आज दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जा रहा है. विश्व शांति दिवस के दिन शांति से ज्यादा अशांति की चर्चा करना इस समय की मजबूरी है। आज दुनिया कितनी शांत है इसे यूं बयां किया जा सकता है कि बस कहीं बड़ी तोपें नहीं गरज रहीं, क्योंकि जंग ने रूप बदल लिया है। आज दुनिया में हथियारों की होड़ मची है। इस पर नियंत्रण करने के लिए जिम्मेदार राष्ट्र संघ जैसी संस्थाएं निष्प्रभावी साबित हो रही हैं। अफगानिस्तान में जो कुछ हुआ उसके दूरगामी परिणाम होंगे मगर आज दक्षिण एशिया में उसके पड़ोसी मुल्कों सहित दुनिया की तमाम ताकतें लगभग खामोश तमाशा देख रही हैं। दुनिया में जारी तमाम युद्धों के पीछे वे ताकतें हैं जिनकी अर्थव्यवस्था का आधार ही हथियारों का उत्पादन एवं बिक्री है। युद्ध आज समाज की चिंता का विषय भी नहीं रहा।

विश्‍व शांति दिवस प्रति वर्ष 21 सितम्‍बर को मनाया जाता है।  इस दिवस का उदेश्‍य केवल सभी देशो व राष्‍ट्रो के बीच में स्‍वतंत्रा शांति व अंहिसा का प्रतीक है। अर्थात एक देश दूसरे देश के साथ स्‍वतंत्राा पूर्वक व्‍यापार कर सकते है। इस दिन दुनियाभर के लोगों में जागरुकता फैलायी जाती है कि हम एक दूसरे के दुश्मन नहीं हैं. इस दिवस को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर के देशों के बीच शांति को बढ़ावा देने और आपसी विवाद को समाप्त करने के लिए किया जाता है.

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस का इतिहास

दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस को मनाए जाने की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने 1981 में की थी. जिसके बाद पहली बार इसे साल 1982 के सितंबर माह के तीसरे मंगलवार को मनाया गया था. जिसके बाद 1982 से लेकर साल 2001 तक अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस को सितंबर माह के तीसरे मंगलवार को मनाया गया. वहीं संयुक्त राष्ट्र ने साल 2002 से इसे 21 सितंबर को मनाए जाने की घोषणा की थी. जिसके बाद से लेकर अभी तक हर साल 21 सितंबर के दिन अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जा रहा है.

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस को मनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में हर साल संयुक्त राष्ट्र शांति घंटी बजाई जाती है. यह घंटी अफ्रीका को छोड़कर सभी महाद्वीपों के बच्चों द्वारा दान किए गए सिक्कों से बनाई गई है. जो कि जापान के संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से युद्ध में मारे गए लोगों की याद दिलाने के रूप में एक गिफ्ट थी. जिसके किनारे ‘पूरे विश्व में लंबे समय तक शांति जीवित रहें’ लिखा हुआ है.

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की महत्व

संयुक्त राष्ट्र ने हर साल की तरह इस साल भी अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाए जाने के लिए थीम अनाउंस की है. इस साल अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की थीम ‘एक समान और सतत विश्व के लिए बेहतर रिकवरी’ का चयन किया गया है. कोरोना महामारी पर ध्यान केंद्रित करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ का कहना है कि महामारी के इस दौर में दया, आशा और करूणा से अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस को मनाएं, साथ ही भेदभाव या घृणा को खत्म करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के साथ खड़े हों.

अंतरराष्‍ट्रीय शांति दिवस 2021 की थीम

इस वर्ष विश्‍व शांति दिवस (World Peace Day) 2021 की थीम है- “Recovering better for an Equitable and Sustainable world” अर्थात एक न्‍यायसंगत और सतत दुनिया के एिल बेहतर वसूली है। 

भारत मे तेजी से बढ़ रही हिंसा की घटनाएं 

भारतीय समाज जातियों, धर्मों, समुदायों और क्षेत्रीयताओं में बंटा हुआ है और समय-समय पर विभिन्न जातियों, धर्मों, समुदायों और क्षेत्रीयताओं के बीच संघर्ष होता रहता है. भारतीय समाज जातियों, धर्मों, समुदायों और क्षेत्रीयताओं में बंटा हुआ है और समय-समय पर विभिन्न जातियों, धर्मों, समुदायों और क्षेत्रीयताओं के बीच संघर्ष होता रहता है.

अंतरराष्‍ट्रीय शांति दिवस पर मुख्‍य तथ्‍य

 पं जवाहर लाला नेहरू पूरे विश्‍वभर में शांति बनाऐ रखने के लिए स्‍वमं के द्वारा पांच मूल उपदेश दिए है। जिन्‍हे पंचशील सिद्धांत भी कहा गया है। ये पांच मूल सिद्धांत इस प्रकार है:-

  • कोई भी देश एक-दूसरे के अंदरूनी मामलो में दखलदाजी या हस्‍तक्षेप ना करे।
  • सभी राष्‍ट्र एक-दूसरे के फायदे व नीती की बात करे ना की एक-दूसरे की बार्बादी के।
  • कोई भी राष्‍ट्र एक दूसरे के आक्रामक कार्यवाही ना करे।
  • विश्‍वभर के सभी राष्‍ट्र शांतिपूर्वक सह-अस्तित्‍व की नीति‍ में विश्‍वास रखे।
  • सभी देश एक-दूसरे की प्रादेशिक अखंडता और प्रभुसत्ता या सविधान का समान करे।
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