गोताखोर, पानी के नीचे की दुनिया की खोज में रूचि रखती है । एक पारंपरिक परिवार में जन्मी, कोरल की सुंदरता से प्रेरित होकर, उमा ने 50 के दशक में तैरना, गोता लगाना और पेंट करना सीखा, और तब से वह अपने चित्रों के माध्यम से इस खतरनाक पर्यावरणीय संकट पर ध्यान देने की कोशिश कर रही है। यह फिल्म विख्यात फिल्मकार प्रिया ठुवासारी द्वारा निर्देशित है. 

हज़ारीबाघ के रहने वाले युवा फिल्मकार अनिरुद्ध उपाध्याय की शॉर्ट फिल्म “कमीज़” की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे रूढ़िबद्ध समाज द्वारा उसकी शक्ल और पहनावे के आधार पर आंका जाता है। अनिरुद्ध अपने टीम के साथ उपस्थित रहेंगे और दर्शकों के साथ संवाद करेंगे.

वर्षों से झारखंड में बहने वाली दामोदर नदी  प्रदूषण, औद्योगीकरण, खनन के कारण प्रभावित हुई है जिसका खामियाजा यहाँ की आदिवासी और स्थानीय आबादी को भुगतना पड़ा है.  इसी पर केन्द्रित है फिल्म “Damodar’s sorrow” . इसका निर्देशन रंजीत उरांव ने किया है. इसके अलावा  गणित का प्रारंभिक इतिहास, कई खोज या विकास, जैसे कि शून्य और पाइथागोरस प्रमेय के बारे में बताती  फिल्म “The Ganita Story“ भी दिखाई जायेगी. 

गिरिडीह में 17 और 18 को साइंस फिल्म फेस्टिवल

उत्तरी छोटानागपुर देशभर में कोयला, अयस्क ( Mica ) जैसे खनिज के खनन के लिए विख्यात है . यहाँ से निकले कोयला से बनी उर्जा  झारखंड और देशभर के घरों को उज्जलित करती है लेकिन इसका दूसरा पक्ष यह है की स्थानीय आबादी ने विस्थापन, पलायन , प्रदूषण, गरीबी का दर्द झेला है. इन मुद्दों के इर्द गिर्द गिरिडीह में दो दिनों के फेस्टिवल में कई फिल्मों का प्रदर्शन होगा. इस साल पहले झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर कर चुकी रुपेश साहू द्वारा निर्देशित फ़िल्म “ Rat Trap ” कोयला खनिकों के उनके दैनिक जीवन को बयां करती है , किस तरह से आजीविका कमाने के लिए वे अपनी जान जोखिम में डालते हैं। वे कई दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं , जिसकी सूचना बाहरी दुनिया तक पहुँच नहीं पाती.  यह दुर्भाग्यपूर्ण है की वे अपने ही घर में चोर कहलाते हैं.

झारखंड के विख्यात फ़िल्मकार श्रीप्रकाश की फिल्म “The Fire Within” झारखंड के कोयला खनन क्षेत्र की दर्दनाक तस्वीर
खींचती है , जिसमें भ्रष्टाचार, माफिया की ताकत से विस्थापन का दंश झेल रहे  आदिवासी समुदाय की अस्मिता भी अब खतरे में है. माहीन मिर्ज़ा की फिल्म “ अगर वह देश बनाती ” में छत्तीसगढ़ के गांवों की ग्रामीण, आदिवासी, कामकाजी महिलाओं द्वारा विकास के भव्य मॉडल की आलोचना करती हैं और न्यायपूर्ण और न्यायसंगत व्यवस्था की परिकल्पना करती है. 

झारखंड के नामी डाक्यूमेंट्री फिल्मकार दीपक बाड़ा की 48 मिनट की फिल्म “’द अगली साइड ऑफ ब्यूटी’  झारखंड के कोडरमा, गिरिडीह जिलों में अभ्रक (Mica ) के अवैध खनन पर आधारित है. इसमें इन क्षेत्रों में रह रहे वंचित समुदाय के बारे में बताया गया है, जो अपने परिवार के साथ अभ्रक खनन और ढिबरा चुनने का काम करते हैं. यह फिल्म अभ्रक खनन और सौंदर्य प्रसाधन उद्योग पर आधारित है. 

अखड़ा रांची द्वारा निर्मित “ग्राम सभा की कहानी” में झारखंड के विभिन्न गावों में ग्राम सभा से हो रहे बदलाव को दिखाती है, किस तरह सशक्त ग्राम सभा के माध्यम से ग्रामीण अपने जल जंगल और जमीन की रक्षा कर पा रहे हैं .

गिरिडीह में दिखाई जाएगी मुद्दे आधारित कई शॉर्ट फिल्में 

गिरिडीह में कई शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन होगा जो बच्चों के इर्द गिर्द घूमती है. इसमें देश दुनिया में अवार्ड जीत चुकी झारखंड के युवा फिल्मकार की फिल्म ‘“पहाड़ा” का प्रदर्शन होगा. “पहाड़ा” 8 साल  के बच्चे  मुन्नू के इर्द गिर्द घूमती है जो काफी लंबे समय से तेरह की तालिका सीखने के लिए संघर्ष कर रहा है। ओड़िशा बालासोर के रहने वाले श्यामा सुंदर मांझी  की संथाली फिल्म मीरू नाम की एक बच्ची पर आधारित है जो ग्रामीण भारत के एक स्वदेशी समुदाय के एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है

झारखंड के युवा फिल्ममेकर अर्श इफ्तिखार की पहली फिल्म “स्कॉलरशिप ( Scholarship ) का प्रीमियर गिरिडीह में होगा. फिल्म स्कॉलरशिप झारखंड के सुदूर इलाके में स्थापित एक लघु फिल्म है। नायिका प्रिया एक गरीब पृष्ठभूमि से आती है और उसे अपने स्कूल तक पहुँचने के लिए कठिनाइयों से घिरी एक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। देर से आने पर उसे उसके दोस्त भी चिढ़ाते हैं। अपने सहपाठियों को साइकिल पर यात्रा करते हुए देखकर, वह अपने लिए एक साइकिल चाहती है। वह सोचती है कि उसका इंतजार खत्म हो गया है जब शिक्षक छात्रवृत्ति की घोषणा होती है। लेकिन प्रिया के लिए सबसे बड़ा द्वंद तब आता है जब उसे निर्णय लेना पड़ता है कि छात्रवृत्ति के पैसे से वह साइकिल खरीदे या बीमार भाई का इलाज करवाए.

तीसरा झारखंड साइंस फिल्म फेस्टीवल में आप सभी के सहयोग की अपेक्षा

हम छात्रों, शिक्षकों, विज्ञान संचारकों, फिल्म निर्माताओं, आम लोगों को तीसरे साइंस फ़िल्म महोत्सव का हिस्सा बनने के लिए सादर आमंत्रित करते हैं। उम्मीद है कि आप सभी के सहयोग एवं सक्रिय भागीदारी से झारखंड का यह महत्वपूर्ण आयोजन सफल होगा .हम कल्पना करते हैं कि विज्ञान फिल्म महोत्सव, दर्शकों के बीच वैज्ञानिक सोच पैदा करेगा और आलोचनात्मक और विश्लेषणात्मक सोच को आकार और विस्तार देगा, जो समाज के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है. आप सभी का स्वागत है संविधान सम्मत,वैज्ञानिक जागरूकता के इस जन अभियान में.

विकास कुमार स्वतंत्र पत्रकार , रिसर्चर  हैं . वे झारखंड साइंस फिल्म फेस्टिवल के कोऑर्डिनेटर भी है. 

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