वैश्विक संक्रामक महामारी कोविड-19 के प्रकोप के साये में इस बार लगातार दूसरे वर्ष हम पांच सितंबर को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस (teachers day) मनाने जा रहे हैं। कोरोना काल में स्कूली पढ़ाई के बदले स्वरूप के साथ ही शिक्षक दिवस समारोह का स्वरूप भी बदला होगा। लेकिन इन सबके बावजूद, हम अपने शिक्षकों के सम्मान में उनके लिए इस दिन को खास तौर पर यादगार बना सकते हैं। इस बार कोविड-19 महामारी के कारण महीनों स्कूल बंद रहे हैं, कई जगह स्कूल खुल भी गए है। वर्चुअली पढ़ाई के साथ अब शिक्षकों के लिए स्टूडेंट्स अब विडियो आदि बनाकर शिक्षकों का आभार प्रकट कर रहे हैं।

शिक्षक एक बच्चे के मानसिक विकास के पीछे पावरफुल फोर्स हैं, खासकर जब वो विकासशील वर्षों में हों. शिक्षक या मार्गदर्शक शिक्षा की क्वालिटी और किसी के भविष्य को आकार देने में सबसे प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं. वो न केवल सिखाते हैं बल्कि बच्चों को जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करते हैं.

क्यूंकि युवा देश का भविष्य है, इसलिए शिक्षक की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वो न केवल एक व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़ा करने में सक्षम बनाते हैं बल्कि एक राष्ट्र को भी आकार देते हैं. शिक्षकों को कई भूमिकाएं निभानी होती हैं और उनका एक्सपीरियंस और कंपैशन ही उन्हें एक अच्छा मेंटर बनाती है.

‘शिक्षक दिवस’ क्यों मनाया जाता है?

पेट्रीसिया क्रॉस के जरिए कहा गया है, “एक्सीलेंट टीचर का काम ‘स्पष्ट रूप से सामान्य’ लोगों को असामान्य प्रयास के लिए प्रोत्साहित करना है. कठिन समस्या विजेताओं की पहचान करने के लिए नहीं है, बल्कि सामान्य लोगों में से विजेता बनाना है.”

युवा किसी भी देश की रीढ़ होते हैं और अच्छे नागरिक बनने के लिए शिक्षक छात्रों को आकार और इनर स्ट्रेन्थ देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसलिए, हमारे गुरुओं को एक दिन समर्पित करने के लिए इस दिन को स्कूलों, कॉलेजों और कई दूसरे संस्थानों में मनाया जाता है.

हालांकि, विश्व शिक्षक दिवस, जिसे अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में जाना जाता है, जो कि 5 अक्टूबर को मनाया जाता रहा है, लेकिन भारत में, डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की याद में सन् 1962 से 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. 

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