विकास कुमार

पिछले महीने नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई दक्षिण कोरिया की वेब सीरीज स्क्विड गेम्स ( Squid Game ) पूरी दुनिया में चर्चा में है. पिछले माह रिलीज हुई यह सीरीज़ ने सारे रेकॉर्ड तोड़कर नेटफ्लिक्स में सबसे अधिक देखा जाने वाला शो बन चुका है. इंटरनेट पर मचे हलचल से, मेरी भी इस शो को देखनी की उत्सुकता बढ़ी और  काफी लंबे समय बाद मैंने किसी वेबसीरीज को पूरा देखा।

स्क्विड गेम्स एक सर्वाइवल ड्रामा है जिसमें दक्षिण कोरियाई समाज के हर वर्ग, क्षेत्र, नस्ल के  कर्ज़ में डूबे 456 लोगों को अपनी स्वेच्छा से एक कार के द्वारा एक टापू में लाया जाता है.  रहस्मय संगठन  द्वारा उनसे कहा जाता है कि उन्हें  प्रगियोगिता में भाग लेना होगा, जहाँ सारे 6 राउंड को जीतने वाले खिलाड़ी को 4.6 बिलियन वोन (£ 28m) मिलेगा. रहस्मय संगठन के सारे लोग विचित्र वेशभूषा में मास्क पहनकर रहते हैं.

संगठन का लीडर, जो सबसे अलग काले ड्रेस के रहता है, उन्हें शुरू में ही कहता है  कि वे प्रतियोगिता को अगर क्विट करना चाहते है़ , तो शुरू में ही कर सकते हैं, नहीं तो उन्हें एग्रीमेंट पेपर पर हस्ताक्षर करना पड़ेगा जहाँ वे बीच में बिना खेल छोड़े, वापस नहीं जा सकते. सभी खिलाड़ी खेलने के लिए तैयार होते हैं. फिर शुरू होता है , पहला खेल जहाँ पर प्रतिभागियों के पाव तले जमीन खिसक जाती है , जब पता चलता है अगर खेल के किसी राउंड के दौरान वे हार जाते हैं, तो तुरंत उन्हें सिर में गोली लग जाती है. पहले खेल के दौरान यह खूनी मंजर शुरू हो जाता है और देखते ही देखते मैदान में लहूलुहान, हारे हुए खिलाड़ियों की लाशें आपको जलियांवाला कांड की याद दिलाती है.

पहले खेल के बाद जिंदा बचे खिलाड़ियों द्वारा विरोध होता है  और कई खिलाड़ी वापस घर जाना चाहते हैं. एग्रीमेंट क्लॉज़ के मुताबिक वोटिंग होती है , जिसमें मेजोरिटी  खिलाड़ी आगे खेलने से इंकार करते हैैं , जिसके कारण, शर्तो के मुताबिक खेल को वहीं रोक दिया जाता हैं और उन्हें घर पंहुचा दिया जाता है। लेकिन कुछ दिनों में ही वास्तविक जीवन की सच्चाई से वे फिर अवगत होते हैं, जहाँ कर्ज में  डूबे इन लोगों के साथ हर दिन अमानवीय घटना होती है और उन्हें एहसास होता है कि पैसे के अभाव में हर मिनट मरने से बेहतर है कि दोबारा खेल प्रतियोगिता में भाग लें, जहाँ करोड़ों रुपए जीतकर उन्हें गरीबी और कर्ज से निकलने का आखिरी मौका है.

हुसंख्यक खिलाड़ी वापस खेलने पहुँच जाते हैं और फिर आगे बढ़ती है कहानी, जो ना सिर्फ़ बहुत ही रोचक होती है बल्कि दक्षिण कोरियाई समाज ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के मौजूदा पूंजीवाद की अमानवीय व्यवस्था का सच बयान करती है, जहाँ Cash Prize की आस सभी मानवीय रिश्ते के गरिमा को तार तार करने के लिए खिलाड़ी मजबूर होते हैं. गलाकाट प्रतोयोगिता में नैतिकता की कठोर परीक्षा होती है. इन सब के बीच शो में  मेहनतकश लोगों की मानवीय संवेदनाओं की कहानियों के चित्रण से दर्शकों के रौंगटे खड़े हो जाते है , जो मौजूद व्यव्यस्था पर कई सवाल खड़ा करती है.

आज कर्ज के जाल में दक्षिण कोरिया के करोड़ों लोग

बीते बुधवार 20 अक्टूबर को दक्षिण कोरिया में हजारों मजदूरों  ने राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन का मंचन किया, जिसमें राजधानी सियोल शहर भी शामिल है, जहां दर्जनों सदस्य मेगाहिट “स्क्विड गेम” में किरदारों के कपड़े और मुखौटे पहने हुए थे और अधिक नौकरियों और बेहतर काम की परिस्थितियों की मांग कर रहे थे. दरअसल वे स्क्विड गेम में दर्शाए गए आर्थिक असमानता और बढ़ते कर्ज़ की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते थे.

