झारखंड में आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश के आलोक में लगभग दो वर्षों बाद प्राथमिक वर्ग की कक्षाएं 4 फरवरी 2022 से शुरू हुई। इसमें उस वक्त राज्य के कुल 24 जिलों में से सिर्फ 17 जिलों को ही इसमें शामिल किया गया। अभी हाल में राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने कहा कि शेष 7 जिलों में भी प्राथमिक कक्षाएं शुरू करने पर निर्णय शीघ्र लिया जाएगा। उन सात जिलों में कोल्हान कमिश्नरी के जिले भी शामिल हैं। अब कोल्हान कमिश्नरी मुख्यालय चाईबासा में उपयुक्त को ज्ञापन सौंपकर कुछ सामाजिक संगठनों ने इन प्राथमिक वर्ग के बच्चों को लिए व्यापक साक्षरता अभियान चलाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि रांची यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग के विजिटिंग प्रोफेसर एवं सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज ने भी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर लम्बे समय से स्कूलों के बंद रहने से प्रभावित बच्चों के लिए महासाक्षरता अभियान चलाने का सुझाव दिया था। इसके साथ ही उन्होंने तमिलनाडु में चलाए गए अभियान को झारखंड में लागू करने पर विचार करने का सुझाव दिया जिसके तहत स्थानीय शिक्षित युवाओं, खासकर महिलाओं, आदिवासियों एवं दलितों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया गया।

इसी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच, पश्चिमी सिंहभूम के प्रतिनिधिमंडल ने कल चाईबासा में उपायुक्त व उप-विकास आयुक्त से मिलकर लॉकडाउन के कारण बच्चों की शैक्षणिक क्षमता पर पड़े भयावह असर के विषय में बताया और मांग की कि ज़िला के प्राथमिक बच्चों के लिए व्यापक साक्षरता अभियान शुरू किया जाए. उपायुक्त ने मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया. उल्लेखनीय है कि पिछले करीब दो साल से विद्यालय बंद होने के कारण बच्चों के, खास कर ग्रामीण क्षेत्र की शैक्षणिक क्षमता पर भयावह असर पड़ा है. इस दौरान अधिकांश ग्रामीण बच्चों तक ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच बहुत ही कम थी. ग्रामीण बच्चों को पिछले दो वर्ष में न के बराबर शिक्षा मिली है. प्राथमिक स्तर के बच्चे तो पढ़ना लगभग भूल गए हैं. बच्चे कुछ ही दिनों में लॉकडाउन के पहले की तुलना में तीन क्लास आगे की क्लास में पहुंचेंगे. सवाल यह है कि वे कैसे तीन साल उच्च क्लास की पढ़ाई को समझ पाएंगे. ऐसे में इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है कि अनेक बच्चे, खास कर ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे, ड्रॉपआउट हो जा सकते हैं.

ऐसी विकट परिस्थिति में एक विशेष पहल की ज़रूरत है. मंच ने मांग करते हुए कहा है कि ज़िला में एक व्यापक साक्षरता अभियान, खास कर प्राथमिक विद्यालय के बच्चों के लिए, शुरू किया जाए. इस अभियान के तहत सभी बच्चों को फाउंडेशन कोर्स पढ़ाया जाए ताकि ज़िला का एक भी बच्चा इस परिस्थिति में ड्रॉपआउट न हो और अगले वर्ष तक प्रत्येक बच्चे में अपनी उम्र व क्लास के अनुसार शैक्षणिक क्षमता विकसित हो सके तथा इस अभियान को कोल्हान का समाज, जन प्रतिनिधि, प्रशासन, सामाजिक संगठन, NGO आदि मिलकर आगे बढाएं .

अभियान के तहत रोज़ शाम को (नियमित विद्यालय के बाद) बच्चों को उनके ही टोले में दो घंटे के लिए फाउंडेशन कोर्स की पढ़ाई को पूरा किया जाए. हर टोले से 10वी पास युवाओं को टोले स्तर पर ही बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेवारी दी जाए. इनका चयन ग्राम सभा द्वारा किया जाए. चयनित युवाओं को सरल प्रशिक्षण दिया जाए. उनके सहयोग के लिए उन्हें प्रशंसा पत्र और 1000 रु प्रति माह की प्रोत्साहन राशि दी जाए. युवाओं के साथ-साथ हर स्तर के सभी प्रशासनिक पदाधिकारी व विभागीय कर्मियों को भी इससे जोड़ा जाए और सब को सप्ताह में कम-से-कम एक दिन (दो घंटे) पढ़ाने की ज़िम्मेवारी दी जाए.

विद्यालय प्रबंधन समिति, महिला संगठनों (समूह, ग्राम संगठन, फेडरेशन आदि), सामाजिक संगठनों व NGOs से भी इस अभियान में सहयोग माँगा जाए. उदहारण के लिए, युवाओं के चयन, प्रशिक्षण आदि में. पारंपरिक प्रधानों से अभियान में निगरानी व जागरूकता सम्बंधित सहयोग माँगा जाए. अख़बार, प्रचार वाहन, दीवाल लेखन, फ्लेक्स, सोशल मीडिया आदि के माध्यम से अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए. अभियान के लिए ज़िला मिनरल फाउंडेशन (DMF) फण्ड का इस्तेमाल किया जाए. मंच ने उपायुक्त को संलग्न मांग पत्र दिया. प्रतिनिधिमंडल में अजित कान्डेयांग, अशोक मुन्डरी, हेलेन सुन्डी, मनीता देवगम, रंजीत किंडो, रमेश जेराई और सिराज दत्ता शामिल थे.

निश्चय ही पढ़ाई में लम्बे गैप के कारण झारखंड के सभी जिलों के लिए यह मांग बेहद महत्वपूर्ण है। यह प्रोफेसर एवं सामाजिक कार्यकर्ता ज्यां द्रेज के सुझाव की जरूरतों को भी रेखांकित करता है तथा उसे जमीनी धरातल पर जन भागीदारी के साथ आगे बढ़ाता है।

 

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