कीड़ों (Insects) के वायुमंडल पर प्रभाव पर हुए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि उनके झुंड में पंख फड़फ़ाने से आसमान में बिजली (Lightening) बनने का प्रभाव हो सकता है. इस अध्ययन में उन्होंने बारीकी से अध्ययन कर देखा है कि कैसे तितलीय, टिड्डी या अन्य कीटों के पंख फड़फड़ाने से हवा में मौजूद कणों में आवेश पैदा होते हैं और झुंड के मामले में यह बिजली वाले तूफान (Thunderstorm) जैसे हालात तक पैदा कर सकते है.

आधी सदी पहले इस बात की पड़ताल की गई थी कि क्या ब्राजील तितलियों के पंख फड़फड़ाने  (Flapping of Wings)के दूरगामी प्रभाव से अमेरिका केटेक्सास में एक टोरनेडो पैदा हो गया था. उस समय अमेरिकी गणितज्ञ एडवर्ड लॉरेंस इस सवाल का जवाब खोजने के प्रयास किया था जिसमें उन्हें तब सफलता नहीं मिली थी. लेकिन अगर लॉरेंस  इस प्रश्न की पड़ताल करते कि क्या टिड्डियों के दल के पंख फड़फड़ाने से हवा में इतना आवेश (Charges in the Air) आ जाता है कि बिजली वाला तूफान (Thunderstorm) पैदा होने की स्थिति बन जाती हैतो भी सवाल को उतनी ही अहमियत मिलती. नए अध्ययन में उड़ने वाले कीड़े के वायुमंडल पर इसी तरह के प्रभाव का अध्ययन किया है.

कीड़े भी पैदा कर सकते हैं आकाश में बिजली

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह पाया है कि बहुत सारे कीड़े जब अपने छोटे छोटे पंख फड़फड़ते हैं तो हवा में विद्युतीय प्रभाव उसी तरह से पैदा होता है जैसा कि पानी की वाष्प घूमते बादलों में हवा को आवेशित कर तूफान की स्थितियां पैदा कर देती हैं. इसका मलतब है कि हमें वायुमंडलीय विद्युत क्षेत्र के संदर्भ में जैविक परिघटनाओं को भी कारकों के तौर पर शामिल करने की जरूरत होगी.

कैसे होता है ये

ध्यान से देखने पर हम पाते हैं कि धूल, नमी आदि के कण हवा में कीड़ों की फड़फड़ते अंगों के प्रभाव से आवेशित होकर जमा जाते हैं. जो धीरे धीरे फैल कर हवा में फैल कर एक तरह का अंतर पैदा करते हैं जिसे विभव प्रवणता कहते हैं. वहीं तूफान में छोटे बर्फ के कण हवा मे रगड़ खाते हुए ऊपर उठते हैं एक तरह का आवेश के कनवेयर बेल्ट बनाते हैं और बादलों के ऊपर के, उनके निचले हिस्से और जमीन के बीच विभांतर पैदा कर देते हैं.

 

बादालों में होने वाली प्रक्रिया

इस दिखाई ना देने वाली परिघटना के कारण आवेश में तेजी से आदान प्रदान होता है जिससे तेज प्रकाश चमकता है. जिसे हम बिजली चमकना या कड़कना कहते हैं. कई बार यह बिजली जमीन तक पहुंच जाती है जिसे बिजली गिरने की घटना कहा जाता है. बिजली चकमने या कड़काने की अनुपस्थिति में भी विरोधाभासी आवेशित क्षेत्र आयनों के गतिमान होने का प्रभाव दिखाते हैं जिसें प्रदूषण के कण या धूल के कण शामिल होते हैं.

बहुत सारे कारक लेकिन इस पर नहीं गया ध्यान

इस तरह के विभव प्रवणता की मात्रा और स्थिति को बहुत सारे कारक प्रभावित करते हैं जिसमें बादलों की गतिविधियों से लेकर वर्षण की गतिविधि तक शामिल है, यहां तक खगोलीय किरणों की बारिश तक इस पर असर डालती है, लेकिन अभी तक जैविक परिघटनाओं का इस पर असर का किसी ने ध्यान नहीं दिया था.

भौतिकी पर जीवविज्ञान का प्रभाव

यूके के ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के जीव वैज्ञानिक और इस अध्ययन के प्रथम लेखक एलार्ज हंटिंग ने बताया, “हम हमेशा ही देखते हैं कि भौतिकी जीवविज्ञान को कैसे प्रभावित करती है, लेकिन किसी बिंदु पर हमें अहसास होता है कि जीवविज्ञान से भी भौतिकी प्रभावित हो सकती है. हमारी रुचि इसमें है कि कैसे अलग-अलग जीव स्थैतिक विद्युत क्षेत्र का उपयोग वातावरण में करीब करीब चारों ओर करते हैं.

छोटे छोटे मिलकर बड़ा प्रभाव

हाल के सालों में यह साफ हुआ है कि कीड़े और दूसरे रीढ़धारी जीव आसापास के वातावरण में छोटे विभव पैदा कर सकते हैं. छोटी मकड़ियां तो इसके जरिए खुद को हवा में उछालने के लिए उपयोग में लाती हैं. लेकिन कीड़ों के झुंड के ये छोटे छोटे विभव कैसे मिल जाते हैं इसका कभी मापन नहीं हुआ.

इसलिए हंटिंग और उनकी टीम  ब्रिस्टल स्कूल ऑफ वेटनरी साइंसेस के फील्ड स्टेशन में गए और वहां मधुमक्खियों की कॉलोनी से निकलने वाले झुंडों का इंतजार किया. उन्होंने इलेक्ट्रिक फील्ड मॉनिटर और कैमरा का उपयोग किया मक्खियों के गुजरने के तीन मिनट बाद 100 वोल्ट प्रतिमीटर का विभव प्रवणता का इजाफा पाया. बाद के विश्लेषण में इसकी पुष्टि हुई कि यह विभवता झुंड की ही वजह से था. इसी तरह के प्रभाव दूसरे कीटों पर भी लागू किया जा सकता है. आईसाइंस मे  प्रकाशित इस अध्ययन में कहा गया है कि इसमें संख्या की मात्रा काफी मायने रखता है.

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