साउथ कोरिया का नाम सुनने पर हम पॉप म्यूजिक और samsung ब्रांड को याद करते हैैं लेकिन इस शो ने दक्षिण कोरियाई समाज के उस सच को उजागर किया है जिसके बारे में लोग नहीं जानते थे. कोरिया क्रेडिट इंफॉर्मेशन सर्विसेज के आंकड़ों से पता चलता है कि एक से अधिक प्रकार के व्यक्तिगत ऋण भुगतान में पिछड़ने वालों का अनुपात जून तक 55.47% तक पहुंच गया है, जो 2017 में 48% था. देश में व्यक्तिगत दिवालियापन पिछले साल 50,379 के पांच साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया था.

बता दें कि दक्षिण कोरिया की स्व-रोजगार रैंक की संख्या दुनिया के सबसे ऊंचे स्थान पर है, जो नौकरी बाजार का एक चौथाई हिस्सा बनाती है. 2017 में केंद्रीय बैंक का एक अध्ययन बताती है कि ऐसे व्यवसायों में से केवल 38% ही तीन साल तक जीवित रहते हैं. फिर भी, जैसे-जैसे आर्थिक संभावनाएं कम होती जा रही हैं, दक्षिण कोरियाई लोग घर की बढ़ती कीमतों के बीच कम अच्छी नौकरियों का पीछा कर रहे हैं, कई लोग यह शर्त लगा रहे हैं कि कर्ज़ ही धन का एकमात्र मार्ग है, और स्टॉक और अन्य संपत्ति खरीदने के लिए पहले से कहीं अधिक कर्ज ले रहे हैं. 

यहाँ की व्यवस्था में लोन लेना कॉफी खरीदने से ज़्यादा आसान है, लेकिन लोन के मायाजाल में फंसे लोगों का बाहर निकलना उतना ही मुश्किल. दक्षिण कोरिया में व्यक्तिगत ऋण का स्तर अब सकल घरेलू उत्पाद ( GDP ) के 105% के बराबर है.

कर्ज़ के दबाव में बढ़ रही आत्महत्याएं

दक्षिण कोरिया की आबादी लगभग सवा पांच करोड़ है। इस आबादी की तुलना में यहां आत्महत्या की दर ज्यादातर विकसित या विकासशील देशों से ज्यादा है। बीते साल ही हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी के हवाले से ख़बर छापा है बीते साल के पहले छह महीनों में 1,924 महिलाओं ने खुदकुशी की। दक्षिण कोरिया में बढ़ती आत्महत्या हमेशा चर्चा में रहा है . दक्षिण कोरिया 1997-98 में एशियाई विदेशी मुद्रा संकट और अपने देश के अंदर वित्तीय संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। तब आत्महत्या की दर में भारी बढ़ोतरी हुई थी लेकिन पिछले एक साल में यह विकराल रूप ले चुका है और बढ़ते
ऋण की समस्या इसके प्रमुख कारणों में से एक है.

भूमंडलीकरण से बढ़ी आर्थिक असमानता

Squid Game ने ना सिर्फ दक्षिण कोरिया बल्कि दुनियाभर में बढ़ती आर्थिक असमानता का काफी प्रभावशाली ढंग से चित्रण किया है. दुनियाभर में इसकी लोकप्रियता यही बयान करती है कि आम लोग अपने सामाजिक व्यवस्था और शो के किरदारों में खुद की परछाई को देख पा रहे हैं. विभिन्न रिपोर्ट यही बताता है कि आज दुनिया भर में कुछ चुनींदा अमीर लोग दुनिया भर की संपति पर कब्जा करके बैठे हैं. कोरोना काल में जहाँ आम लोगों की आजीविका पर संकट खड़ा किया, आर्थिक असुरक्षा बढ़ी है वही हर घंटे अमीर लोगों की संपत्ति बढ़ी, चाहे वो फेसबुक के मालिक हों या भारत के अम्बानी-अडानी. दुनियाभर और ख़ासकर भारत में सरकारों को आर्थिक असमानता को घटाने के लिए तत्काल कदम उठाने पड़ेंगे जिसमे नई नौकरियां, कर्ज माफी, अमीरों पर टैक्स , सामाजिक क्षेत्रों में निवेश शामिल है , नहीं तो दुनियाभर की बहुसंख्यक गरीब आबादी Squid Game की तरह मारकाट वाली दुनिया भर में जीने को विवश होंगें जहाँ प्रभुत्वशाली वर्ग अपने निजी स्वार्थ के लिए उन्हें आपस में लड़ाएगा और मेहनतकश पैसे के लिए एक दूसरे को मारने को विवश होंगें।

विकास कुमार स्वतंत्र पत्रकार और रिसर्चर है. वे वैज्ञानिक चेतना के साथ भी जुड़े हैं

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